Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

शानदार जानदार पत्रकार संकर्षण ठाकुर की लिखावट का कोई सानी नहीं था : रवीश कुमार

रवीश कुमार-

आज का दिन उदास कर गया। टेलिग्राफ के संपादक और निरंतर पत्रकार संकर्षण ठाकुर के निधन की सूचना ने जड़ कर दिया है। संकर्षण ठाकुर की लिखावट का कोई सानी नहीं। भरी गर्मी में खड़े कॉलर के ऊपर कोट पहने टकरा जाते थे।

कई बार मज़ाक कर देता था कि भैया आप बिहारियों के नीरद सी चौधरी हैं तो हंस कर टाल देते थे। उन्हीं को जब बिहार चुनावों के दौरान तपती रेत के बीच दियरा दियरा घूमते देखता था तो यकीन नहीं होता था कि वहीं बब्लू भैया हैं। गमछा लपेट कर चले जा रहे हैं। इस गांव तो उस गांव। बिहार ही नहीं कश्मीर को भी उसी तरह छान मारा और खूब लिखा।

गुजरात की रिपोर्टिंग और प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्रीय राजनीति में आने की दस्तक का उनका वर्णन भविष्यवाणी और चेतावनी की श्रेणी में आता है। अंग्रेज़ी तो लगता था कि डिब्बे में बंद कर लंदन से ले आए थे लेकिन मैथिली में भी उतने ही डूबे थे।

पटना की सेटिंग में बब्लू भैया को देखना बहुत सारे पल्प फिक्शन की किताबों के ढेर में शेक्सपीयर के किसी नाटक की किताब के मिल जाने जैसा लगता था। किताब पर किए गए हस्ताक्षर को देखकर आप चौंक जाते थे कि संकर्षण कौन है जो पटना में शेक्सपीयर पढ़ रहा है। एक खांटी बिहारी का यह अ-बिहारीपन हमेशा आकर्षित करता था। बस गर्मी में कोट पहनने की हिम्मत नहीं हुई।

आपकी विदाई में मैं ऐसा नहीं लिख सकता जैसा आप लिखते रहे। आपने जो लिखा हुआ दस्तावेज़ छोड़ा है, उन ख़बरों से साहित्य की किताब बन जाएगी। आप शानदार थे। आपका स्नेह मिला। आपसे प्यार मिला। आप चले भी गए। मेरी श्रद्धांजलि।


प्रवीण झा-

संकर्षण ठाकुर नहीं रहे। बिहार राजनीति पर उनकी गजब की पकड़ थी। जिस वर्ष नीतीश-लालू गठबंधन के हार की भविष्यवाणी हो रही थी, उस वक्त उन्होंने कहा था कि यही जीतेंगे।

नीतीश-लालू पर आधारित उनकी पुस्तक ‘ब्रदर्स बिहारी’ राजनीति के पैंतरे समझने के लिए जरूरी लेखन में है। वह एक बार नीतीश कुमार के पास गए जब नीतीश सभी चुनाव हार चुके थे, लालू से अलग थे, और लग रहा था कि करियर खत्म हो गया। उन्होंने नीतीश से पूछा कि अब आप क्या कीजिएगा।

नीतीश ने कहा- किसी न किसी तिकड़म (by hook or by crook) मैं बिहार का मुख्यमंत्री बनूँगा, लेकिन बनने के बाद तिकड़म लगाना छोड़ कर ईमानदारी से काम करूँगा।

संकर्षण ठाकुर ने कहा कि इतने हारे हुए नेता से ऐसी अटपटी बात सुन कर भी लगा कि वह वाकई गंभीर हैं, और मुख्यमंत्री बन जाएँगे।

संकर्षण ठाकुर के बाद भी बिहार राजनीति पर कई लोगों ने लिखा है, और मैंने किताबें भी पढ़ी। लेकिन संकर्षण ठाकुर में एक सिक्स्थ सेंस था। सिर्फ यह नहीं कि क्या घट चुका है, बल्कि यह कि क्या घटने वाला है।


डॉ सईद असदर अली-

आज का दिन उस महान पत्रकार के नाम, जो आज हमारे बीच नहीं रहे। TheTelegraph के संपादक और बहुत ही लेखक एवं पत्रकार संकर्षण ठाकुर के निधन की दुःखद ख़बर मिली, जिसे विश्वास कर पाना आसान नहीं हो रहा। बहुत ही सरल, मृदुल परन्तु प्रभावी भाषी संकर्षण ठाकुर, स्वभाव से जितने सरल थे, काम के प्रति उतने ही मज़बूती और लगन से जुटे दिखते थे।

रिपोर्टिंग के मेरे शुरुआती दौर में उनका मार्गदर्शन, उनकी ऊर्जा और काम के प्रति उनका अत्यधिक झुकाव, मुझे शायद उनसे ही प्राप्त हुआ।

न सिर्फ़ जन्म से बिहार निवासी, बल्कि बोलचाल और वो बिहारी अखड़पन भी उनमें कूट-कूट कर भरा था, बावज़ूद इसके शर्ट के उठे कॉलर पर कोट पहन कर चिलचिलाती गर्मी में सड़कों पर निकल जाना, और अँग्रेजी भाषा का ज़खीरा अपने साथ लेकर घूमना, उनकी आदतों में शामिल रहा।

कई बार मज़ाक में जानना भी चाहा कि भैया ये कैसे कर पाते हैं, लेकिन हर बार हँस कर- मुस्कुरा कर टाल जाया करते थे। अपनी लेखनी और पत्रकारिता में बिहार और कश्मीर पर ख़ास तव्वजो देने वाले संकर्षण, कहाँ कहाँ से स्टोरी निकाल ले आयेंगे, कहना मुश्किल होता था।

बिहार पहुँचते ही गले में गमछा बाँध कर, गाँव- गाँव की खाक छान कर ऐसी हीरा कहानियाँ, सिर्फ़ संकर्षण ठाकुर ही लिख सकते थे। बहुत ही निर्भीक, बेबाक और मेहनती पत्रकार संकर्षण भाई आपने पत्रकारिता को सचमुच अपने पूरे जीवन में बखूबी जिया है।

आप बेहद शानदार व्यक्तित्व के मालिक रहे मुझे आपका जो प्यार, स्नेह सहयोग और मार्गदर्शन मिला, वो हमेशा अविस्मरणीय रहेगा।

आपको विनम्र श्रद्धांजलि

मूल खबर…

निधन : आज की पत्रकारिता के माहौल में ‘टेलीग्राफ’ को ऊंचाई पर पहुँचाना संकर्षण ठाकुर जैसों के बस का ही था!

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन