संजय कुमार सिंह
आज के अखबारों में दो तरह की खबरें हैं। पहली तो यही कि दुनिया भर के देश ट्रम्प के टैरिफ से जूझने के लिए क्या कर रहे हैं। दूसरी यह कि भारत के प्रधानमंत्री बांग्लादेश को बयानबाजी से बचने का ज्ञान दे रहे हैं। तीसरी खबर यह है कि भारत में अमेरिकी टैरिफ पर सरकारी स्टैंड न होने का क्या असर है। इन खबरों के बीच वक्फ विधेयक पास होने का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश और इसमें राहुल व प्रियंका गांधी की आलोचना इंडियन एक्सप्रेस की विशेष खबर है। उदाहरण के लिए, इंडियन एक्सप्रेस की लीड का शीर्षक है, उत्तर पूर्व पर युनूस की टिप्पणी के बाद प्रधानमंत्री ने युनूस से कहा कि ऐसी बयानबाजियों से बचा जाय जो माहौल खराब करते हैं। अमर उजाला ने इसे और स्पष्ट लिखा है, मोदी ने कहा – बांग्लादेश अल्पसंखयकों (हिन्दुओं) की सुरक्षा करे, हिन्दुओं पर अत्याचारों की जांच कराये। साथ में सिंगल कॉलम की खबर है – पीएम की सलाह…माहौल खराब करने वाली बयानबाजी से बचें। अमर उजाला में अमेरिकी टैरिफ से संबंधित कोई खबर पहले पन्ने पर नहीं है। चार कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, श्रीलंका के साथ ऊर्जा, व्यापार और रक्षा के क्षेत्रों में होंगे करार। उपशीर्षक है, कोलंबो पहुंचे पीएम मोदी, एयरपोर्ट पर छह शीर्ष मंत्रियों ने स्वागत किया।
आप जानते हैं कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद युनूस और प्रधानमंत्री की मुलाकात बिम्सटेक बैठक के मौके पर बैंकाक में हो रही है और यह पिछले अगस्त में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद पहली है। शेख हसीना ने सत्ता से बेदखल किये जाने के बाद भारत में शरण ली थी। इंडियन एक्सप्रेस ने अपने शीर्षक से अलग, खबर के पहले पैरे में लिखा है, दोनों नेताओं ने अपनी इस मुलाकात में अपनी चिन्ताओं को रेखांकित किया। 40 मिनट की इस बैठक में मोदी ने हिन्दुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया तो युनूस ने उनसे शेख हसीना के प्रत्यर्पण के ढाका के आग्रह के बारे में पूछा। लीड के साथ एक खबर का शीर्षक बिम्सटेक में प्रधानमंत्री की पहल की चर्चा करता है और तीसरी खबर बताती है कि मोदी की नेपाल के प्रधानमंत्री ओली से भी मुलाकात हुई और दोनों संबंधों को मजबूत बनाने पर सहमत हुए। आप जानते हैं कि 2014 के बाद से नेपाल के साथ भारत के संबंध कैसे रहे हैं और संक्षेप में इसे असामान्य भी कहा जाये तो अब दिख रहा है कि इंडियन एकस्प्रेस भारत या प्रधानमंत्री की दंबंगई स्थापित करने के प्रयास कर रहा है और यह शायद इसलिए कि अमेरिका से निपटने के लिए भारत या मोदी की रणनीति के बारे में बताने के लिए अखबार के पास पहले पन्ने पर कुछ नहीं है।
दूसरी ओर, सरकार के काम की प्राथमिकता या उसे प्रचारित करने की मुस्तैदी ऐसी है कि आज इंडियन एक्सप्रेस के पहले पन्ने की खबर बताती है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी की सुरक्षा का स्तर कम कर दिया गया है। मुझे नहीं लगता है कि यह काम इतना जरूरी थी और सुरक्षा का स्तर जेड की जगह जेड प्लस ही रहता या पूरी तरह खत्म ही कर दिया जाये तो कुछ फर्क पड़ना है। वैसे भी, सर्वोच्च स्तर की सुरक्षा के बावजूद देश के दो प्रधानमंत्री मारे जा चुके हैं। उसके बाद मुझे नहीं लगता कि इसपर कुछ बात करने की जरूरत है। फिर भी आप जानते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री की बेटी के रूप में प्रियंका गांधी को मिली सुरक्षा घटाई गई तो उन्हें दिल्ली में मिला बंगला खाली करना पड़ा था और तब खाली करने के लिए समय मांगने की खबर भी फैली-और फैलाई गई थी। बाद में प्रियंका गांधी ने इससे इनकार किया था। अब वही प्रियंका गांधी सांसद हैं और फिर दिल्ली में बंगला मिला ही होगा। आज इंडियन एक्सप्रेस के पहले पन्ने की एक खबर का शीर्षक यह भी है कि वक्फ विधेयक पर चर्चा में राहुल गांधी ने हिस्सा नहीं लिया और प्रियंका गांधी संसद में नहीं थीं। खबर के इंट्रो बताता है कि आईयूएमएल (जो केरल राज्य में कांग्रेस का सहयोगी है) समर्थक दैनिक ने वायनाड के सांसद की अनुपस्थिति को एक धब्बा बताया है और यह उसके संपादकीय में लिखा गया है जबकि इंडियन एक्सप्रेस की खबर है कि वे (प्रियंका) अमेरिका में किसी बीमार रिश्तेदार से मिलने गई हुई हैं। जो भी हो, मुझे लगता है कि यह अखबारों के राजनीति में कूद जाने का उदाहरण है और (शायद) इसीलिये पहले पन्ने की खबर है। वैसे, विज्ञापन न हो तो पूरा पन्ना भरने की मुश्किलें मैं जानता हूं। पर सच्चाई यह भी है कि भाजपा राज में यह कांग्रेस के विरोध का स्तर है और इंडियन एक्सप्रेस इसे गंभीरता से रिपोर्ट कर रहा है तो यह उसका जर्नलिज्म ऑफ करेज है। मैं सिर्फ तथ्यों को रेखांकित कर रहा हूं।
टाइम्स ऑफ इंडिया में आज ऊपर से नीचे तक चार कॉलम यानी आधे पन्ने का विज्ञापन है। इसमें लीड का शीर्षक है, “अल्पंसख्यकों की रक्षा कीजिये : मोदी। हसीना को रोकिये : युनूस”। आज इसके ठीक नीचे की खबर को सेकेंड लीड कहा जायेगा और इसका शीर्षक है, निर्यात आदेश होल्ड पर, अमेरिकी खरीदार 15-20% छूट मांग रहे हैं। इंट्रो है, आपूर्तिकर्ताओं को मंदी, मांग खत्म होने की चिन्ता। इसके साथ की एक खबर है, चीन ने 34% लेवी और ज्यादा से पलटवार किया। भारत पर लेवी : 26%, फिर 27% और अब 26%। इसके साथ दो कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, निर्यातक चाहते हैं कि लाभ बहाल हो, द्विपक्षीय करार पर जोर दिया जाये। इंडियन एक्सप्रेस में इन खबरों से अलग एक खबर का शीर्षक है, एक दिन बाद : सरकार की मेज पर चीनी आयात में संभावित वृद्धि का मुद्दा। इसके साथ की दूसरी खबर चीनी पलटवार की है जो टाइम्स ऑफ इंडिया में सिंगल कॉलम की है यहां डबल कॉलम की।
हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, संबंध खराब होने के बाद से मोदी और युनूस की पहली वार्ता हुई। इसके साथ सेकेंड लीड, चीन के पलटवार और 34 प्रतिशत शुल्क लगाये जाने की खबर है। अमेरिकी टैरिफ से संबंधित भारत का कोई मामला यहां पहले पन्ने पर नहीं है। सरकार की विशेष सेवा में चीनी पलटवार की खबर भी दबा दी गई है। ताकि पाठकों को यह नहीं लगे कि भारत ने इतना भी नहीं किया। जो भी हो, मामला इतना आसान नहीं है और भारत सरकार का रुख बता रहा है कि मामला उसके नियंत्रण में नहीं है। द हिन्दू में चीन की कार्रवाई लीड है। आज की दूसरी बड़ी खबर का शीर्षक है, मोदी और युनूस ने मतभेद भुलाकर अल्पसंख्यकों और सीमा पर स्थिति की चर्चा की। द एशियन एज में आज मणिपुर की एक ऐसी खबर है जो किसी और अखबार में इतनी प्रमुखता से नहीं है। पांच कॉलम की खबर के अनुसार, कुकी मेइती समूहों को दिल्ली में आज बैठक के लिए बुलाया गया है। उपशीर्षक है, समाधान हासिल करने की एक कोशिश में गृहमंत्री ने प्रतिद्वंद्वी पक्ष को बुलाया। प्रचार और डेटलाइन मैनेजमेंट पर आश्रित पार्टी अगर इतने समय पर यह बैठक बुला रही है तो खबर क्यों नहीं है समझना मुश्किल नहीं है और खबर नहीं है यह तो काम क्या होता वह अपनी जगह एक अलग अनुत्तरित सवाल है।
द टेलीग्राफ में लीड का शीर्षक है, “मोदी ने युनूस से कहा : बयानबाजी नहीं”। कहने की जरूरत नहीं है कि नरेन्द्र मोदी बयानबाजी और जवाबी बयानबाजी के कैसे खिलाड़ी है। ऐसे खिलाड़ी और उनकी पूरी सरकार की बोलती अमेरिकी टैरिफ की खबर के बाद से ही बंद है। कुछ होता तो आज के अखबारों में दिखता और दिखना चाहिये था। पर नहीं है और जो है वह युनूस को सलाह या आदेश के रूप में। इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, ढाका ने हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की दिल्ली ने हिन्दुओं की सुरक्षा की। इंडियन एक्सप्रेस ने जब यह बताया है कि केरल का कोई दैनिक वक्फ विधेयक पर राहुल और प्रियंका के नहीं बोलने पर संपादकीय लिख रहा है तो द टेलीग्राफ ने बताया है, कांग्रेस और द्रमुक सुप्रीम कोर्ट में वक्फ विधेयक को चुनौती देंगे। ऐसा नहीं है कि अमेरिकी टैरिफ पर भारत की चुप्पी को द टेलीग्राफ ने नजरअंदाज किया है। इसपर भी एक खबर है और इसका शीर्षक है, टैरिफ युद्ध में ट्रम्प का खेल हार रहा है। शुल्क का असर भारतीय, चीनी खिलौना उद्योग पर ज्यादा होगा। नवोदय टाइम्स की लीड चीन का पलटवार है तो सेकेंड लीड का शीर्षक युनूस से भारत की मांग है। भारत से युनूस की मांग शीर्षक में नहीं है और फ्लैग शीर्षक भी यह नहीं है कि बिम्सटेक के मौके पर मोदी युनूस बैंकाक में मिले, पहली बार मिले या हसीना के सत्ता से हटने के बाद पहली बार मिले। शीर्षक है, मुहम्मद युनूस मिले प्रधानमंत्री मोदी से। इसमें ‘हमारे’ लिखकर चिकनई बढ़ाई जा सकती थी पर पाठकों को बख्श दिया गया है। बीच में सिंगल कॉलम की एक खबर बता रही है कि ट्रेड वार की आशंका से पूंजी बाजार सहमा हुआ है और सेनसेक्स 931 अंक लुढ़का।


