गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल में दिए गए विवादित इंटरव्यू के मामले में घिरे पंजाब पुलिस के पूर्व डीएसपी गुरशेर सिंह संधु को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। संधु ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर सीआरपीसी की धारा 41ए के तहत जारी नोटिस पर अंतरिम राहत की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
बीती 24 जून को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि यह मामला पहले से ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है और वहां 3 जुलाई को सुनवाई होनी है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट दखल नहीं देगा। पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया कि नोटिस पर कोई भी अंतरिम राहत हाईकोर्ट ही तय करेगा।
इंटरव्यू को लेकर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस विश्वनाथन ने जेल में हुए इंटरव्यू पर सवाल उठाया और पूछा कि आखिर पत्रकार जेल परिसर के भीतर कैसे पहुंचा? गौरतलब है कि ABP न्यूज़ के पत्रकार जगविंदर पटियाल ने बिश्नोई का यह इंटरव्यू किया था। यह इंटरव्यू मार्च 2023 में ABP सांझा चैनल पर प्रसारित हुआ था, जिसने हड़कंप मचा दिया था। बताया गया कि इंटरव्यू से एक दिन पहले जेल की सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद संधु के पास थी।
संधु की दलीलें और कोर्ट का जवाब
संधु के वकील ने तर्क दिया कि एफआईआर में उनका नाम शामिल नहीं है, इसके बावजूद उन्हें नोटिस भेजा गया, जो अनुचित है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी सुप्रीम कोर्ट से उन्हें नोटिस पर अंतरिम राहत मिल चुकी है। हालांकि, अदालत ने इस बार दखल देने से इनकार कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई 2015 से जेल में बंद है। मार्च 2023 में उसका एक इंटरव्यू टेलीकास्ट हुआ, जिससे जेल प्रशासन पर सवाल खड़े हो गए। मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई। जांच में सामने आया कि इंटरव्यू सितंबर 2022 की रात, जब बिश्नोई सीआईए खरार की कस्टडी में था, उसी दौरान रिकॉर्ड किया गया। दूसरा इंटरव्यू राजस्थान की जेल में हुआ था।
SIT रिपोर्ट के आधार पर पंजाब सरकार ने गुरशेर संधु समेत 7 पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया और विभागीय जांच के आदेश दिए। नवंबर 2024 में हाईकोर्ट ने माना कि जेल के अंदर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज ले जाने और स्टूडियो सेटअप की अनुमति पुलिस ने ही दी थी। इसी के चलते संधु पर भी कार्रवाई हुई थी।
हाईकोर्ट में लंबित है मामला
जनवरी 2025 में संधु ने हाईकोर्ट में इस कार्रवाई को चुनौती दी। 4 जून को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि संधु के निष्कासन से जुड़े सबूत सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में पेश किए जाएं। कोर्ट ने यह भी माना कि पुलिस डायरी में संधु के खिलाफ कार्रवाई के पीछे कोई स्पष्ट कारण दर्ज नहीं था।
अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह इस स्टेज पर हस्तक्षेप नहीं करेगा और संधु को अंतरिम राहत नहीं दी जाएगी। अगली सुनवाई अब 3 जुलाई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में होगी।
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