Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

आज के अखबार : कई रोज वक्फ विधेयक, चर्चा और कानून बनने की खबरों के बाद अब लागू होने की भी…!

संजय कुमार सिंह

हिन्दुओं का भला करने के नाम पर सत्ता पाने वाली, तुष्टीकरण विरोधी सरकार ने किसी खास मांग के बगैर नया वक्फ कानून लागू कर दिया है और लगातार कई दिन से छप रही खबरों के बाद आज नया वक्फ कानून लागू होने की खबर भी प्रमुखता से छपी है। ऐसे किसी कानून की मांग नहीं थी और किसानों के एमएसपी की मांग पर सुनवाई तो नहीं ही हो रही है वह खबर भी नहीं बनती है। हिन्दुओं का भला करने वाली सरकार ने मुसलमानों के लिए नया कानून बनाने का दावा किया है तो बुकमाईशो ने कॉमेडियन कुणाल कामरा के कंटेंट को ब्लॉक कर दिया है तथा आर्टिस्ट लिस्ट से नाम भी हटा दिया गया है। कहने की जरूरत नहीं है कि कुणाल कामरा सरकार के प्रिय ‘हिन्दू’ हैं और न सिर्फ उन्हें अपना काम करने से रोका जा रहा है बल्कि उनके काम को भी अपराध बना दिया गया है। उनके दर्शकों से गवाही लेने के बाद उन्हें दर्शक मिलना भी मुश्किल होने वाला है। अब उनके शो को बुकमाईशो से हटाने की खबर है जो आज अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं है।

नरेन्द्र मोदी मुसलमानों के हित में सरकारी काम को ‘तुष्टिकरण’ और हिन्दुओं के हित में अपने काम को ‘संतुष्टीकरण” कहते हैं। भारत जैसे धर्म निरपेक्ष देश में खुल कर हिन्दू मुस्लिम करने वाले पहले प्रधानमंत्री अब खुद न सिर्फ तुष्टीकरण कर रहे हैं बल्कि संतुष्टीकरण के मामले में ढीले भी लग रहे हैं। उनके शासन और नेतृत्व में तमाम कॉमेडियन को परेशान किये जाने और काम बंद करने के लिए मजबूर किये जाने के बाद अब कुणाल कामरा को परेशान किया जा रहा है। पहले परेशान किये गये कॉमेडियन अगर मुसलमान थे तो कुणाल कामरा के मामले में शक नहीं होना चाहिये और देश में जब रोजगार की कमी है, सरकार की कोशिशों (या दिखावे) के बाद भी जब रोजगार के मौके नहीं बढ़ रहे हैं और उसके काम व नीतियों से कई छोटे-मोटे काम बंद हुए हैं तब कॉमेडी के एक अपेक्षाकृत नये काम या प्रतिभा को फलने और कमाने से रोकने का मामला मुसलमानों से बढ़कर कुणाल कामरा तक पहुंच गया है। इस तरह उन्हें अपना काम करने के अधिकार से रोका जा रहा है जबकि सरकार का काम है कि किसी के लिए भी अपना व्यवसाय और रोजगार चलाना सुनिश्चित करे। 

कहने की जरूरत नहीं है कि बड़े व्यवसाय करने वाले को परेशान किये जाने, भारी टैक्स की मांग और नोटिस-छापे जैसी कार्रवाई के बाद इलेक्टोरल बांड के जरिये चंदा-दान मिलने पर मामला खत्म हो जाने के उदाहरण हैं। ऐसा ही विपक्षी राजनेताओं को परेशान करने, ब्लैकमेल करके समर्थन हासिल करने के मामले में है। कहा और दिखाया यह जाता था कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार आग लगाने वालों को कपड़ों से पहचान कर कार्रवाई करती है लेकिन अब दिख रहा है कि हर विरोधी को परेशान करती है। नये वक्फ कानून से मुसलमानों की भलाई की बात भले की जा रही है पर ऐसा है नहीं और हिन्दुओं के भले का दावा करने वाली सरकार विरोधियों को परेशान और बर्बाद करने में जरा नहीं हिचकती। कुणाल कामरा नया उदाहरण है और दिलचस्प यह कि ऐसी खबरों को जरूरी प्रमुखता नहीं मिलती है जबकि अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण खबरों को जरूरत से ज्यादा महत्व और प्रचार दिये जाने के ढेरों मामले हैं। सरकार विरोधी सही खबरों को झूठ बोलकर रोकने की कोशिश और झूठे खबरों को भी प्रचारित-प्रसारित किये जाने के भिन्न मामलों के बीच वक्फ कानून से संबंधित खबर को लगातार कई दिनों तक पहले पन्ने पर होना और कामरा के खिलाफ खबर को नहीं होना मीडिया के पक्षपात को साबित करता है। अमेरिकी टैरिफ और उससे होने वाली परेशानी तो मुद्दा भी नहीं है। कल मैंने इस बारे में लिखा भी था।

तथ्य यह है कि प्रधानमंत्री जब अमेरिकी टैरिफ के मामले में कुछ नहीं कर पा रहे हैं या करते दिख नहीं रहे हैं तब उनकी उपलब्धियों के पुल बांधे जा रहे हैं। कल बांग्लादेश के मोहम्मद युनूस को ज्ञान की खबर थी तो आज श्रीलंका से समझौता, घोषणा के साथ प्रधानमंत्री को श्रीलंका का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार दिया जाना भी बड़ी खबर है। इंडियन एक्सप्रेस की आज की लीड यही है। अमर उजाला की लीड का फ्लैग शीर्षक है, प्रधानमंत्री मोदी और श्रीलंकाई राष्ट्रपति के बीच वार्ता में दोस्ती के नये अध्याय की शुरुआत। यहां मुझे ट्रम्प से मोदी की दोस्ती याद आती है और इसमें ‘अबकी बार ट्रम्प सरकार’ का प्रचार भी। लेकिन उसी ट्रम्प ने न सिर्फ भारी टैरिफ लगाया है यूएसएड की सहायता को सार्वजनिक करके भी मोदी सरकार को परेशानी में डाला था। यूएसएड को ही बंद कर दिये जाने से भारत को आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी वह अलग चिन्ता का विषय है पर सरकार और उसके समर्थकों के लिए यह मुद्दा ही नहीं है। ऐसा नहीं है कि विदेशी सहायता बंद होने से देश में चल रहे जो काम बंद हुए हैं उनका कोई वैकल्पिक इंतजाम किया गया है। और किया भी गया हो तो वह पर्याप्त नहीं है, इससे न सिर्फ रोजगार के मौके कम हुए हैं, लाभार्थी भी परेशान हैं। ठीक-ठाक कमा रहे कॉमेडियन को बेरोजगार कर दिये जाने का नया मामला भी खबर नहीं है।

खबर दिल्ली में भी आयुष्मान योजना को लागू कर दिये जाने की है और यह दावा है कि इससे 36 लाख लोगों को फायदा मिलेगा। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले इसी साल जनवरी में खबर थी कि इस संबंध में हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इस संबंध में  दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी दिल्ली में इसे लागू करने के लिए केंद्र के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा था। इसके खिलाफ दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट गई पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले पर रोक लगा दी थी। तब आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना को देश का “सबसे बड़ा घोटाला” बताया। अब स्थितियां काफी बदल गई हैं। हाल की एक खबर के अनुसार, आयुष्मान भारत योजना के तहत हुई धोखाधड़ी और वित्तीय गबन के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कई जगहों पर छापेमारी की है। इनमें झारखंड के रांची, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत कम से कम एक दर्जन जगहों का नाम शामिल है। आप जानते हैं कि दिल्ली में भाजपा का राज है लेकिन पहले आम आदमी पार्टी की सरकार थी।  इनमें उत्तर प्रदेश अकेला ऐसा राज्य है जहां ईडी ने छापा मारा है और भाजपा की सरकार है।

इस घोटाले की बुनियाद 2023 में संसद में पेश सीएजी (कैग) रिपोर्ट में ही रख दी गई थी, जिसमें झारखंड में आयुष्मान योजना में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का खुलासा किया गया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि सिर्फ झारखंड में ही कम से कम 212 अस्पतालों ने बिना मरीजों के भर्ती हुए बीमा राशि हड़प ली। यानी दस्तावेजों में मरीज थे, पर असल में नहीं। जो भी हो, जांच चल रही है और जांच में उतना ही तथ्य सामने आयेगा जिसमें केंद्र की भाजपा सरकार परेशानी में नहीं पड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में तब केजरीवाल ने कहा था, “मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने पुष्टि की है कि यह एक फर्जी योजना है। आयुष्मान भारत देश का सबसे बड़ा घोटाला है। जब केंद्र सरकार बदलेगी और इन घोटालों की जांच होगी, तब लोगों को पता चलेगा कि आयुष्मान भारत वास्तव में कितना बड़ा घोटाला था।” अभी ऐसा हुआ नहीं है और भाजपा दिल्ली में जीत गई है तो आयुष्मान योजना भी लागू हो गया है।

आप जानते हैं कि मणिपुर के मेइती और कुकी समाज के लोग लगभग दो साल से लड़ रहे हैं। हाल में केंद्र सरकार ने दोनों समुदाय के लोगों को वार्ता के लिए बुलाया था। इसकी खबर सिर्फ दि एशियन एज में पहले पन्ने पर थी। आज उसका फॉलो अप भी कई अखबारों में है। खबर के अनुसार दोनों समुदायों के लोगों ने दिल्ली यानी केंद्र सरकार का बुलावे पर दिल्ली आया। दूसरे शब्दों में, अखबारों ने इस महत्वपूर्ण खबर को महत्व नहीं दिया। आज यह खबर फिर दि एशियन एज़ में है। द टेलीग्राफ ने भी यह खबर छापी है और बताया है कि, 3 मई 2023 को दो गुटों के बीच टकराव शुरू होने के बाद गृह मंत्रालय अब दोनों पक्षों को एक मंच पर लाने में कामयाब हुआ है। इसीलिये यह खबर आज द हिन्दू में भी टॉप पर है। प्रधानमंत्री के प्रचार में आज की खबर दि एशियन एज की लीड है। लगभग यही खबर नवोदय टाइम्स की लीड है। इसका शीर्षक है,  श्रीलंका अपनी जमीन का प्रयोग भारत के खिलाफ नहीं होने देंगे। द हिन्दू की लीड इस आश्वासन का प्रचार नहीं है पर यह तथ्य है कि भारत और श्रीलंका के बीच सात करार हुए हैं, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में संबंध बेहतर हुआ है। ऐसे में टाइम्स ऑफ इंडिया में श्रीलंका की खबर लीड है तो वक्फ विधेयक की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की खबर सेकेंड लीड है।

आज न सिर्फ कुणाल कामरा की खबर पहले पन्ने से गायब है बल्कि ट्रम्प के टैरिफ की खबर भी नहीं के बराबर है। अकेले हिन्दुस्तान टाइम्स ने इसे सेकेंड लीड बनाया है और बताया है कि ट्रम्प की 10 प्रतिशत बेसलाइन टैरिफ लागू हो चुकी है। इसके साथ एक खबर और है जो बताती है कि भारत चीन से आयात में वृद्धि को नियंत्रित रखेगा। वैसे तो यह अनाम सूत्रों की खबर है लेकिन इसके जरिये चीन से आयात न करने की प्रतिज्ञा पर बने रहने की कोशिश की जा रही है जबकि सच यह है कि चीन से आयात रोक दिये जाने जैसे प्रचार के बावजूद काफी कुछ आयात हो रहा था और अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने पर भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है और दबाव चीन से आयात बढ़ने का ही है। कुल मिलाकर आयात औऱ निर्यात जरूरत के साथ कीमत औऱ गुणवत्ता पर निर्भर करने का मामला है और बाजार का अपना दबाव रहता ही है। इसमें सरकारी बडबोलेपन की गुंजाइश रहती ही नहीं है। पर सरकार को अपनी और अखबारों को सरकार की छवि की चिन्ता सताये तो यही होता है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इतवार के अपने संस्करण में पहले पन्ने पर फोटो के साथ कुणाल कामरा के मामले की चर्चा की है और बताया है कि खबर अंदर है।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन