जयपुर। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी से कथित ब्लैकमेलिंग के मामले में फंसे तीन पत्रकारों को जयपुर की सत्र अदालत से राहत नहीं मिल सकी है। अदालत ने तीनों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।
जानकारी के मुताबिक, यह मामला ‘ऑपरेशन डिस्ट्रॉय दीया कुमारी’ नाम से चलाए गए एक कथित अभियान से जुड़ा है। आरोप है कि मध्य प्रदेश के एक न्यूज पोर्टल से जुड़े पत्रकारों ने दीया कुमारी के खिलाफ कई भ्रामक और झूठी खबरें प्रसारित की थीं। इन खबरों को रोकने के एवज में कथित तौर पर 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी।
तीन पत्रकारों के नाम सामने आए
इस मामले में जिन पत्रकारों के नाम चर्चा में हैं, उनमें मध्य प्रदेश के आनंद पांडे और हरीश दिवेकर, तथा राजस्थान के जिनेश जैन शामिल हैं। बताया जा रहा है कि जिनेश जैन न्यूज पोर्टल ‘द सूत्र’ से जुड़े हैं। जयपुर पुलिस ने पहले भी भोपाल से आनंद पांडे और हरीश दिवेकर को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था।
कोर्ट का सख्त रुख
तीनों पत्रकारों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए जयपुर सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी। अदालत ने तर्क सुनने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया। इससे अब तीनों की गिरफ्तारी की संभावना प्रबल हो गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
डिप्टी सीएम दीया कुमारी के कार्यालय की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि न्यूज पोर्टल द्वारा प्रकाशित खबरें पूरी तरह भ्रामक और झूठी थीं। आरोप है कि पत्रकारों ने इन खबरों को न चलाने के बदले राशि की मांग की और धमकी दी कि पैसे नहीं देने पर और भी नकारात्मक खबरें प्रकाशित की जाएंगी।
इस केस में जयपुर पुलिस पहले ही कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है। फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद इस प्रकरण में अगला कदम पुलिस की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
सियासी हलचल भी तेज
यह मामला केवल मीडिया जगत ही नहीं, बल्कि राजस्थान की सियासत में भी सुर्खियों में है। डिप्टी सीएम दीया कुमारी से जुड़ा होने के कारण राज्य की राजनीतिक फिज़ा में भी इस पर चर्चाएं तेज हैं।
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