देहरादून। उत्तराखंड के सूचना एवं लोक संपर्क विभाग ने पत्रकारों की प्रेस मान्यता के नवीनीकरण को लेकर बड़ी और कड़ी व्यवस्था लागू कर दी है। विभाग ने सभी जिला सूचना अधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि वर्ष 2026 के लिए प्रेस मान्यता नवीनीकरण से पहले प्रत्येक पत्रकार की विस्तृत जांच की जाए।
सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अब नवीनीकरण प्रक्रिया से पहले सभी पत्रकारों की गोपनीय जांच (Confidential Verification) अनिवार्य कर दी गई है। पत्र के बिंदु 6 में स्पष्ट कहा गया है कि जिन प्रेस प्रतिनिधियों की गोपनीय जांच छह महीने से अधिक पुरानी हो चुकी है, उनकी फिर से गोपनीय जांच कराते हुए ही मान्यता नवीनीकरण प्रस्ताव भेजा जाए।
पत्र के मुख्य निर्देश
सूचना विभाग ने 20 नवंबर 2025 को जारी पत्र (संख्या 249/स०ल०स०वि.(प्रेस)/100/2014) में निम्न प्रमुख बिंदु शामिल किए हैं:
- सभी प्रेस मान्यता प्राप्त पत्रकारों को 2026 के नवीनीकरण के लिए आवश्यक विवरण 20 दिसंबर 2025 तक मुख्यालय में उपलब्ध कराना होगा।
- स्वतंत्र पत्रकारों को यह प्रमाणित करना होगा कि वे किसी मीडिया हाउस/संस्थान से संबद्ध या कार्यरत नहीं हैं। इसके लिए स्व–घोषणा पत्र देना अनिवार्य होगा।
- स्वतंत्र पत्रकारों को कम से कम दो प्रतिष्ठित समाचार पत्रों/पत्र–पत्रिकाओं में वर्ष 2025 के दौरान प्रकाशित अपने लेख/forms के आधार पर वार्षिक आय प्रमाण (न्यूनतम ₹6000) भी प्रस्तुत करना होगा।
- जिला स्तर पर मान्यता प्राप्त पत्रकारों के मीडिया संस्थान की नियमितता रिपोर्ट विभागीय नियमों के अनुसार शामिल की जाएगी।
- नवीनीकरण के लिए प्रस्ताव भेजने वाले अधिकारी को सभी अभिलेख समुचित रूप से प्रमाणित करने होंगे।
सबसे अहम—छह माह से ज्यादा पुरानी गोपनीय जांच अमान्य मानी जाएगी। जिला सूचना अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि पत्रकार की नवीन गोपनीय जांच कराई जाए और उसी के आधार पर नवीनीकरण प्रस्ताव तैयार किया जाए।
20 दिसंबर अंतिम तिथि
पत्र में कहा गया है कि सभी जिले अपने-अपने क्षेत्र के प्रेस प्रतिनिधियों के मान्यता नवीनीकरण संबंधी दस्तावेज, संस्थान की नियमावली, फोटो पहचान पत्र व अन्य विवरण 20 दिसंबर 2025 तक हर हाल में उपलब्ध कराएं, ताकि नवीनीकरण प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी की जा सके।
क्यों है यह सख्ती?
- विभाग का उद्देश्य राज्य में
- फर्जी पत्रकारिता रोकना
- प्रेस कार्ड के दुरुपयोग को खत्म करना
- और केवल वास्तविक व सक्रिय पत्रकारों को ही मान्यता देना बताया जा रहा है।


