लखनऊ | सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट तेजी से घूम रहा है। इसमें लखनऊ की एक चर्चित फैमिली पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। साथ ही सीएम, पीएम, सीबीआई और महामहिम को टैग किया है। कैसे अलका दास ने अपने चपरासी के नाम जमीन खरीदी और क्या कुछ खेल हुआ विराज कंस्ट्रक्शन व बाबू बनारसी दास टेक्निकल इंस्टीट्यूट में.. साक्षी नामक एक्स हैंडल के कंटेंट अब तक 44 हजार तीन सौ से ज्यादा व्यूज और एक हजार से अधिक शेयर हो चुका हैं। महिला ने सरकार को भी कठघरे में खींचा है, और दावा किया है कि मामले में सबकी तगड़ी इन्वॉल्वमेंट है। पोस्ट में कई सारे दस्तावेज भी संलग्न हैं। देखें संपादित अंश-

साक्षी-
मेरी इस पोस्ट को अधिक से अधिक साझा करें, ताकि इस गंभीर भूमि घोटाले की सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो। लखनऊ का अब तक का सबसे बड़ा बेनामी ज़मीन घोटाला — ₹15,000 करोड़ |
लखनऊ की इंडियन मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक, जिसकी चेयरपर्सन श्रीमती अलका दास गुप्ता थीं, के एक चपरासी प्रमोद कुमार (जिन्होंने 27/04/2018 को त्यागपत्र दिया) के नाम से 450 करोड़ रुपये की ज़मीन गोमती नगर, लखनऊ में दर्ज थी। ये ज़मीन बाद में श्रीमती अलका दास गुप्ता और उनके पुत्र विराज सागर की कंपनियों में ट्रांसफर कर दी गई।
संदिग्ध कंपनियों के नाम और पते:
- 1. M/s Viraj Constructions Pvt. Ltd., 55 पुराना किला, लखनऊ
- 2. M/s Viraj InfraEstate Pvt. Ltd., 55 पुराना किला, लखनऊ
- 3. M/s Babu Banarsi Das Northern India Institute of Technology, 106 पुराना किला, लखनऊ
- 4. M/s Viraj Buildwell Pvt. Ltd., 55 पुराना किला, लखनऊ
ट्रांसफर की तारीखें ध्यान से देखें। ये सभी ट्रांजैक्शन योगी शासनकाल में ही हुए हैं।


















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