लखनऊ/मऊ- डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट (डीएनए) अख़बार के संस्थापक और पूर्व कुलपति प्रो. निशीथ राय का निधन हो जाने की जानकारी सामने आई है। उनके निधन से न सिर्फ मीडिया जगत बल्कि शिक्षा जगत भी स्तब्ध है। नीचे पढ़ें कुछ प्रतिक्रियाएं और अंतिम संस्कार की जानकारी दी गई है…
निशीथ भाई का यूं चले जाना हम सब इलाहाबादियों के लिए वज्रपात जैसा है। तीन दशक से ज्यादा की दोस्ती , विभिन्न सामाजिक राजनैतिक मसलों पर विचार साझा करना , कितना कुछ स्मृतियों के गलियारे में घूम रहा है। प्रसिद्ध साहित्यकार , हिंदी विद्वान, सांस्कृतिक विचारक
पिता आदरणीय राम कमल राय जी हमारे अभिभावक, अध्यापक और गुरु रहे है। हम उनके परिवार के सदस्य बन कर थे । निशीथ भाई ने दो विश्वविद्यालयों में पढ़ाया फिर एक तीसरे विश्विद्यालय में कुलपति रहे । समाजवाद को समर्पित पूर्ण रूप से एक राजनीतिक परिवार रहा है । अब बहुत सारी जिम्मेदारियां उत्पल पर है। अलविदा मुन्ना भाई!-एडवोकेट कमल कृष्ण राय
डॉ अतुल मोहन सिंह-
लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, डॉ. शकुंतला मिश्रा विश्विद्यालय के कुलपति रहे प्रो. निशीथ राय के निधन का दुःखद समाचार स्तब्ध करने वाला है। यह समूचे लखनऊ विश्वविद्यालय परिवार के लिए दुःखद समाचार है। प्रो. राय की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट समाचार पत्र भी आरंभ हुआ जो अब भी गतिमान है।
प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को सद्गति एवं शोकाकुल परिजनों को शक्ति प्रदान करें। विनम्र श्रद्धांजलि, नमन
उत्पल राय-
बड़े दुख के साथ अवगत करना है कि मेरे बड़े भाई डॉ निशीथ राय का देहांत आज प्रातः तीन बजे हो गया है। पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन हेतु निजी आवास 16/3 घ, सरोजिनी नायडू मार्ग लखनऊ में एक बजे तक रखी जाएगी, जिसके उपरांत दाह संस्कार हेतु बैकुंठ धाम भैंसा कुंड लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे।

दिव्येन्दु वत्स-
सुबह – सुबह एक ऐसी खबर मिली जिसने पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया। वह खबर थी निशीथ भईया से जुड़ी हुई। मऊ जनपद के मझवारा ग्रामसभा के मूल निवासी, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, रीजनल सेन्टर फॉर अर्बन एण्ड इनवायरमेंट स्टडीज, लखनऊ के निदेशक, शकुन्तला मिश्रा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट समाचार पत्र के संस्थापक, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र आदरणीय प्रोफेसर डॉ• निशीथ राय जी का असमय निधन होना बेहद ही दुखद है।
प्रो• निशीथ राय जी उन सभी व्यक्तियों के लिए मजबूत स्तम्भ थे जो उनसे किसी भी तरह से जुड़े थे। निशीथ भईया की वजह से सैकड़ों लोगों का जीवन स्तर उच्चतम हुआ। उन्होंने लोगों को नौकरी दी, आत्मबल दिया और अपनी क्षमता के अनुसार लोगों की हर संभव मदद की।
निशीथ भईया एक बात कहा करते थे कि “हम बुरे तभी होते हैं जब किसी का भला करते हैं।” (क्योंकि जो किसी के लिए कुछ करेगा ही नहीं, वह भला किसी के लिए बुरा और भला क्यों ही होगा)
मैं जब निशीथ भईया से मिलता था तो वह पहले ही मुझसे पूछ लेते थे कि कौन सी मिठाई खाओगे और फिर मेरी मनपंसद मिठाई ऑर्डर करके मंगवाते थे। उनके साथ कई – कई घण्टे बैठना, हमेशा कुछ ना कुछ नई सीख देता था। आखिरी बार की मुलाक़ात में उन्होंने मेरे एक काम के लिए लखनऊ हाईकोर्ट के अधिवक्ता शैलेन्द्र शर्मा “अटल” जी को फोन करके मेरे लिए व्यक्तिगत निवेदन किया था।
मैं जब भी एनेक्सी की तरफ होता था तो मेरा यही प्रयास रहता था कि निशीथ भईया का आशीर्वाद लिया जाए। उनके यूं असमय जाने से समाज में जो रिक्तता हुई है उसे कभी भी पूर्ण नहीं किया जा सकता। महादेव से यही प्रार्थना है कि वह निशीथ भईया की आत्मा को शांति प्रदान करते हुए उनके परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की ताकत दें।
ॐ शांति, विनम्र श्रद्धांजलि।
ऐसा दुःख जो जीवन भर नहीं भूलेगा
निशब्द हूं स्तब्ध हूं कुछ लिखने में हाथ भी कांप रहा है लेकिन नियति के आगे कहां किसी की चली मेरे जीवन में छात्र राजनीति से लेकर आज तक जो सबसे अहम किरदार थे प्रो निशीथ कुमार राय के परिवार से जो आत्मिक रिश्ता था शब्दों में पिरोया नहीं जा सकता मेरे साथ जो आत्मिक रिश्ता था उसको भी शब्दों में अभिव्यक्ति नहीं कर पा रहा हूं
उत्पल राय पूर्व राज्यमंत्री के बड़े भाई थे आज प्रो निशीथ कुमार राय जी परिवार सहित हम लोगों से हमेशा के लिए दूर चले गए अब हम लोगों के बीच नहीं रहे ईश्वर अपने श्री चरणों में स्थान दें विनम्र श्रद्धांजलि शत् शत् नमन!-संजय सिंह


