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आज के अखबार : नहीं बताते कि मालेगांव के आरोपियों के घर क्यों नहीं गिराये, नहीं पूछते कि उन्हें सुविधा क्यों?  

संजय कुमार सिंह

आज की खबरों में सबसे दिलचस्प और महत्वपूर्ण है, बैकफुट पर आया पाकिस्तान निष्पक्ष जांच के लिए तैयार। कहने की जरूरत नहीं है कि पाकिस्तान जांच के लिए तैयार है तो बैकफुट पर आना कहा जा रहा है और हमारी सरकार कई मामलों की जांच कराने के तैयार नहीं है और निष्पक्ष जांच तो छोड़िये सेबी मामले में सेबी की ही जांच को अंतिम मान लिया गया और सुप्रीम कोर्ट से भी क्लिन चिट मिल गई। ऐसा कई मामलों में है और सहारा पेपर से लेकर जज लोया की संदिग्ध मौत की जांच नहीं हुई, अदाणी के 20,000 करोड़ की जांच नहीं हुई भले इस तरह के निवेश रोकने के लिए लाखों शेल कंपनियां बंद करने के दावे किये गये हैं। कुल मिलाकर जांच तब नहीं होती है जब आरोप गंभीर होते हैं। इस लिहाज से कहा जा सकता है कि पाकिस्तान अगर जांच के लिए तैयार है तो वह दोषी नहीं होगा और होता तो भारत में इतनी बड़ी कार्रवाई की जरूरत क्यों होती जो आज खबर में है। और अगर पाकिस्तान ने इतने लोगों की मदद से इतनी बड़ी घटना को फिर अंजाम दे दिया तो जरूरी नहीं है कि पहले अपना घर दुरुस्त किया जाये। लेकिन राजा पर उंगली कौन उठाये और चौकीदार (या प्रधानसेवक) को अब राजा बना दिया गया है। स्थिति यह है कि सवाल कोई नहीं और जो भी करें उसका आंख बंद करके समर्थन। राजा और तानाशाह ऐसा ही तो होता है। दूसरी ओर, पहलगाम हमले में पाकिस्तान पर आरोप बिना किसी सबूत के लगाये गये हैं और यह अमर उजाला की आज की उपोक् खबर का उपशीर्षक है, फिर भी पाकिस्तान से युद्ध जैसे हालात बना दिये गये हैं और चीन के समय कह दिया गया कि ना कोई घुसा है …. फिर भी नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, करारे जवाब की पूरी तैयारी। हो सकता है इसके जरिये 56 ईंची सीने को फिर से चमकाने की तैयारी हो।  

आज अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, पहलगाम एनआईए को जांच, लश्कर कमांडर समेत पांच और आतंकियों के घर ध्वस्त, 63 आतंकी ठिकानों पर छापे। ये सब आतंकवाद खत्म होने की घोषणा के बाद बचे हुए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद आरोपियों के मकान ध्वस्त करना जारी है लेकिन आरोपी तो साध्वी प्रज्ञा और दूसरे लोग भी हैं। एनआईए ने फांसी की मांग की है। सरकार ने सांसद बना दिया था। मकान ध्वस्त करने का ख्याल अब भी नहीं आया। अमर उजाला की मानें तो जम्मू कश्मीर में सक्रिय 14 स्थानीय आतंकियों की सूची तैयार है। दो दिन में सात दहशतगर्दों के घर जमींदोज किये गये हैं। यह सब लिखा तो सरकार की तारीफ में गया है पर सच यह है कि आतंकवाद खत्म होने के दावे के बावजूद था और जो किया गया वह अब किया गया है। हेडलाइन मैनेजमेंट है। पुलवामा के बाद क्यों नहीं किया गया, समझना मुश्किल है। हालांकि, तब बालाकोट हमले में 300 आतंकी मारने का दावा किया गया था लेकिन अखबारों की खबर थी कि सिर्फ एक कौव्वा मरा था।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर का शीर्षक है, कूटनीतिक कदमों के बाद सरकार के पास जवाबी विकल्पों की रेंज है। द टेलीग्राफ की लीड का शीर्षक है, (आतंकियों, असल में आतंक फैलाने के आरोपियों)  के घर विस्फोट से उड़ाये गये। इसका उपशीर्षक है, विस्फोट से पहले घर खाली करा दिया गया। कहने की जरूरत नहीं है कि छोटे-मोटे अपराधियों को तो फर्जी और असली मुठभेड़ों में मार दिया जाता है। यहां पाकिस्तान समर्थित आतंकियों के घर उड़ाये जा रहे हैं पर उन्हें घर से निकालकर। उधर पाकिस्तान का पानी रोक कर उसे बूंज-बूंद के लिए तड़पाने की दिलचस्प कहानी गढ़ी जा रही है। इस नाम पर ऐसी तैयारी की जा रही है जो बिहार को बाढ़ से बचाने के लिए 50 साल में नहीं की गई। कुल मिलाकर, यह एक मनमानी है और तानाशाही प्रवृत्ति का खुलासा। इसका पता संघ परिवार की कार्यशैली और मांग से भी चलता है। उदाहरण के लिए, आज नवोदय टाइम्स के शीर्षक से लगता है कि संघ परिवार को तानासाही तो छोड़िये रज व्यवस्था से भी दिक्कत नहीं है। इसके अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है, प्रजा की रक्षा का कर्तव्य निभाये राजा।

हम जानते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री निर्वाचित होते हैं और राजा नहीं हैं। हैं तो वे चौकीदार और प्रधान सेवक भी नहीं लेकिन संघ की योजना (और इच्छा) संविधान बदलने की है और संभव है उसमें प्रधानमंत्री को राजा बनाने की योजना हो। इसके लिए वही राजा बेटा चुने गये लगते हैं हालांकि, यह खबर एक पुस्तक के विमोचन की है जिसका नाम ही दि हिन्दू मैनिफेस्टो है। संघ प्रमुख हिन्दू मैनिफेस्टो और राजा व प्रजा की बात कर रहे हैं तो नवोदय टाइम्स इसे पहले पन्ने पर छाप रहा है। साथ में लीड के उपशीर्षक में तीन बुलेट प्वाइंट्स हैं और इनमें अंतिम है, मीडिया को एडवाइजरी जारी। मैं रोज यहां लिखता और बताता हूं कि मीडिया सरकार का समर्थन करती है और उसी के प्रचार में लगी है। इसके बावजूद सरकार अगर मीडिया को सलाह दे रही है वे सुन और छाप रहे हैं तो स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। खबरों से भी इसका पता चलता है दि एशियन एज में आज पांच कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, 175 संदिग्ध गिरफ्तार; चार और आतंकियो के घर गिराये गये। कहने की जरूरत नहीं है कि पहलगााम हमले के वक्त आतंकियों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं थी और वे उंगलियों पर गिने गये हैं। फिर भी इस खबर पर यकीन किया जाये तो 175 गिरफ्तार किये जा चुके हैं। घर तो गिराये ही जा रहे हैं। दूसरी ओर, मालेगांव विस्फोट मामले में सरकार क प्यारी एजेंसी एनआईए ने साध्वी प्रज्ञा को फांसी की मांग की है। अन्य आरोपी भी हैं। लेकिन किसी का घर गिराये जाने की कोई खबर नहीं आई और यह मालेगांव मामले में ही नहीं है समझौता एक्सप्रेस मामले में भी है। हालांकि उसके अभियुक्त कोर्ट से छूट गये और फैसला आने से पहले ही उस समय के गृहमंत्री ने कह दिया था कि सरकार ऊपर की अदालत में अपील नहीं करेगी जबकि फैसले में अदालत ने पुलिस पर जांच में लापरवाही का आरोप लगाया और उसकी आलोचना की थी। इस तरह आरोपियों का घर ध्वस्त नहीं हुआ।

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