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अदालत पर सरकार के दबाव और दावे की खबरें आज ही हैं, गजब के इस संयोग पर कायदे की खबर नहीं  

संजय कुमार सिंह

आज के अखबार (16.10.2025) भाग-दो

दिल्ली भाजपा ने एक्स पर पोस्ट करके, वीडियो डालकर वैसे तो सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद कहा है लेकिन इसमें यह दावा भी है कि उसने पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दिलाई। यह डिजिटल भारत में दीवाली पर कानून तोड़कर पटाखे चलाने और चलने देने के बाद की स्थिति है। इसमें दीवाली पर पटाखे चलाने और चलाने देने का राजनीतिक, धार्मिक और सांप्रदायिक लाभ पाना और उठाने की कोशिश करना शामिल है। दूसरी ओर, डिजिटल इंडिया की अच्छाइयों में डिजिटल पटाखों से कुत्तों को असली पटाखों का सामना करना सिखाया जा सकता है। दिल्ली में कुत्तों की जैसी चिन्ता है उससे संभव है कि कुत्तों को डिजिटल पटाखों से हरित पटाखों का शोर सुनने के लिए तैयार कर दिया गया हो या कर दिया जाए। मनुष्यों को प्रदूषण से होने वाली परेशानी मुद्दा नहीं है। और हो भी क्यों जब गृहमंत्री हिन्दुओं की घटती आबादी और मुसलमानों की आबादी ज्यादा हो जाने का डर फैलाएं तथा उसे व्हाट्सऐप्प यूनिवर्सिटी का पाठ बना दिया जाए। भले यह वोट चोरी या चुनावी बेईमानी है, इसपर कुछ होना नहीं है। अखबारों के लिए यह मुद्दा भी नहीं है। दिल्ली भाजपा ने दिल्ली में सरकार बदलने को वोट की ताकत कहा है लेकिन सच्चाई यह है कि वोट चोरी का हो या खरीदा हुआ, ताकत उतनी ही रहती है। देखना आपको है कि उसका उपयोग सही हो या सही उपयोग करने वालों को ही दिया जाए (मिले)। जहां तक दिल्ली में भाजपा सरकार की बात है पिछले साल भाजपा नेताओं ने प्रतिबंध के बावजूद पटाखे चलाए थे। वैसे भी पटाखे खूब चले थे और लगा ही नहीं था कि कोई प्रतिबंध है। किसी कार्रवाई की खबर तो पूरे साल नहीं ही मिली। अब सरकार बदलने से इस ‘लाभ’ का दावा भले किया जा रहा है और अब स्पष्ट है कि अदालत पर दबाव डालकर यह फैसला करवाया गया है तब हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, बाज़ार पहले ही अदालत के ‘हरित’ निर्देशों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 18 अक्टूबर से “हरित पटाखों” की तीन दिन की बिक्री की अनुमति दी है। लेकिन तीन दिन पहले ही दिल्ली के बाज़ार प्रतिबंधित पटाखों की आवाज़ और रंगों से गुलज़ार हो गए हैं। दिल्ली के प्रमुख बाज़ारों – सदर बाज़ार, जामा मस्जिद, लाजपत नगर और अन्य में एचटी द्वारा किए गए एक ज़मीनी निरीक्षण में पाया गया कि अदालत के दिशानिर्देशों का खुले आम उल्लंघन हो रहा है। विक्रेता “हरित पटाखे”, “प्रदूषण मुक्त” लिखे हुए डिब्बे सजा रहे हैं और 20 से ₹800 के बीच की कीमत वाले कई विकल्प पेश कर रहे हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि मामला अदालत के आदेश को लागू करने और उसके अनुपालन का तथा ऐसा नहीं होने पर अदालत की अवमानना का है लेकिन सरकार समर्थकों का तर्क है कि मुख्य न्यायाधीश ने जूता फेंकने वालों को माफ कर दिया है। वैसे भी, जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली व्यवस्था में जो होता है वही हो रहा है। सरकार और अदालत से पहले जनता को तय करना है कि वे क्या चाहते हैं। लेकिन उससे पहले जरूरी है कि खबर तो छपे और संपादक बताएं कि वे कहां हैं, क्या चाहते हैं।

बिहार में चुनाव का मामला अपनी जगह है। एक्स पर एक जैसी पोस्ट से यह चर्चा चल रही है कि नीतिश से लेकर अन्य सहयोगी नेताओं को मनाने की कोशिश पार्टी के चाणक्य की नीति से ही चल रही है। इस संबंध में दोनों तरह की खबरें मिल रही हैं। अखबारों में हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर लीड है। और इसके शीर्षक से पता चलता है कि मामला कुछ तो है। शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, राजग ने मतभेद दूर कर लिए, बिहार में जेडी (यू) की पहली सूची जारी। इसके साथ एक खबर है, विपक्षी समूह में अभी भी सीटों की साझेदारी पर सहमति नहीं हुई है। यह सब तब जब विपक्ष में विवाद होना नहीं है और राजग में पर्याप्त विवाद है। उदाहरण के लिए, देशबन्धु में खबर है, अमित शाह से मिलने के बाद उपेन्द्र कुशवाह ने कहा कि राजग में सब ठीक है। एक दिन पहले इन्हीं ने कहा था कि राजग में सब ठीक नहीं है। 12 अक्तूबर को इन्होंने फेसबुक पर लिखा था, प्रिय मित्रों/साथियों, आप सभी से क्षमा चाहता हूं। आपके मन के अनुकूल सीटों की संख्या नहीं हो पायी। मैं समझ रहा हूं, इस निर्णय से अपनी पार्टी के उम्मीदवार होने की इच्छा रखने वाले साथियों सहित हजारों – लाखों लोगों का मन दुखी होगा। आज कई घरों में खाना नहीं बना होगा। परन्तु आप सभी मेरी एवं पार्टी की विवशता और सीमा को बखूबी समझ रहे होंगे। किसी भी निर्णय के पीछे कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं जो बाहर से दिखतीं हैं मगर कुछ ऐसी भी होती हैं जो बाहर से नहीं दिखतीं। हम जानते हैं कि अन्दर की परिस्थितियों से अनभिज्ञता के कारण आपके मन में मेरे प्रति गुस्सा भी होगा, जो स्वाभाविक भी है। आपसे विनम्र आग्रह है कि आप गुस्सा को शांत होने दीजिए, फिर आप स्वयं महसूस करेंगे कि फैसला कितना उचित है या अनुचित। फिर कुछ आने वाला समय बताएगा। फिलहाल इतना ही। इसके बाद कल यानी 15 अक्तूबर को सुबह सात बजे इन्होंने लिखा था, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के साथ विमर्श हेतु गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय जी और मुझे अभी दिल्ली के लिए प्रस्थान करना है। इसलिए आज पार्टी के साथियों के साथ पटना स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित होने वाली बैठक तत्काल स्थगित की गई है। इसके बाद फेसबुक पर इनकी कोई पोस्ट नहीं है। ‘खबर’ की चर्चा मैं ऊपर कर चुका हूं। ईडी, सीबीआई शाखा वाली वाशिंग मशीन पार्टी खबरें कैसे छपवाती है उसपर यहां कुछ अलग से बताने की जरूरत नहीं है। यह रिपोर्ट हेडलाइन मैनेजमेंट के इसी खेल को उजागर करने के लिए लिखी जाती है।

द टेलीग्राफ की लीड बिहार चुनाव पर है और राजग में दरार की ओर इशारा कर रही है। शीर्षक है, बिहार में सीटों के सौदे में, भाजपा ने पहचान की राजनीति को कमज़ोर किया – मिशन मंडल। जेपी यादव की इस खबर के अनुसार, बिहार चुनावों के लिए एनडीए (राजग) सहयोगियों के बीच सीटों के बंटवारे की व्यवस्था और इससे उपजे असंतोष ने नरेंद्र मोदी-अमित शाह की जोड़ी द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू (जनतादल यू) और अन्य मंडल-आधारित सहयोगियों को हाशिए पर धकेलकर राज्य की राजनीति पर अपना दबदबा बनाने की कोशिश की है। यह रेखांकित हो रहा है। जेडीयू ने बुधवार को 57 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की, जो चिराग पासवान की एलजेपी (आरवी) को आवंटित अपनी कम से कम पाँच पारंपरिक सीटों को वापस पाने के लिए भाजपा नेतृत्व के साथ कड़ी मशक्कत के बाद जारी की गई थी। जेडीयू इन पाँच सीटों पर अपनी संभावनाओं को लेकर आशान्वित है, और इन्हें चिराग को देने के कदम को नीतीश की पार्टी की संख्या कम करने के प्रयास के रूप में देखा गया था। हालाँकि, इस फेरबदल से प्रत्येक पार्टी द्वारा लड़ी जा रही सीटों की कुल संख्या में कोई बदलाव नहीं आया है। जेडीयू नेताओं ने कहा कि वे भाजपा के अपने प्रभाव को कम करने के प्रयासों का कुछ हद तक विरोध करने में कामयाब रहे हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि बड़ा खतरा अभी भी बना हुआ है। पिछले विधानसभा चुनावों तक, भाजपा, जदयू के पीछे गौण भूमिका में थी। हालाँकि, इस बार उसने सीट बंटवारे की बातचीत में अपनी शर्तें तय कीं और वह भी 2020 के अपने प्रदर्शन से उत्साहित होकर। दि एशियन एज की लीड का शीर्षक सरकार और सरकारी पार्टी का प्रचार है। हिन्दी में यह कुछ इस तरह होगा – प्रधानमंत्री ने भाजपा नेताओं से कहा, प्रत्येक वोटर के पास पहुंचिए, हरेक बूथ जीतिये। सिर फुटैव्वल की तमाम खबरों के बावजूद, फ्लैग शीर्षक है – “एकजुट एनडीए, एकजुट बिहार, 14 नवंबर को बिहार में दूसरी दीवाली : मोदी”। (समाप्त)  

पहला पार्ट पढ़िए – आज के अखबार : बिहार में चुनाव है, प्रचार वाली खबरें खूब हैं, नुकसान वाली कम, चुनावी खबर के कई रंग

लिंक – https://www.bhadas4media.com/bihar-mein-chunav-hai-prachaar-waali-khabren-khoob-hain/

लेखक संजय कुमार सिंह से संपर्क [email protected] के ज़रिए किया जा सकता है।

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