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साइप्रस: विनोद अडानी के शेल साम्राज्य का द्वीप और नैतिकता खोता भारत

एक तरफ तो सरकार खुद को पारदर्शिता का चैम्पियन बताती है, दूसरी तरफ अडानी समूह के वित्तीय खेल को खोलने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव डालने से कतराती है…

ज्ञानेंद्र अवस्थी-

भारत ने जिस साइप्रस को 1950 के दशक में उपनिवेशवाद से मुक्त कराने के लिए वैश्विक मंचों पर आवाज उठाई थी, वही साइप्रस आज विनोद अडानी जैसे भारतीय कॉर्पोरेट साम्राज्य के लिए एक सबसे बड़ा टैक्स हेवन बन गया है।

विनोद अडानी: शेल कंपनियों का बादशाह

विनोद अडानी, गौतम अडानी के बड़े भाई, आधिकारिक तौर पर दुबई निवासी हैं। अदानी समूह के कई विवादित निवेश नेटवर्क की असली चाभी उन्हीं के हाथ में रही है। रिपोर्टों और OCCRP जैसे वैश्विक खोजी नेटवर्क की जांचों के मुताबिक, विनोद अडानी ने मॉरीशस, साइप्रस, UAE और कैरेबियन देशों में दर्जनों शेल कंपनियों की एक परत दर परत संरचना बनाई।

कुछ प्रमुख कंपनियां जो सामने आईं:

  1. Krunal Trade & Investment Pvt Ltd (Cyprus)
  2. Gardash Holdings Ltd (Cyprus)
  3. New Leaina Investments Ltd (Cyprus)
  4. Electrogen Infra Holding Pvt Ltd (Mauritius)
  5. Emerging India Focus Fund (Mauritius)
  6. EM Resurgent Fund (Mauritius)
  7. Cresta Fund (Mauritius)
  8. Opal Investments Pvt Ltd (UAE)
  9. Abbot Investments Pvt Ltd (Mauritius)
  10. Lentana Holdings Ltd (Cyprus)

ये कंपनियां शेयरधारक बनकर अदानी समूह की भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश करती हैं। असली खेल यह है कि पैसा पहले एक टैक्स हेवन में जाता है, फिर दूसरी शेल कंपनी से घूमकर भारत आता है — जिससे यह विदेशी निवेश की शक्ल में दिखता है, पर असल में प्रमोटर समूह का ही रीसायकल्ड पैसा होता है।

क्या हुआ इस नेटवर्क से?

इन कंपनियों ने अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स, अडानी पावर और अडानी ट्रांसमिशन जैसी कंपनियों में भारी हिस्सेदारी खरीदी। इसने शेयर की कीमतें ऊपर चढ़ाने में मदद की, मार्केट कैप बढ़ा, और कर्ज लेने की क्षमता भी मजबूत हुई।

SEBI की जांच और साइप्रस की ठोकर:

2021 से Hindenburg रिपोर्ट और OCCRP खुलासों के बाद SEBI ने इन कंपनियों की असली शेयरहोल्डिंग जांचनी चाही। परंतु जैसे ही मामला साइप्रस और मॉरीशस की गुप्त कंपनियों तक पहुंचा, SEBI को जानकारी देने से दोनों देशों ने साफ मना कर दिया। कई राउंड अनुरोध और Mutual Legal Assistance Treaty (MLAT) के तहत कोशिश के बावजूद साइप्रस ने बैंकिंग और रजिस्टर ऑफ कंपनीज की डिटेल नहीं दीं।

प्रधानमंत्री की यात्रा — खोखले आश्वासन:

प्रधानमंत्री इस समय साइप्रस यात्रा पर हैं। भारत सरकार ने इस दौरे को ‘द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने’ का नाम दिया है। पर इस यात्रा में न तो कोई ऐसी बातचीत हुई और न कोई सार्वजनिक बयान दिया गया जिसमें साइप्रस को निवेश पारदर्शिता और शेल कंपनियों के रिकॉर्ड साझा करने पर दबाव डालने का संकेत हो।

यानी एक तरफ तो सरकार खुद को पारदर्शिता का चैम्पियन बताती है, दूसरी तरफ अडानी समूह के वित्तीय खेल को खोलने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव डालने से कतराती है।

यह पूरी कहानी क्या कहती है?

साफ़ है — 1950 के दशक का भारत उपनिवेशवाद से लड़ने के लिए नैतिक शक्ति था। आज वही भारत कुछ पूंजी साम्राज्यों के टैक्स हेवन साम्राज्य की छतरी बन गया है। और प्रधानमंत्री की विदेश यात्राएँ प्रतीकात्मक भाषणों तक सिमट गई हैं, असली कूटनीतिक दबाव की जगह सिर्फ हाथ मिलाना और फोटो खिंचाना बचा है।

विनोद अडानी के शेल साम्राज्य ने साबित कर दिया है कि टैक्स हेवन आज भी बड़े कॉर्पोरेट के लिए गुप्त खजाने हैं। और जब तक साइप्रस और मॉरीशस जैसे देश असली रिकॉर्ड नहीं देते, तब तक SEBI जैसी संस्थाएँ लाचार रहेंगी।

कभी नेहरू ने साइप्रस को आज़ाद करवाया था। आज उस साइप्रस ने भारतीय लोकतंत्र के वित्तीय सवालों को कैद कर लिया है — और भारत सरकार उसे छुड़ाने की बजाय ‘अच्छे रिश्ते’ निभा रही है। इतिहास शायद इसे भी दर्ज करेगा।

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18 Comments

18 Comments

  1. सुबोध खंडेलवाल

    June 17, 2025 at 11:03 am

    “कभी नेहरू ने साइप्रस को आज़ाद करवाया था”
    हुजूर इसका कोई संदर्भ या प्रमाण दीजीए। पता तो चले कि चाचा कितने महान थे ?

  2. Manoj Tiwari

    June 17, 2025 at 9:39 pm

    Nehru ne to vaskodigamaa se pahle hi bharat ki khoj ki thi .how stupid.congras ki gandagi ki tarif nahi karoge

  3. Gcsj

    June 17, 2025 at 10:26 pm

    चाचा बड़ी लाइन के लती थे !

  4. Arvind Waze

    June 17, 2025 at 10:55 pm

    पता नहीं किस टेबल पर बैठकर विवादों की कहानी बनाते हो? राजनीति के बहाने देश को, देश के नेतृत्व को और देश की एजेंसीयों को बदनाम करना है। आपको ये बताना क्यों जरूरी है कि सेबी कब और कैसे जांच करेगी?

  5. Amit kumar

    June 17, 2025 at 11:26 pm

    अगर मान भी लिए जाए तो सारांश – टैक्स चोरी और लोन बेनिफिट यही ना ?
    लोन बेनिफिट से मोदी को क्या फायदा?
    पर हां देश को फायदा जरूर हो रहा.
    राष्ट्र निर्माण और उन्नति के लिए अगर थोड़ा इधर उधर किया जाए तो शायद कुछ हद तक सही होना चाहिए।आपके हिसाब से सारे बड़े बिजनेस घरानों के मालिकों को जेल में डाल देना चाहिए और उनके कामों को सीज कर देना चाहिए।सालों से आप जैसे लोगों की मानसिकता ऐसी ही बनी हुई है ताकि इंडिया आगे न बढ़ पाए और एशिया में चीन अपना प्रभुत्व बनाए रखे।बढ़िया है ।

  6. Pukhraj Titre

    June 18, 2025 at 1:08 am

    विशुद्ध वामपंथी मानसिक दिवालियापन से भरपूर लेख तुम्हारा चश्मा कभी नहीं उतरेगा

  7. R p singh

    June 18, 2025 at 7:26 am

    अडानी विरोध की बकवास करने के अलावा और कुछ काम नहीं है क्या.

  8. Jitendra Sharma

    June 18, 2025 at 9:11 am

    Congress k charan chatukar kisi dusre k ubhar ko kaise bardasth kr skte hain. Maruti ki kahani bhi bta do kbhi, ambani ki kisne khda kiya y bhi bta do. Tum apni khud ko jindgi m kya kya kiye ho y bhi btao

  9. Manoj

    June 18, 2025 at 11:57 am

    चच्चा इतने महान थे तो कम से कम कश्मीर को भी आजाद करना था, खैर चाचा की साइप्रस का कोई आधिकारिक प्रमाण हो तो दीजिए, अन्यथा व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी मत चलाइए, हिंडनबर्ग क्यों बंद हुआ इसके बारे में भी विस्तार से बताए ।

  10. Kanak rathod

    June 18, 2025 at 3:46 pm

    There is nothing wrong in tax planning.real issue is that present government don’t want details of investment made by adani group.it is only on paper that they requested information

  11. Newsfaat

    June 18, 2025 at 5:59 pm

    कहां से आते हैं ये लोग…
    आजकल लोग नशा करके भी लिखने लगे हैं।

  12. Baap

    June 18, 2025 at 6:40 pm

    Bhai tumhe kya taklif hai, rahul gandhi ne chin se kya agreement kiya tha usake baare me khulaasha karo, bas modi ki photo daalo aur vaah vaahi batoron tumhare jaise logo ki vajah se hi desh aur hindu ka vinaash hota hai

  13. उपेन्द्र कुमार

    June 18, 2025 at 8:11 pm

    सरकार में जो भी हो व्यवसाय को नजरअंदाज कर के चले तो भविष्य ussr जैसा हो जाता है. सब कुछ सरकारी तो था चीन में कितना तरक्की किया था लेकिन लिबरंल होते ही तीस साल में दूनिया बदल गयी अब दूनिया में दूसरे पायदान पर है…
    वामपंथी सोच से बाहर निकले सर .

  14. Mr yadav

    June 18, 2025 at 11:34 pm

    Congress kare to sahi bjp kare to galat…
    Ye doglapan kha se laate ho be..
    Aur is sab se india ka kya nuksaan hua wo bhi bta do paisa to desh ki company main hi lag rha hai ki nhi…
    Ambani kare India main to sahi adani kare foregion main baitkar to galat.

  15. Kumar

    June 19, 2025 at 11:49 am

    Who is sponsoring you (media) to throw mud on our PM Modi? If Congress were ruling and you post (first of all no one will have guts to do so) such bullshit news, you would have been made into ashes without any evidence. Enjoy the freedom under BJP and Modi govt.

  16. JAI SINGH

    June 19, 2025 at 8:54 pm

    दो टके की पीत पत्तलकारिता से जूठन तो मिल जायेगी लेकिन नैतिकता का भडराग….इस देश की सरकार को बतलाने वाले तुम जैसे भाण्ड की नैतिकता तुम्हारे इस चवन्नी छाप मेख से मिल रही है।

  17. Awadh Narayan

    June 19, 2025 at 9:44 pm

    मतबल आम के आम गुठलियों के दाम पूरा RBI package प्रयुक्त. RBI +Banks गैंग भी साइबर अपराध में KYC माल सरका कर पुलिस को लाठीचार्ज बावत देता है, puzzle puzzle खेलता है, गोटी अपने पास रखकर. महान जनता सब फड़ वाला खेल देख रही है कि कैसे 15 लाख करोड़, Bank Nifty में लगा है, सुना है crocodile सब खाता है veg., नॉन veg. प्लास्टिक, कपड़ा ,बाघ, चीता,….मानवता.

  18. बालकृष्ण

    June 20, 2025 at 7:02 am

    अमां यार ए लेख लेख क्यों खेल रहे हो अगर आपको इतना विश्वास है तो सुप्रीम कौर्ट जावो, केस करो . देशभक्ति सिद्ध करो . ए फ़ालतू की बक… दी मत करो.

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