मनीष दुबे-
दिल्ली सरकार का सूचना एवं प्रसार निदेशालय (DIP) राजधानी में प्रकाशित अखबारों की खबरों की प्रतिदिन निगरानी कर रहा है। यह निगरानी ‘पॉजिटिव’, ‘निगेटिव’ और ‘न्यूट्रल’ श्रेणियों में खबरों को बांटकर की जा रही है। इसका खुलासा एक इंटरनल पीडीएफ रिपोर्ट के लीक होने से हुआ, जो दिल्ली सरकार से जुड़े पत्रकारों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में गलती से साझा हो गई थी। हालांकि कुछ देर बाद उसे डिलीट कर दिया गया, लेकिन तब तक वह रिपोर्ट कई लोगों के पास पहुंच चुकी थी।
यह रिपोर्ट 15 जून की है और न्यूजलॉन्ड्री में प्रकाशित एक विश्लेषण के मुताबिक, इसे छह हिस्सों में विभाजित किया गया है— मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जुड़ी खबरें, दिल्ली सरकार से संबंधित खबरें, बीजेपी नेताओं द्वारा विपक्ष पर हमले, जनहित के मुद्दे, विपक्षी गतिविधियां और राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़ी रिपोर्टें।
अखबारों की खबरों पर बारीक नजर
रिपोर्ट में हिंदी और अंग्रेजी अखबारों की कुल 139 खबरों का विश्लेषण किया गया है। इनमें से 93 खबरों को ‘पॉजिटिव’, 32 को ‘निगेटिव’ और 14 को ‘न्यूट्रल’ श्रेणी में रखा गया है। यह विश्लेषण इस बात की ओर इशारा करता है कि दिल्ली सरकार मीडिया कवरेज पर कितनी बारीकी से नजर रख रही है।
अंग्रेजी अखबारों की स्थिति
- इंडियन एक्सप्रेस: 9 खबरों में 6 पॉजिटिव, 2 निगेटिव, 1 न्यूट्रल
- हिंदुस्तान टाइम्स: 7 खबरों में 5 पॉजिटिव, 1 निगेटिव, 1 न्यूट्रल
- टाइम्स ऑफ इंडिया: 12 खबरों में 5 पॉजिटिव, 3 निगेटिव, 4 न्यूट्रल
- पायनियर: 6 खबरों में 5 पॉजिटिव, 1 न्यूट्रल
- द स्टेट्समैन: 6 खबरों में 4 पॉजिटिव, 2 निगेटिव
- द हिंदू: 2 खबरें— दोनों पॉजिटिव
- एशियन एज और मिलेनियम पोस्ट: 3-3 पॉजिटिव
- मॉर्निंग स्टैंडर्ड: 1 पॉजिटिव, 1 निगेटिव, 1 न्यूट्रल
- ट्रिब्यून: 1 न्यूट्रल खबर
हिंदी अखबारों की स्थिति

- हरिभूमि: 12 खबरें, जिनमें 10 पॉजिटिव, 2 निगेटिव
- अमर उजाला, हिंदुस्तान: 8-8 खबरें— दोनों में 6 पॉजिटिव, 2 निगेटिव
- नवभारत टाइम्स, पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स: 6-6 खबरें— अधिकांश पॉजिटिव
- दैनिक जागरण: 5 खबरें— 3 पॉजिटिव, 2 निगेटिव
- जनसत्ता, आज समाज: 3-3 खबरें— दोनों में 1 पॉजिटिव, 2 निगेटिव
- दैनिक भास्कर: 2 खबरें— 1 पॉजिटिव, 1 निगेटिव
कौन बना सरकार का पसंदीदा?
रिपोर्ट के मुताबिक हिंदी अखबारों में हरिभूमि सबसे अधिक पॉजिटिव कवरेज के साथ दिल्ली सरकार की पसंद बना रहा, वहीं अंग्रेजी में इंडियन एक्सप्रेस और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्टें सकारात्मक श्रेणी में सबसे आगे रहीं।
सबसे ज्यादा नकारात्मक रिपोर्टिंग किससे?
रिपोर्ट के अनुसार, दैनिक जागरण, जनसत्ता और आज समाज जैसे हिंदी अखबारों की सबसे अधिक खबरें निगेटिव श्रेणी में दर्ज की गईं। अंग्रेजी मीडिया में टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस और द स्टेट्समैन की कई रिपोर्टें भी निगेटिव मानी गईं।
सवाल खड़े करती रिपोर्ट
इस इंटरनल निगरानी रिपोर्ट के लीक होने से यह सवाल उठता है कि क्या सरकार मीडिया कवरेज को केवल एक राजनीतिक छवि प्रबंधन के औजार के रूप में देख रही है? और क्या यह स्वतंत्र पत्रकारिता पर अप्रत्यक्ष दबाव की कोशिश है?
फिलहाल इस रिपोर्ट को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस खुलासे ने सरकार और मीडिया के रिश्तों को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है।


