Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

आज के अखबार : चुनावी चाल को प्रमुखता, देर हो चुकी जनगणना शुरू करने की न कोई तारीख ना समय-सीमा  

संजय कुमार सिंह

पहलगाम के बाद सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिशों और पाकिस्तान के साथ युद्ध जैसी स्थितियों का खुलासा होने के बाद सेना को ‘खुली छूट’ देने की घोषणा की भरपूर आलोचना हुई और सवाल उठा कि यह छूट अभी तक क्यों नहीं थी और थी तो अब नया क्या हुआ और आतंकवाद के खात्मे के लिए यह कैसी कार्रवाई हुई। इसके बाद केंद्र सरकार ने नया चुनावी चाल चला है। 2021 में होने वाली जो जनगणना कोविड के कारण नहीं हो पाई थी उसकी घोषणा अब की गई है। खास बात यह है कि इसमें जाति का एक कॉलम होगा और इस तरह विपक्ष की एक बड़ी मांग पूरी हो गई है। इसे कांग्रेस या राहुल गांधी की जीत के रूप में भी देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा है लेकिन ज्यादातर अखबारों में यह सरकार के एक कदम के रूप में है और प्रस्तुति ऐसी है जैसे सरकार के इस जरूरी काम का श्रेय भाजपा और नरेन्द्र मोदी को मिले। भाजपा इसमें उस्ताद है और इस घोषणा में ना काम शुरू होने की तारीख है ना समय सीमा है। फिर भी सरकार का प्रचार तो हो ही रहा है। आगे जो होगा वह तो तब की बात होगी अभी यह केवल हेडलाइन मैनेजमेंट है। सही अर्थों में इस समय यह घोषणा भाजपा और नरेन्द्र मोदी की चुनावी चालों का हिस्सा है और यह अखबारों के शीर्षक से भी स्पष्ट है। सरकार अपनी कोशिश कर रही है। पहले लोग समझते नहीं थे या बोलते नहीं थे अब समझते हैं और बोलते भी हैं। आज मेरे आठ अखबारों में नवोदय टाइम्स अकेला है जिसमें जाति जनगणना की खबर पर विशेष टिप्पणी है। अब ऐसा बहुत कम होता है।

द टेलीग्राफ की खबर का शीर्षक है, जाति जनगणना (होगी) पर कोई समय सीमा नहीं। दि एशियन एज का शीर्षक है, जाति जनगणना को सरकार की सहमति मिली : कांग्रेस और विपक्ष को उखाड़ने की कोशिश। हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक है, अगली जनगणना में जाति गणना भी होगी : सरकार, द हिन्दू का शीर्षक है, मंत्रिमंडल ने अगली जनगणना में जाति गणना भी शामिल करने का निर्णय किया। उपशीर्षक में बताया गया है कि देर हो चुकी जनगणना की तारीख की घोषणा नहीं हुई है, टाइम्स ऑफ इंडिया का मुख्य शीर्षक है, सरकार ने तय किया, जनगणना के साथ जाति गणना होगी। इसका इंट्रो है, बिहार चुनाव में विपक्ष के मुद्दे को बेअसर करने की कोशिश? इंडियन एक्सप्रेस ने शीर्षक में लिखा है, (अमित) शाह ने इसे ऐतिहासिक कहा। टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है, शाह ने इस कदम की तारीफ की विपक्ष ने कहा कि हमने सरकार को काम करने के लिये मजबूर किया। अमर उजाला ने लिखा है, देश में अब होगी जाति जनगणना। इंडियन एक्सप्रेस ने इसपर चल रही राजनीति के बारे में भी बताया है और लिखा है कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि जाति जनगणना सामाजिक और आर्थिक संरचना को मजबूत करेगी जबकि गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 20 जुलाई 2021 को कहा था (इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार) कि जाति जनगणना सामाजिक न्याय के लिये विभाजनकारी है और नीतिगत मामले के रूप में भारत सरकार ने तय किया है कि वह जातिवार जनगणना नहीं करायेगी। अब अचानक यह घोषणा हेडलाइन मैनेजमेंट के साथ बिहार चुनाव के लिए भाजपा की चाल है। शुरू करने की तारीख और किसी समय सीमा के बिना यह कैसी घोषणा हो सकती है, समझना मुश्किल नहीं है। पर अखबारों की खबरों से संदेश यही जाता है कि सरकार ने कुछ किया है।

जनगणना और उसके साथ जातिवार जनगणना की घोषणा जिस समय में और जैसे की गई है उससे स्पष्ट है कि सरकार की मंशा क्या है। जब इसमें न तो शुरू होने की तारीख है और न काम पूर्ण करने की कोई समय सीमा। इससे  साफ है कि यह चुनावी चाल है और हेडलाइन मैनेजमेंट के लिए की गई घोषणा है। इसीलिए, आज यह खबर इतनी प्रमुखता से नहीं है कि राहुल गांधी ने सरकारी कदम का समर्थन किया और इस संबंध में रोडमैप जारी करने की मांग की है। दूसरी ओर, इस घोषणा से समझा जा रहा है कि पाकिस्तान के साथ युद्ध टल गया है और सरकार ने या तो इसकी जरूरत नहीं समझी या देश में स्थितियां युदध के अनुकूल नहीं हैं। जो भी हो, अमर उजाला की आज की दूसरी लीड जो दूसरे पहले पन्ने पर है का सात कॉलम का शीर्षक है, भारत होकर नहीं गुजर सकेंगे, पाकिस्तानी विमान और यह रोक आतंकवाद पर एक और चोट है फिर भी 23 तक ही लगी है और आधी रात से लागू हुई है। द हिन्दू में यह खबर सिंगल कॉलम में है। दूसरे अखबारों में भी है लेकिन कहने की जरूरत नहीं है कि भारत ने ऐसी रोक लगाई है तो पाकिस्तान भी लगायेगा और ऐसा पहले भी होता रहा है। इसका नुकसान हवाई यात्रियों को होता है और यह बढ़े हुये किराये तथा यात्रा समय के रूप लाखों लोगों को झेलना पड़ता है। सरकारों का काम है कि अपने नागरिकों को इस तरह के नुकसान से बचायें और सुनिश्चित करें कि ऐसा कम से कम हो। मुझे नहीं लगता कि इससे पाकिस्तान को कोई नुकसान है या भारत को कोई फायदा होगा जबकि लाखों विमान यात्री परेशानी झेलेंगे। इस लिहाज से टाइम्स ऑफ इंडिया की सेकेंड लीड उल्लेखनीय है। इसके अनुसार, सउदी अरब, कतर ने भारत, पाकिस्तान से अपील की है कि तनाव कम करें।  

भारत में सरकार जैसे काम कर रही है और जो खबरें छप रही हैं उस लिहाज से आज की एक और खबर उल्लेखनीय है। इसके अनुसार, दिल्ली की एसीबी ने पूर्व मंत्री मनीष सिसोदिया और सत्येन्द्र जैन के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बेशक यह खबर है लेकिन इसे तीन कॉलम (टाइम्स ऑफ इंडिया) और हिन्दुस्तान टाइम्स (सिंगल कॉलम) में छापने में फर्क है। यह खबर या मामला दिल्ली के स्कूलों में नई (और अच्छी) कक्षाओं के निर्माण में कथित 2000 करोड़ रुपये के घोटाले के लिेये  मामला दर्ज किये जाने से संबंधित है। इस तरह, एक खबर अगर सरकार की चुनाव जीतने की चाल है तो दूसरी विपक्ष को कमजोर और बदनाम करने की है। सरकार की नीति और सोच का मामला इसमें कहीं नजर नहीं आता है और सरकार तात्कालिक लाभ के लिए काम करती नजर आ रही है। जाति जनगणना का विरोध करने के बाद अगर सरकार उसके लिए तैयार हो गई है तो दिल्ली सरकार के अच्छे काम के लिए उसके उस समय के मंत्रियों को परेशान किया जा रहा है। मैं नहीं कहता कि भ्रष्टाचार नहीं हुआ होगा या जांच नहीं होनी चाहिये। पर इस बात का ख्याल रखा जाना चाहिये कि भाजपा सरकारों में ना काम होता है, ना घोटाला होता है और ना आरोपों की जांच होती है। तमाम भ्रष्ट बताये गये लोग भाजपा की शरण में जाकर जांच से मुक्त हो गये या मामला ठंडे बस्ते में चला गया। ऐसे एक दो मामले नहीं हैं और यह आम है फिर भी भाजपा चुनाव जीत जाती है। ईवीएम से लेकर मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों की जांच नहीं हो रही है और काम करने वाले मंत्री के खिलाफ जांच हो रही है। मुझे लगता है कि भ्रष्टाचार करने वाले मंत्री हार गये यह पर्याप्त सजा है और इससे ज्यादा कार्रवाई के लिए ठोस सबूत होने चाहिये। या कोर्ट में मामला जल्दी निपटना चाहिये। मनीष सिसोदिया के घर पर नकदी नहीं मिली तो 2000 करोड़ के घोटाले का पैसा कहां गया और सरकार नोटबंदी से लेकर शेल कंपनियों पर रोक लगाने और विदेशी चंदा दान प्राप्त करने के नियमों में सख्ती के साथ-साथ बैंकों से नकद निकलाने पर रोक और नजर रखने के बावजूद भ्रष्टाचार नहीं रोक पा रही है तो उसकी भी कुछ जिम्मेदारी होनी चाहिये। नजर रखने वाले अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिये लेकिन हो रही है सिर्फ विरोधियों के खिलाफ और लोक गायिका बेटी के खिलाफ। क्या मतलब है इसका और अखबारों में इसका विरोध क्यों नहीं है।

सरकार के प्रचार और हेडलाइन मैनेजमेंट में उलझे अखबार आज अपने पाठकों को पहले पन्ने पर यह बताना भूल गये कि पाकिस्तान द्वारा लगातार कई दिनों से किये जा रहे युद्दविराम उल्लंघन के लिए पाकिस्तान को चेतावनी दी गई है। अखबारों ने सरकार को मजबूत दिखाने के लिए पहले तो इस खबर को प्रमुखता नहीं दी और (सेना को खुली छूट देने के बाद) अब जब सरकार ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है तो यह भी बड़ी खबर है और द टेलीग्राफ में पहले पन्ने पर है। भाजपा (नरेन्द्र मोदी उनके समर्थकों, प्रचारकों और ईनाम पाले वालों) के तमाम आरोप अदालत में साबित नहीं हुए हैं तब ऐसे मामले कम होने चाहिये लेकिन ऐसा लग रहा है जैसे कोई देखने वाला ही नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया में इस खबर के साथ आम आदमी की प्रतिक्रिया है और यह कम नहीं है। सरकार के खिलाफ जांच हो रही है तो इसकी भी होनी चाहिये और ऐसा नहीं हो सकता है कि केंद्र में जिस पार्टी की सरकार है उसे न सिर्फ केंद्र में बल्कि राज्यों में भी मनमानी की छूट दी जाये और विपक्षी दलों को अच्छा काम (जनहित) पहले तो करने नहीं दिया जाये और जो कर दिया गया है उसके लिए परेशान किया जाये। यह मामला ऐसा ही है और बिल्कुल रूटीन खबर की तरह छपा है इसके साथ की राजनीति नहीं बताई जायेगी तो पाठक सभी विपक्षी दलों के ऐसे उदाहरण से उन्हें भ्रष्ट समझेगा और केंद्र सरकार के साथ राज्यों में उस पार्टी की छवि ईमानदार की बन जाये। नरेन्द्र मोदी ने 2014 के पहले की सरकारों पर जो आरोप लगाये वो साबित नहीं हुए पर विरोधियों को बदनाम और परेशान करना जारी है। चुनाव हारने या हराने के बावजूद। दूसरी ओर, चुनाव आयोग गलत प्रचार की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करता है। सरकार चुनाव जीतने के लिए जो करती है और उसे जो समर्थन मिलता है अपनी जगह है।  

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन