Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

टीवी

सुधीर चौधरी पर डिजाइनर ने लगाया 15 लाख रु की बेइमानी का आरोप, PM मोदी से की ये अपील!

यही बात अगर सरकार इस से कहे कि तेरा काम 15 करोड़ के लायक नहीं 4 करोड़ के लायक है, ये क्या करेगा? पंद्रह करोड़ में से 13 करोड़ घर ले जाना चाहता है। भारत में इसका क्या इलाज़ है? सरकार सरकारी पैसों का किस तरह दुरुपयोग करती है। आप सोच सकते हैं। और ऐसे लोगों को प्रमोट क्यों करती है?…

सुरेंद्र सिंह-

क्रिएटिव काम के पैसे कैसे मरते है? वह जगह इंडिया है। ‘अमरूद’ के पैसे होंगें। सोचेंगे ‘Yubari King Melon’ निकल आए। अगर आपने ‘युबारी किंग मेलन’ दे भी दिया तो इसकी उसको समझ ही नहीं होगी। हमारे प्राण खर्च होते हैं तब दिखाई नहीं देता। पैसे की बारी आती है, तो लोगों के प्राण छूटने लगते हैं।

कांग्रेस के एक प्रवक्ता हैं। राहुल गांधी के साथ घूमते रहते हैं उन्होंने बाकी बचे मेरे आठ लाख रुपए नहीं दिए। इसपर उन्होंने कोई सफाई भी नहीं दी। नहीं देना था नहीं दिए। जबकि एग्रीमेंट पेपर था। यहां मुझे शुरू से डर था। क्योंकि ये जिनके साथ, जिनके संगत में थे। मुझे डर था कि पैसा नहीं मिलेगा। और वही हुआ। इसके लिए उन्होंने मुझे कभी फोन नहीं किया। मेरा कॉल उठा लेने का सवाल ही नहीं। HR तक को मेरा कॉल उठाने से मना कर दिया था। इतने मोटी चमड़ी के लोग हैं। ये जानते हैं कि कोई इनका कुछ बिगाड़ नहीं सकता।

उसी तरह ही बिस्किट बेचने वाले एक बहुत बड़ी कंपनी ‘प्रिया गोल्ड’ के मालिक न्यूज चैनल डाल रहे थे। मेरे एक आदरणीय मीडिया के वरिष्ठ हैं उन्होंने मुझसे कहा कि इस न्यूज चैनल का डिज़ाइन तू ही करेगा। मालिक से मिलने के बाद मैंने ऐतराज जताया कि इस व्यापारी को काम समझ में नहीं आएगा। लेकिन इनके आग्रह पर मैंने यह काम लिया। पेपर बने, एग्रीमेंट हुए। जब पूरे काम मैंने दे दिए और उन्होंने रख लिया और तय राशि में से आठ लाख रुपए नहीं दिए। उन्होंने कहा कि तुम कितने भी बड़े डिजाइनर रहे होगे, तुम होगे। आगे के पैसे मैं नहीं दूंगा तुम्हें जो करना है कर लो। मैंने कहा कि मैं इस बिल्डिंग से बाहर जाऊंगा। अगर आप ‘लुक एंड फील’ यह न्यूज चैनल चला सको तो चला लेना। मुझे भी फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने पैसे वाले हो। मैं बड़ी मुश्किल से म्यूजिक डायरेक्टर को पैसे दिए, अपने साथ काम कर रहे लड़कों को पैसा दिया। प्रोग्रामर को पैसा दिया। स्पेशल इफेक्ट वालों का पैसा दिया।

हाल में सरकार के गुणगान करने वाले सुधीर चौधरी। DD न्यूज़ चैनल में गया है। सरकार के बिना वहां होना और 15 करोड़ की डील (जैसा सोशल मीडिया कह रहा है इसके आधार पर) इसका संभव नहीं। एक महीने का काम दो महीने के मशक्कत के बाद मैंने पूरे किए। इस काम में कोई एक एलिमेंट इंडिया छोड़िए इंटरनेशन न्यूज चैनल्स पर नहीं है। बीबीसी जैसे न्यूज चैनल ऐसे कामों पर करोड़ों खर्च कर दे।

और ये बंदा इंटरफेयरेंस इतना किया कि खुद डिजाइनर बन गया। कन्फ्यूजन इतना बढ़ाया कि इसका कोई गणित नहीं। तीन-तीन प्रोग्राम id बने। तीन बार प्रोग्राम के नाम चेंज हुए। मैने फिर भी धैर्य बनाया रहा। कई बैकग्राउंड बने, कई ग्राफिक प्लेट बने। कई एस्टन बैंड बने। प्रोग्राम लॉन्च हो गए। 15 लाख की बात हुई थी। पुराना फ्रेंड है हमने कोई पेपर नहीं बनाए। इसके प्रोडक्शन मैनेजर ने इस प्रोग्राम के लुक के लिए मुझसे मेरे चार्ज पूछे। मैंने कहा 15 लाख। तय हो गए। तब तक इसके नाम का जिक्र नहीं किया था। प्रोडक्शन मैनेजर ने तब नहीं बताया था कि प्रोग्राम किसका है?

जब मैंने इसका नाम जाना तो मुझे चिंता हुई। फिर भी मैंने मीटिंग की। पैसों को लेकर मुझे डर जरूर था। की ये आदमी ठीक नहीं। कोई बड़ी कंपनी का मालिक नहीं। इसके साथ काम किया जाय या नहीं? फिर भी हृदय इसके लिए पॉजिटिव हुआ। रात दिन काम में लग गए। वर्क में दो महीने चले गए। आज चार महीने हो गए। अब तक जनाब ने सिंगल कॉइन तो छोड़िए, ‘एक पैसे’ नहीं दिए। बोले ये काम 4 लाख से ज्यादा का नहीं। क्या किया जा सकता है? ऑन- एयर काम तो चल रहा है न? वह भी मेरे अनुमति के बिना। इसका क्या इलाज़ हो सकता है? बिना बिलंब एक घंटे की भी देरी नहीं हुई, जब मैंने वर्क डिलीवर किए।

मैं आज से बीस वर्ष पहले कोई भी न्यूज चैनल का काम 25-30 लाख रुपए से नीचे नहीं लिया। आज 2025 है। मैंने रेट गिराए आज इसका अंजाम देखिए। आज चार महीने से पैसे का इंतजार कर रहा हूं। पॉडकास्ट पर सारा कुछ झूठ बोलता है ये बंदा। की न्यूज चैनल क्रिएटिव पर खर्च नहीं करती। और इसका सोचिए? कितना खर्च किया? दुनिया इसके बातों को सच मानती है। इसे राष्ट्रवादी लोग मानते है। लेकिन इसकी असलियत कोई जान ले तो इसके पास एक आदमी ना रहे।

15 लाख रुपए की बात ऑडियो में मैने रिकॉर्ड किया। पर क्या होना है? पूरा काम जोड़ दूं तो दो करोड़ से ऊपर जाएंगे। इसका क्या किया जा सकता है? इसका क्या इलाज़ है? मेरी पहुंच वहां तक नहीं कि सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ें? मौजूदा यह सरकार जिनको प्रमोट कर रही है ये लोगों की प्रवृति सरकार से छुपी हुई नहीं है। जो लोग इन्हें ऑन-एयर देखते हैं। इन्हें राष्ट्रवादी पत्रकार मानते हैं। जब की एक वाक्य लिखने में अपाहिज होते हैं। इनमें कलम की वह ताक़त नहीं। प्रसार भारती और दूरदर्शन के बड़े अधिकारियों को मैंने मेल किया। लेकिन। सरकार के गले में घंटी कौन बांधे? किसकी आफत आई है?

आज भी मेरे इजाजत के बिना यह काम दूरदर्शन पर दौड़ रहा है। इस प्रोग्राम id पर करोड़ों के स्पॉन्सरशिप हैं। यही बात अगर सरकार इस से कहे कि तेरा काम 15 करोड़ के लायक नहीं 4 करोड़ के लायक है, ये क्या करेगा? मेरे डिजाइन को काट-पीट कर, दूसरे चैनलों के काम को कॉपी कर इतना खराब कर दिया कि मेरा नाम भी खराब हो रहा है। क्योंकि इसके पास कोई डिजाइनर है ही नहीं। पंद्रह करोड़ में से 13 करोड़ घर ले जाना चाहता है। भारत में इसका क्या इलाज़ है? सरकार सरकारी पैसों का किस तरह दुरुपयोग करती है। आप सोच सकते हैं। और ऐसे लोगों को प्रमोट क्यों करती है?

दोष रहित मैं भी नहीं। दोष मेरा भी है कि इसके कैरेक्टर को जानते हुए मैंने यह काम किया। रात-दिन काम किया। बड़े-बड़े सॉफ्टवेयर पर काम किया। क्या हो सकता है? आज बड़े पदों पर इस तरह के लोग ही पहुंच रहे हैं।

दूसरी तरफ मैं फ्री के कामों से थक गया हूं। लौटकर वह कोई थैंक्स नहीं कहता। कुछ मित्र ऐसे होते हैं कि वे कभी आपके काम नहीं आएंगे। बल्कि उल्टा आपसे काम करवा कर के जायेंगे। ऐसी स्वार्थ वाली मित्रता से थक गया हूं। मेरा दोष इतना रहता है कि ‘ना’ मैं नहीं कह पाता। बड़ी मुश्किल से कभी किसी के लिए ना कहा है।

सबसे बड़ी बात कई घंटों बिताने के बाद, रात दिन एक करने के बाद, स्किल को पैदा करने के बाद, टीम को संगठित करने के बाद। वर्षों सॉफ्टवेयर से इतना फैमिलियर हो जाने के बाद पावरहाउस काम पैदा होता है। और ये एफर्ट्स, थ्योरी को ये लोग नहीं समझते। अपने घमंड में इतने चूर होते हैं। क्योंकि सरकार इनके बायो-डेटा को नहीं खंगालती।

आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी इन्हें आप देखिए। ये आपका आदमी है। आपके न्यूज चैनल पर।

लेखक न्यूज टीवी मीडिया के डिजाइन कंसल्टेंट हैं और आजतक, स्टार न्यूज जैसे चैनलों के क्रिएटिव डायरेक्टर रह चुके हैं।

ये भी पढ़ें…

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन