


ध्रुव गुप्ता-
आतंक के विरुद्ध भारत का ऑपरेशन सिंदूर सफल। भारतीय सेना ने देर रात भीषण एयरस्ट्राइक में 100 किमी तक भीतर घुसकर पाकिस्तान और पीओके में लश्कर और जैश के हेडक्वार्टर समेत आतंक के 9 अड्डों को तबाह कर दिया और उनकी रक्षा में आए एक पाकिस्तान के एक जे एफ 17 विमान को मार गिराया। इन हमलों में कितने आतंकी मारे गए, इसका आकलन बाकी है।
पहलगाम के जवाब में संपूर्ण युद्ध में जाने की जगह आतंक के अड्डों को चिह्नित कर उनका विनाश एक बेहतर विकल्प था। अब इंतजार है कि हमारी सेना आतंक के पीछे खड़ी पाक की सेना और आई एस आई की कमर तोड़ने की दिशा में भी आगे बढ़ेगी।
भारत की सेना को को हमारा सलाम और भारत की सरकार को बधाई!
अश्विनी कुमार श्रीवास्तव-
कल ही लिखा था अपनी एक पोस्ट पर यह कमेंट। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जैसा इतिहास रहा है, उसको देखकर साफ लग रहा था कि पाकिस्तान पर हमला होना तय है। आतंकवाद का जवाब मोदी शैली में दिए जाने की यह नीति भारत के इतिहास में नरेंद्र मोदी का नाम अमिट करने वाली है।

राकेश कायस्थ-
ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने पर सभी देशवासियों को बधाई। पाकिस्तान ने हमारे निर्दोष नागरिकों की हत्या की थी। इसके बदले हमने आतंकवादियों के चुने हुए ठिकानों पर एयर स्ट्राइक किया है।
अभी तक की खबरों के मुताबिक भारत ने कंधार हाइजैकिंग कांड के बाद रिहा किये गये आतंकवादी, कश्मीर विधानसभा और देश की संसद पर हमले के मास्टर माइंड मौलाना मसूद अजहर के ठिकानों पर हमले किये है।
यह कदम भारतीय संप्रभुता को दी गई चुनौती का मुंहतोड़ जवाब है और पूरी तरह नैतिक है। हमें ध्यान रखना होगा कि अब हम युद्ध के मैदान में है। युद्ध सिर्फ सेना और सरकार नहीं लड़ती बल्कि उनके साथ पूरा देश लड़ता है।
यह समय एकजुट रहने और देश के भीतर आंतरिक शांति बनाये रखने का है। कृपया अफवाहों से दूर रहे और सोशल मीडिया पर कुछ भी शेयर करने से पहले यह जांच लें कि वह प्रामाणिक है या नहीं। खबरों के लिए सिर्फ सरकारी सूत्रों पर भरोसा करें। जय हिंद
नदीम अख्तर-
आज रात होने वाली मॉक ड्रिल अब फर्जी नहीं है। जंग की शुरुआत। ऑपरेशन सिंदूर। भारत का बहुत बड़ा कदम। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के अंदर घुसकर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। वह भी ऐसे हालात में, जब दोनों देशों की सेनाएं high alert पे थीं।
ये आसान काम नहीं है। अभी तो शुरुआती जानकारी आ रही है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल साहब ने अमेरिका में बड़े अधिकारियों को ब्रीफ किया है। ज़ाहिर है, अब पूरा प्रेशर पाकिस्तान पर होगा। वहां की आवाम का भी और दूसरे देशों का भी।
पाकिस्तानी जनता जवाबी कार्रवाई चाहेगी और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी पाकिस्तान से संयम की अपील करेगा। अमेरिका का रोल इसमें क्रिटिकल होने वाला है और इधर चीन और रूस का। मुझे डर है कि भारत पाकिस्तान की ये लड़ाई दुनिया की तीन महाशक्तियां के ego की लड़ाई ना बन जाए। ज़ाहिर है अमेरिका किसी भी सूरत में इसे जंग में तब्दील नहीं होने देना चाहेगा। लेकिन चीन को इसी मौके की तलाश थी और इस बार उसका रुख बहुत कुछ निर्धारित करेगा।
यूक्रेन मामले पर अमेरिका से नाराज़ रूस का रवैया भी आगे की दिशा तय करेगा। अब ये दो देशों के बीच का संघर्ष नहीं है।
बाकी होने को कुछ भी हो सकता है। ये भी हो सकता है कि पाकिस्तान को डरा धमका कर और समझा बुझाकर मामला शांत कर दिया जाए। लेकिन वहां के सैनिक निजाम का रुख इस दफा बहुत आक्रामक है। सो कुछ भी कहना मुश्किल है। जब नागरिक हमले के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पे अपलोड करने लगें तो जंग सिर्फ युद्ध नहीं रह जाता है। वह भावनाओं के ज्वार में डूबी हिंसा में तब्दील हो जाता है।
दिल थामे रहिए। 1947 में जो बीज अंग्रेजों ने बोया था, उसकी फसल काटने को हम सब अभिशप्त हैं। Two nation theory की बात आज भी इधर भी होती है और उधर भी। नफरत से नफरत ही पैदा होती है। ये ना इधर वालों को समझ आया, ना उधर वालों को। एक बार फिर हम लड़ेंगे। लड़ रहे हैं।
मनोज अभिज्ञान-
युद्ध सिर्फ सरहद पर नहीं होता, वह हमारे दिमाग में, हमारी दिनचर्या में, हमारे शहरों की रफ्तार में भी लड़ा जाता है। जब सीमा पर बंदूकें गरजती हैं, तब सिर्फ सैनिक ही नहीं, पूरे देश का मानसिक संतुलन, जीवनशैली और नागरिक चेतना अदृश्य मोर्चे पर होती है। लेकिन अफसोस, युद्ध की घोषणा होते ही जो सबसे पहले मोर्चा संभालते हैं, वे हैं ड्राइंग रूम में आरामकुर्सी पर बैठे गला फाड़कर ‘देशभक्ति’ का शंखनाद करने वाले लोग। ये लोग टीवी की स्क्रीन पर युद्ध जीत लेते हैं, लेकिन जरा पूछिए कि खुद क्या कर रहे हैं?
आज के दौर में मिसाइलें हजारों किलोमीटर दूर तक मार कर सकती हैं। दुश्मन को हमारे शहर की हर हरकत की जानकारी सैटेलाइट से मिल सकती है। ऐसे में यदि दिल्ली जैसे बड़े शहर रात में जगमगाते रहें, तो क्या यह राष्ट्रभक्ति है या आत्महत्या की तैयारी? युद्ध का मतलब सिर्फ बारूद नहीं होता, युद्ध का मतलब रणनीति होती है। और रणनीति का पहला नियम है: अदृश्य रहो।
दिल्ली को, देश की राजधानी को, अब युद्ध अभ्यास शुरू कर देना चाहिए। रात के 8 बजे से 1 बजे तक शहर की बिजली काट दी जानी चाहिए। घरों, दफ्तरों, बाजारों—सबको अंधेरे में रहना सीखना होगा। युद्ध की स्थिति में बिजली सबसे पहले जाती है। जो अभी इसकी आदत नहीं डालेंगे, वे तब घबरा जाएंगे। युद्ध की तैयारी सिर्फ सीमा पर बंकर बनाने से नहीं होती, युद्ध की तैयारी शहर के अंदरूनी जीवन को सैन्य अनुशासन में ढालने से होती है।
रेडियो सुनने की आदत डालो। मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सबसे पहले ठप होंगे। लोगों को रेडियो पर खबरें लेने की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। हर मोहल्ले में सायरन लगवाओ। सायरन बजे तो सबको पता हो कि बमबारी शुरू हो सकती है। ये सिर्फ फिल्मों में नहीं होता, यथार्थ बहुत क्रूर होता है।
और हाँ, ड्राइंग रूम में देशभक्ति की हुंकार भरने वालों को यह याद रखना चाहिए कि युद्ध में सिर्फ सैनिकों का खून नहीं बहता, अस्पतालों की बिजली जाती है, नवजात शिशुओं की ऑक्सीजन रुक जाती है, बुजुर्गों की दवा बंद हो जाती है। युद्ध में राष्ट्र नहीं, जनता भुगतती है। इसलिए यदि युद्ध चाहिए, तो उसकी कीमत चुकाने की तैयारी भी रखो।
राशन जमा करने का अभ्यास करो, पानी सहेजने की कला सीखो। युद्ध कोई मॉल में मिलने वाला उत्पाद नहीं है जिसे सिर्फ खरीद कर इस्तेमाल कर लो। हर गली में नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण अनिवार्य करो। लोग जानें कि धमाके के बाद कैसे बचा जाता है, जहर फैलने पर क्या करना है, गैस हमले से कैसे बचना है।
देशभक्ति का नशा चढ़ाने से पहले यह तय कर लो कि तुम सिर्फ बोलना चाहते हो या भुगतने के लिए तैयार हो। क्योंकि युद्ध में सिर्फ बंदूकें नहीं टूटतीं, पूरे समाज की रीढ़ टूटती है। जो तैयार नहीं, वे चुप रहें। और जो तैयार हैं, वे अभी से अभ्यास शुरू करें—अंधेरे का, भूख का, डर का और अनुशासन का। यही असली युद्ध है। आतंकवाद का नाश हो!
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