
अजीत सिंह राठी-
मैंने चार दिन पहले अपने ‘X’ अकाउंट पर SIDCUL द्वारा IT पार्क की ज़मीन 90 साल की लीज पर एक निजी कंपनी को देने का उल्लेख किया था, उसकी एवज़ में मुझे SIDCUL की तरफ़ से एक लीगल नोटिस मिला, जो सुप्रीम कोर्ट के वकील ने भेजा है।
वैसे तो तीन दिन से देहरादून शहर में शोर मचा था कि राज्य सरकार मुझे लीगल नोटिस भेज रही है, लेकिन मुझे कल शाम मिला। इस नोटिस को देने के लिए मेरी ग़ैर मौजूदगी में मेरे घर पर तीन दिन तक खाकी वर्दी में सरकारी लोग गए, यह मेरे परिवार पर मानसिक दबाव बनाने की एक कसरत थी, जो बेकार साबित हुई।
मुख्यमंत्री जी, आप नोटिस भिजवाने का सिलसिला जारी रखना, क्योंकि मैं राज्यहित के मुद्दे उठाता रहूँगा। उधमसिंह नगर के खुरपिया फार्म में भी कुछ ऐसा ही सुनने को मिल रहा है, अभी वेरिफाई कर रहा हूँ, फिर सामने रखूँगा। मेरा सवाल आज भी वही है-
- आख़िर सरकारी ज़मीन प्राइवेट बिल्डर को क्यों दी जाय?
- इससे उत्तराखंड का क्या भला होगा?
और हाँ, एक और बात कहनी थी, परिपक्व राजनेताओं को कभी भी दो कौड़ी के स्वार्थी सलाहकारों की सलाह नहीं माननी चाहिए। हर दौर के शासकों के दरबार में ‘चिलांडें’ टाइप के सलाहकार होते ही है।
राज्य की धामी सरकार ने देहरादून स्थित IT पार्क के दो भूखंड RCC developer को 90 साल की लीज पर दे दिए है। टेंडर में ज़मीन का बेस रेट 40 हज़ार ₹ वर्ग मीटर था और टेंडर में बोली लगाने वाले 46 हज़ार से आगे नहीं बढ़े। कंपनी इस सरकारी ज़मीन पर फ्लैट्स बनाकर बेचेगी। फिलहाल 25% पैसा जमा होगा और बाक़ी धनराशि आसान किस्तों में चुकाएगी।
R-1 का भूखंड 04 एकड़ और R-2 का भूखंड 1.5 एकड़ था। मजे की बात ये है कि इन दोनों भूखंड के टेंडर एक ही कंपनी RCC developer के पक्ष में छूटे।


सीएम पुष्कर धामी जी और उद्योग सचिव विनय शंकर पांडेय जी, आपका यह फ़ैसला क़ानूनन सही हो सकता है लेकिन व्यावहारिक तौर पर ग़लत है।
क्या आपको नहीं लगता कि IT पार्क में आईटी व सॉफ्ट इंडस्ट्री से जुड़ा निवेश लाना चाहिए, ताकि प्रदेश के युवाओं को रोज़गार मिल सके, फ्लैट्स बनाने के लिए सरकारी ज़मीन प्राइवेट कंपनी को लीज पर देने से राज्य का क्या भला होगा? और सिडकुल का काम उद्योग को बढ़ावा देना है, न कि रियल इस्टेट कारोबार करना। कंपनी किसकी है, यह जानकारी भी दिलचस्प होगी।
लेकिन बढ़िया है, जब 90 साल की लीज़ ख़त्म होगी तो न ज़मीन लेने वाले होंगे न देने वाले होंगे! और न सवाल उठाने वाले।


