ओ पी श्रीवास्तव-
गौतमबुद्ध नगर में फर्जी वृद्धाश्रम का भंडाफोड़, राज्य महिला आयोग की सदस्य ने किया औचक निरीक्षण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं शासन-प्रशासन की निगरानी में रहने वाले गौतमबुद्ध नगर जनपद में गुरुवार को एक फर्जी वृद्धाश्रम का भंडाफोड़ हुआ। इस आश्रम में रह रहे वृद्धों से हर महीने हजारों रुपये की अवैध वसूली की जाती थी। आश्चर्यजनक रूप से यह भंडाफोड़ किसी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला द्वारा किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डॉ. मीनाक्षी भराला ने गुरुवार को सेक्टर-55, नोएडा स्थित आनंद निकेतन वृद्ध सेवा आश्रम (सी-5) का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि वहां वृद्धजनों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर समय से उपचार नहीं किया जाता और मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं। विरोध करने पर वृद्धजनों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है तथा उन्हें पहनने के लिए कपड़े तक नहीं दिए जाते।
आश्रम में रह रहे वृद्धजनों ने आयोग की सदस्य को बताया कि उनसे 2.5 लाख रुपये डोनेशन, 20,000 रुपये सिक्योरिटी तथा हर माह 10 से 12 हजार रुपये तक वसूले जाते हैं।
डॉ. भराला ने बताया कि यह वृद्धाश्रम न तो शासन से स्वीकृत है और न ही इसके पास कोई वैध अनुमति है। यह पूरी तरह अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था। आश्रम में कुल 42 वृद्धजन निवास करते पाए गए, जिनमें से 3 वृद्धजनों को 27 जून 2025 को समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित ओल्ड ऐज होम में शिफ्ट किया जाएगा। शेष वृद्धजनों को आगामी 5 दिनों में शासन से स्वीकृत अन्य वृद्धाश्रमों में स्थानांतरित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि वृद्धजनों को सुरक्षित रूप से अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने के बाद इस अवैध आश्रम को प्रशासन के सहयोग से सील कर दिया जाएगा।
औचक निरीक्षण के दौरान एडीसीपी मनीषा सिंह, महिला थाना अध्यक्ष संदीपा चौधरी, जिला समाज कल्याण विभाग एवं जिला प्रोबेशन विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
संजय सक्सेना-
उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर-55 में स्थित आनंद निकेतन वृद्ध सेवा आश्रम, जो जन कल्याण ट्रस्ट द्वारा संचालित है और सरकार से अच्छा खास अनुदान भी मिलता है, वहां से अब वृद्धजनों के साथ हैवानियत की चौंकाने वाली घटना सामने आई। यह आश्रम, जो बुजुर्गों की देखभाल और सम्मान का वादा करता था, अब अमानवीय व्यवहार और उपेक्षा के आरोपों से घिरा है।
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य मीनाक्षी भराला को मिली गुप्त सूचना के आधार पर आश्रम पर छापेमारी की गई। जो दृश्य सामने आए, वे किसी के भी दिल को झकझोर देने वाले थे। छापेमारी के दौरान आश्रम में रहने वाले 39 बुजुर्गों को दयनीय हालत में पाया गया।
कुछ बुजुर्गों के हाथ-पैर बंधे हुए थे, तो कुछ को तहखाने जैसे अंधेरे और गंदे कमरों में बंद रखा गया था। एक बुजुर्ग महिला को तो कपड़े से बांधकर रखा गया था, जिसके कारण उसकी शारीरिक स्थिति और भी खराब हो चुकी थी। कई बुजुर्ग बीमार थे, लेकिन उनकी देखभाल के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। खाने-पीने की सुविधाएँ न के बराबर थीं, और स्वच्छता का स्तर इतना खराब था कि वहाँ रहना किसी सजा से कम नहीं था।
यह आश्रम, जो बाहर से बुजुर्गों के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल प्रतीत होता था, अंदर से एक भयावह सच्चाई को छिपाए हुए था। यहाँ रहने वाले अधिकांश बुजुर्ग समाज के उन तबकों से थे, जिन्हें उनके परिवारों ने छोड़ दिया था। वे इस आश्रम में प्यार, देखभाल और सम्मान की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन बदले में उन्हें उपेक्षा और क्रूरता मिली।
छापेमारी के दौरान पाया गया कि आश्रम का प्रबंधन न केवल लापरवाही बरत रहा था, बल्कि बुजुर्गों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार कर रहा था। राज्य महिला आयोग, पुलिस और समाज कल्याण विभाग की संयुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई की। सभी 39 बुजुर्गों को रेस्क्यू कर अन्य सुरक्षित आश्रमों में स्थानांतरित किया गया। आनंद निकेतन वृद्ध सेवा आश्रम को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।
इस घटना ने न केवल नोएडा, बल्कि पूरे देश में हड़कंप मचा दिया। लोग यह सवाल उठाने लगे कि क्या अन्य निजी आश्रमों में भी ऐसी अमानवीयता हो रही है। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। बुजुर्ग, जो अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में हैं, उनकी देखभाल और सम्मान हमारी जिम्मेदारी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जन कल्याण ट्रस्ट जैसे संगठनों पर भरोसा करने से पहले उनकी कार्यप्रणाली की गहन जाँच जरूरी नहीं है।
घटना ने यह भी उजागर किया कि सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों को मिलकर ऐसी संस्थाओं पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है, लेकिन दुख की बात यह भी है कि अभी तक वृद्ध आश्रम चला रहे किसी कर्मचारी के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि ऐसे लोगों को तुरंत गिरफ्तार करके जेल के पीछे डाल देना चाहिए था।


