मेरठ के कायस्थ गावड़ी गांव में एक चौंकाने वाला जमीन सौदा सामने आया है। यहाँ 10 दलित परिवारों के 46 लोगों की 19.09 बीघा जमीन 13 सितंबर 2024 को शांति निकेतन ट्रस्ट ने खरीद ली। ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं—ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर।
दावा है कि इन दलितों को मेडिकल रिपोर्ट में असाध्य रोगी या विस्थापित दिखाया गया। नियमों के मुताबिक DM की अनुमति तभी मिल सकती है जब दलित गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो या गांव छोड़ चुका हो। दैनिक भास्कर की टीम ने मेरठ में 10 दिन जांच की। बड़ा खुलासा यही—ज्यादातर मेडिकल रिपोर्ट फर्जी, और विस्थापन भी कागज़ों में ही।
यूपी में दलितों की जमीन बिकने का नियम
DM परमिशन तभी देते हैं जब—
- असाध्य बीमारी हो
- व्यक्ति विस्थापित हो चुका हो
- दोनों स्थिति में सरकारी जांच अनिवार्य।
आरोप क्या हैं?
AAP मेरठ के जिलाध्यक्ष अंकुश चौधरी ने कहा—
- एक ही गांव के 37 दलित अचानक गंभीर बीमार कैसे हो गए?
- विधायक होते हुए डॉ. तोमर ने इलाज की मदद क्यों नहीं की?
- जो विस्थापित दिखाए गए, वे गांव में ही रह रहे हैं—जांच क्यों नहीं?
- ट्रस्ट ने जमीन खरीदी और एक साल बाद पास में MDA की योजना आ गई—क्या पहले से जानकारी थी?
इन्वेस्टिगेशन: दलितों के बयान और कागज़ों में जमीन बिक्री
- सुखबीर — “मुझे बताए बिना मेडिकल करा दिया, बीमार बता दिया”
- 0.9 बीघा जमीन – 46.80 लाख में
- मेडिकल: प्यारेलाल हॉस्पिटल में “गाड़ी भेजकर ले गए। बिना कारण मेडिकल कराया। हम DM या SDM के सामने पेश नहीं हुए।”
- आरोप: मेडिकल सर्टिफिकेट फर्जी तरीके से बनवाया गया।
2. रमेश — “NOC देखी तक नहीं, हम गांव छोड़कर कहीं नहीं गए”
- 1.43 बीघा – 75 लाख रुपए
- NOC में लिखा—विस्थापित
- वास्तविकता—परिवार गांव में ही रहता है “कोई जांच नहीं हुई। मंत्री बैनामे वाले दिन आए, पर बातचीत नहीं हुई।”
3. वीर सिंह — “28 लाख तय थे, 27 दिए; कोई मेडिकल नहीं हुआ”
- 0.38 बीघा – 25.55 लाख रुपए
- कागज़ों में बीमारी बताई
- बेटा बोला—“असाध्य बीमारी कुछ नहीं। 7 साल पहले इलाज हुआ था, अब स्वस्थ हैं।”
4. धर्मेंद्र — “कूल्हे का ऑपरेशन असाध्य बीमारी नहीं, फिर भी परमिशन मिल गई”
- 0.53 बीघा – 75 लाख रुपए
- बयान: “परमिशन मंत्री के लोगों ने ली। अधिकारी कभी पूछने नहीं आए।”
प्रशासन ने क्या किया?
28 अगस्त व 2 सितंबर 2024 को दलितों के आवेदन लगे—37 लोग एक साथ गंभीर रूप से बीमार। प्रशासन ने कोई मेडिकल टीम नहीं भेजी।
ट्रस्ट के लोग 7 और 12 सितंबर को लोगों को हॉस्पिटल ले गए, सर्टिफिकेट बने। ADM बलराम सिंह ने 10 सितंबर को 18 लोगों की परमिशन दी। 11 सितंबर को 6 लोगों की परमिशन और 13 सितंबर को 22 लोगों की परमिशन दी। यानी तीन दिन में कुल 46 लोगों की परमिशन दे दी।
सौदे का लाभ कितना?
- खरीद: 10.55 करोड़ रुपए
- वर्तमान कीमत: लगभग 38.18 करोड़ रुपए
- 14 महीने में 27.63 करोड़ का फायदा
ट्रस्ट कौन-सा?
- शांति निकेतन ट्रस्ट, रजिस्टर्ड 2008
- स्कूल, फार्मेसी कॉलेज, टीचर एजुकेशन कॉलेज संचालित करता है।
अफसरों की सफाई
- ADM बलराम सिंह: “ऐसा कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं।”
- DM वीके सिंह: “मैं कुछ नहीं कहना चाहता।”
मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर का पक्ष
फोन पर कहा—“जो जमीन खरीदी, वह इंस्टीट्यूशनल उपयोग के लिए है। MDA टाउनशिप 500 मीटर दूर है। मेरी संस्था पहले से वहां है। लखनऊ में मिलकर हर बात पर प्रूफ के साथ जवाब दूंगा।” 10 दिन बाद भी उन्होंने कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया।
मेरठ में ऊर्जा राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर ने अपने ट्रस्ट के जरिए दलितों की जमीन खरीदी है। हालांकि, जिन दलितों की जमीन खरीदी गई है। उन्हें बीमार या विस्थापित बताया गया। जब इस खबर की पड़ताल की तो मंत्री जी का सच सामने आ गया। पढ़िए यह इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट। साथी Ravi Srivastava की दैनिक भास्कर पर स्पेशल रिपोर्ट- शालु अग्रवाल, पत्रकार
UP सरकार में मंत्री सोमेंद्र तोमर के ट्रस्ट पर आरोप है कि उन्होंने मेरठ में 46 दलितों को गंभीर बीमार/विस्थापित बताकर उनकी 19 बीघा जमीन 10 करोड़ रुपए में खरीद ली। इसके 1 साल बाद ही इस जमीन के पास सरकारी टाउनशिप आ गई। इस वजह से अब इस जमीन का रेट 4 गुना हो गया है। नियम है कि दलित व्यक्ति या तो गंभीर बीमार हो, या फिर विस्थापित हो रहा हो। तभी वो जमीन बेच सकता है। “दैनिक भास्कर” ने जमीन बेचने वाले कई लोगों से बात की। उन्होंने कहा कि न तो वो बीमार हैं और न ही कहीं जा रहे। जमीन की खरीद फरोख्त प्रक्रिया में मंत्री पर सवाल उठे हैं। – सचिन गुप्ता, पत्रकार
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Atul sharma
December 2, 2025 at 1:48 pm
सोमेंद्र तोमर ही क्या बीजेपीके सारे नेता जमीन कब्जाने में लगे हैं मैं मेरठ छावनी में रहता हूँ और जिस जगह पर रहता हूँ वो defence लैंड है उस जमीन को डीईओ के साथ मिल कर जमीन कब्जा ली मैंने pmo ओर cmo portal पर शिकायत की लेकिन मुझे घर खाली करने को कहा जाता हैं