नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2025। दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ) ने तालिबान द्वारा भारतीय महिला पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवेश न देने की घटना की तीखी निंदा की है। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी की मौजूदगी में 10 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में आयोजित की गई थी।
DUJ ने अपने बयान में कहा है कि यह घटना बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है। संगठन ने कहा कि यह स्पष्ट हो गया है कि भारत सरकार अब काबुल में तालिबान शासन के साथ संबंधों को फिर से स्थापित करने की दिशा में बढ़ रही है। हालांकि सरकार के अपने कूटनीतिक या रणनीतिक कारण हो सकते हैं, लेकिन महिलाओं के अधिकारों की इस तरह से अनदेखी अस्वीकार्य है।
संघ ने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस से भारतीय महिला पत्रकारों को बाहर रखना तालिबान की महिला विरोधी नीतियों का tacit (अप्रत्यक्ष) समर्थन प्रतीत होता है। DUJ ने कहा कि यह न केवल भारतीय महिला पत्रकारों का अपमान है बल्कि यह प्रेस की स्वतंत्रता और लैंगिक समानता के सिद्धांतों पर भी सीधा प्रहार है।
DUJ ने तालिबान द्वारा अफगानिस्तान में महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाए गए कठोर प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की है। संगठन ने कहा कि तालिबानी शासन के तहत महिलाओं के साथ जारी मानवाधिकार उल्लंघन, शिक्षा से वंचित करना और सामाजिक जीवन से उन्हें अलग-थलग करना सभ्य समाज के लिए अस्वीकार्य है।
संघ ने भारत सरकार से मांग की है कि वह ऐसे किसी भी मंच पर या अवसर पर, जहां तालिबानी प्रतिनिधि शामिल हों, महिलाओं और पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे और इस तरह की भेदभावपूर्ण हरकतों का विरोध दर्ज कराए।
मूल रिलीज भी पढ़ें…
Condemn Talibani Denial of Entry To Women Journalists
The Delhi Union of Journalists(DUJ) is outraged that the Taliban denied entry of Indian women journalists to a press conference by visiting Afghan Foreign Minister Amir Khan Muttaqi.
The Press Conference was held at the Afghan Embassy in Delhi on Oct 10, 2025.
It is evident that the Government of India has decided to now re-set ties with the Talibani regime in Kabul. While the Government may have strategic reasons for this shift in policy, the blatant disregard of women’s rights is unacceptable. The deliberate exclusion of women journalists from Muttaqi’s press conference seems like tacit consent, if not approval, of the Taliban’s blatant discrimination against women.
The DUJ unequivocally condemns the Taliban’s numerous constraints on women’s freedom and liberty in Afghanistan, especially the denial of education and the right to work, as well as human rights abuses under their regime.
Related News…
आज के अखबार : नहीं बताते कि भारत ने तालिबानी शर्त कुबूल कर अफगानिस्तान से संबंध ‘सुधारे’


