मेघा उपाध्याय-
मेरी पिछली पोस्ट के बाद सबसे ज़्यादा पूछा गया सवाल यही था—जर्नलिज्म में स्टार्टिंग सैलरी कितनी होती है? अगर आप पत्रकार बनने का सपना देख रहे हैं, तो आगे पढ़ने से पहले थोड़ा तैयार हो जाएं, क्योंकि यह वही सच है जिसे लोग ज़ुबान पर लाना नहीं चाहते।
सीधी बात—आपकी शुरुआती सैलरी आपके टैलेंट, मेहनत या पैशन पर नहीं, बल्कि इस पर निर्भर करती है कि आप कहां से आते हैं।
मेरी अपनी कहानी ही सुन लीजिए।
मैं IIMC से सीधे ABP में प्लेस हुआ—हिंदी पत्रकारिता में इसे सबसे अच्छी प्लेसमेंट्स में माना जाता है। 2021 में हम 15 लोग (सीनियर्स समेत) ABP में ₹29,134 इन-हैंड पर जॉइन हुए थे। और 2025 में? ज़ीरो ग्रोथ। आज भी नए ज्वाइन करने वालों की सैलरी लगभग यही है—या उससे भी कम—जबकि महंगाई दोगुनी हो चुकी है।
मेरे दोस्त जो दूसरे चैनलों में गए, उनकी शुरुआत ₹22–₹25 हज़ार से हुई। किसी और कॉलेज से आते हैं? तो ₹20–₹25 हज़ार मैक्स। इंटर्नशिप के रास्ते आते हैं? उससे भी कम।
और सबसे बुरा सच—
मैं ऐसे लोगों को जानता हूं जिन्होंने पूरे एक साल तक फ्री में बड़े मीडिया हाउसों में काम किया, और फिर उन्हें “जॉब” मिली ₹22,000 में। सोचिए—एक साल मुफ्त की मज़दूरी, और उसके बाद भी ऐसी सैलरी जो मेट्रो शहर के किराए तक को कवर नहीं कर पाती।
हिंदी बनाम इंग्लिश मीडिया
हाँ, फर्क है—
इंग्लिश मीडिया: ₹30,000–₹35,000… वहीं, कुछ नामी संस्थान ₹40,000 तक देते हैं। फर्क थोड़ा है, लेकिन संघर्ष दोनों जगह बराबर है।
अंतिम सच
- आज भी टॉप मीडिया ब्रांड्स में फ्रेशर्स की सबसे ऊँची सैलरी करीब ₹30,000 ही है।
- पिछले पाँच साल में जर्नलिज्म की सैलरी स्केल लगभग जैसा का तैसा है।
- इंटर्नशिप्स ज़्यादातर अंडरपेड या अनपेड होती हैं।
- और आपकी शुरुआती कमाई पूरी तरह इस पर तय होती है कि आप कहाँ से आए हैं, न कि आप कितने काबिल हैं।
यह पोस्ट सिर्फ सैलरी की हकीकत पर है। अगली पोस्ट में इंटर्नशिप, सर्वाइवल और करियर ग्रोथ पर लिखूँगा—क्योंकि DM में लोग लगातार पूछ रहे हैं।
अगर फिर भी पत्रकारिता चुननी है—तो खुले आँखों से चुनें, रिसर्च कर के… अंधे भरोसे से नहीं।
पत्रकार मेघा उपाध्याय एबीपी न्यूज में कार्यरत हैं।


