
विकास मिश्रा-
21वीं सदी की शुरुआत थी। म्युजिक इंडस्ट्री में फिल्मी गानों के रीमिक्स की नई बयार बही थी। सबसे ज्यादा हिट हुआ था फिल्म समाधि का गाना- कांटा लगा। इस गाने पर डांस करने वाली शेफाली जरीवाला रातोंरात स्टार हो गई थीं। तब एंड्रॉयड मोबाइल फोन नहीं थे, लेकिन टीवी स्क्रीन पर छाई हुई थीं शेफाली।
बात 2003 की है। मेरठ में शेफाली एक प्रोग्राम में आई थीं। प्रायोजकों ने पहले ही साफ कर दिया था कि शेफाली किसी को इंटरव्यू नहीं देंगी। रात में अचानक पता चला कि अमर उजाला के रिपोर्टर ने किसी बड़ी सिफारिश से शेफाली का इंटरव्यू कर लिया है। मैं उस वक्त दैनिक जागरण मेरठ का सिटी इंचार्ज था। दोनों अखबारों में कांटे की लड़ाई थी। अगर सुबह अमर उजाला में शेफाली का इंटरव्यू छपता और जागरण में न छपता तो ऑफिस में हंगामा खड़ा हो जाता। मैंने भी अपने घोड़े दौड़ाए। शेफाली को जो ले आए थे, वे टस से मस नहीं हो रहे थे। फिर डीएम से कहलवाया।
आखिरकार रात 10 बजे के आसपास शेफाली का इंटरव्यू हुआ। 20 साल की लड़की। उसे भी नहीं पता था कि अचानक ही वो इतनी बड़ी स्टार बन जाएगी। बड़ी पार्टियों और बड़े शोज का हिस्सा बन जाएगी। इंटरव्यू मैंने ही किया था, अच्छी बातें हुईं। यशवंत सिंह सिटी डेस्क के इंचार्ज थे। उन्होंने रंगीन पेज पर आधे से ज्यादा पेज की शानदार कवरेज दी। बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगाईं। अगले दिन शेफाली और उनके शो की कवरेज में अमर उजाला पर भारी पड़ा था जागरण।
कांटा लगा फेम शेफाली की शोहरत बढ़ती ही गई। आलम ये था कि 10 में से 5 लोगों की मोबाइल फोन की रिंग टोन भी ‘कांटा लगा’ रिमिक्स ही थी। तब नोकिया के फोन 3310 और 3315 का जलवा था। कांटा लगा तो जैसे कोई एंथम हो गया था। हर पार्टी, शादी-विवाह में बजने लगा था। इसकी पॉपुलरिटी का एक गजब का किस्सा हुआ मेरठ में।
मेरठ के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में एक कार्यक्रम हुआ था। कार्यक्रम में रामलीला के एक प्रसंग का भी मंचन किया गया था। सीन ये था कि माता सीता श्रीराम और लक्ष्मण जी के साथ वन में जा रही हैं। अचानक सीता माता के पांव में कांटा चुभ जाता है। बैकग्राउंड में गाना बजा- कांटा लगा… हाय लगा..। मंच पर इसी गाने पर माता सीता और राम-लक्ष्मण के किरदार डांस करने लगे। नाचते-नाचते पांव का कांटा निकालने लगे।
इस प्रोग्राम को कवर करके आए थे हमारे संवाददाता मनोज वार्ष्णेय। मनोज ने कहा- सर गजब कर दिया कॉलेज में। सीता माता को नचवा दिया कांटा लगा पर। मैंने पूछा- फोटो है..? फोटोग्राफर थे आबिद भाई। सारी सिक्वेंस की तस्वीरें खींची थीं। मैंने मनोज से कहा-ठोककर खबर बनाओ।
उन दिनों ऐसी खबरें, जिन पर विवाद हो, उन्हें छापने पर बहुत मंथन चलता था। संपादक थे श्रीकांत जी। वे राजी नहीं थे कि इसे फ्रंट पेज या पेज नंबर तीन पर रंगीन फोटो के साथ छापा जाए। बात भगवान राम और माता सीता के अपमान की थी तो मेरठ जैसे संवेदनशील शहर की भी थी। खैर तगड़े मंथन के बाद तय हुआ कि खबर ब्लैक एंड व्हाइट पेज नंबर 4 पर खबर छापी जाए।
सुबह जब तस्वीरों के साथ ये खबर छपी तो मेरठ में तहलका मच गया। हिंदुत्ववादी संगठनों ने कॉलेज में हंगामा मचा दिया, जमकर तोड़फोड़ की। सुनील भराला तब बीजेपी के युवा मोर्चा में थे। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं के साथ कॉलेज में हल्ला बोल दिया। परतापुर थाने में कालेज के मालिक और डायरेक्टर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया। सारे लोग फरार हो गए। हंगामा बढ़ गया। उनकी गिरफ्तारी के लिए धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया। हंगामा इस बात को लेकर और बढ़ गया क्योंकि उस ड्रामे के डायरेक्टर का नाम था-अकबर खान।
हंगामे की ये आग तो लग गई थी, बुझनी भी जरूरी थी। मुझे भी अंदाजा नहीं था कि बात इतनी बढ़ जाएगी। तीन दिन बाद सुबह-सुबह मैं पहुंचा बीजेपी के वरिष्ठ नेता और वर्तमान राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत वाजपेयी के पास। वाजपेयी जी उन दिनों यूपी सरकार में मंत्री थे। मैंने उनसे कहा कि इस आग को शांत करवाइए। वे बोले- भाई साहब मैं भी आपसे यही कहना चाहता था, लेकिन संकोच वश नहीं कह पा रहा था। चलिए आप उधर संभालिए और मैं इधर संभालता हूं। हंगामा थमा, अखबारों में कवरेज थमी और अगले तीन दिन के भीतर कांटा लगा की लगाई आग बुझ भी गई।
कांटा लगा फेम शेफाली जरीवाला के आकस्मिक निधन पर उनसे जुड़े ये किस्से बरबस याद आ गए। याद आ गई शेफाली से मुलाकात और इंटरव्यू की वो रात। बहुत लोगों के जेहन में कांटा लगा गाने और शेफाली के डांस से जुड़े किस्से चल रहे होंगे। सिर्फ 42 साल की उम्र में शेफाली का हॉर्ट अटैक से निधन हो गया। ईश्वर शेफाली की आत्मा को शांति दें, उनके परिजनों को दुखों का यह भार वहन करने की क्षमता भी दें।



Arun Srivastava
June 29, 2025 at 12:25 am
विकास जी, आखिर आपने भी कद्दू में तीर मार ही लिया। निराश न हों,सब्र का फल मिलेगा। कोई न कोई पुरस्कार आपको मिलेगा। जिस संपर्क का आपने इस्तेमाल किया आपको पत्रकार कोटे से आपको राज्यसभा या विधान परिषद भिजवा सकता है।