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ब्रिटेन की सबसे बड़ी खबर BBC हिन्दी पर न छपे तो आप इसे किस तरह देखेंगे!

रंगनाथ सिंह-

पोलिटिकली करेक्ट क्राइम का बढ़ता प्रकोप-

ब्रिटेन की सबसे बड़ी खबर बीबीसी हिन्दी पर न छपे तो आप इसे किस तरह देखेंगे! देश के एक बहुत बड़ी धार्मिक संस्था का उच्च पदाधिकारी एक लड़की के मर्डर को सही बताए और वह खबर भी राष्ट्रीय मीडिया में ज्यादा हंगामा न मचाए तो आप क्या कहेंगे!

अकाल तख्त के मुख्य ग्रन्थि का कहना है कि नीचे दिख रही लड़की की हत्या करना गलत नहीं था क्योंकि लड़की अश्लील वीडियो बनाती थी! मगर खुद को लिबरल कहने वाला तबका इस हत्या पर ज्यादा शोर नहीं मचा रहा है क्योंकि ऐसा करना पोलिटिकली इनकरेक्ट होगा! पोलिटिकल इनकरेक्टनेस से बचने के लिए रेप और मारपीट को चुपचाप स्वीकार कर लेने के बाद अब हत्या को भी स्वीकार करने की तरफ देश बढ़ रहा है। एक वर्ग तो पहले ही ऐसी हत्या को जायज मानता आ रहा था अब दूसरे वर्ग भी वही रास्ता अपनाने की तरफ बढ़ रहे हैं।

अभी कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान में भी सना यूसुफ नामक महिला की इसी कारण से हत्या की गयी।

इसी बीच ब्रिटेन की लेबर सरकार ने ग्रूमिंग गैंग की राष्ट्रीय जाँच के आदेश दे दिये हैं मगर याद रखें कि लेबर उर्फ लिबरल नेताओं ने ही नहीं ब्रिटेन के लिबरल पत्रकारों-बुद्धिजीवियों इत्यादि ने मिलकर दशकों तक नाबालिग बच्चियों के सुनियोजित रेप और उत्पीड़न पर पर्दा डाला ताकि उनका वोटबैंक बरकरार रहे!

जिन्हें आप लिबरल मीडिया समझते हैं उनमें से किसी की हेडिंग से यह जानना मुश्किल है कि ग्रूमिंग गैंग का मामला दरअसल है क्या! हेडिंग ही नहीं कॉपी तक में इस खबर को सैनिटाइज करने के प्रयास पहले की तरह जारी हैं। मसलन बीबीसी अब भी अपनी कॉपी में पाकिस्तानी की जगह एशियाई शब्द का प्रयोग कर रहा है ताकि वह यह बात छिपा सके कि ग्रूमिंग गैंग द्वारा किए गए रेप के दो-तिहाई अपराध उनके द्वारा किया गया है जिनकी आबादी ब्रिटेन में करीब दो प्रतिशत है।

भारत में जमीन या महिला के संग छेड़छाड़ के लिए दो समुदायों में झगड़ा हो जाए तो वह उनकी जाति या रिलीजन के कारण होता है मगर ब्रिटेन में दो-तिहाई से ज्यादा अपराधी एक ही मूल के हों तो उसमें उनके जाति-रिलीजन-देश-नस्ल इत्यादि का कोई रोल नहीं होता है, बल्कि वो बस एक क्राइम होता है! आप भारत के स्वघोषित लिबरल लोगों से भी बात कर लें। वे भी सेम डिफेंस मैकेनिज्म यूज करते हैं और अक्सर अपराधियों के डिफेंस लॉयर की तरह बहस करते हैं। उनकी सहानुभूति पीड़िता लड़कियों के संग नहीं बल्कि उनके संग अपराध करने वालों के संंग होती है और उसपर वो दावा करते हैं कि वे ऐसा हाई मोरल पोजिशन के नाम पर कर रहे हैं! यूजफुल इडियट!

क्या आप भी यही सोचते थे कि महिलाओं के संग बर्बर अपराध केवल पिछड़े ग्रामीण समाज में नार्मलाइज किए जाते हैं! लंदन, इस्लामाबाद और भटिंडा के जिन इलाकों में ये हत्याएँ हुई हैं वो पिछड़े इलाके में नहीं हुई हैं। इन हत्याओं को छिपाने और जस्टिफाई करने वाले भी बड़े शहरों में रहते हैं। वरना ब्रिटेन के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय जाँच का इतना विरोध न करते और अब जब मजबूरन उन्हें जाँच का आदेश देना पड़ा है तो भी लिबरल बुद्धिजीवी चुप रहकर इस तूफान के गुजर जाने की उम्मीद कर रहे हैं।

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