नितिन ठाकुर-
M.Sc, Phd, LLb कर चुके (CJI पर जूता फेंकने के बाद उन्होंने ही बताया था) जूता फेंक वकील साहब का हिसाब कड़कड़डूमा कोर्ट में एक दूसरे वकील साहब ने ही कर दिया। फेंक कर नहीं मारा बल्कि हाथ में जूता लेकर उन पर चटकाया।
पिट रहे राकेश जी कातर भाव से सामने वाले का परिचय पूछते रहे, खुद के जुतियाए जाने का कारण पूछते रहे, अपने कमज़ोर हाथों से हमलावर को पीछे धकेलते हुए “तेरी साले तेरी साले” बोलते रहे और फिर बेबस होकर “सनातन धर्म की जय हो” के नारे के पीछे छिप गए।
कुछ महीने पहले उन्होंने CJI पर जूता फेंका था। आरोप लगाया था कि गवई साहब ने सनातन का अपमान किया है। आज वही उनके साथ घट गया लेकिन जब एक संस्थान के रिपोर्टर ने उनसे पूछा तो वो वकील से तुरंत दर्शन शास्त्री में स्विच हो गए। बताने लगे कि उनकी हिंसा और उनके साथ हुई हिंसा में फर्क है।
उन्होंने गांधी को भी हिंसक बताया क्योंकि बकौल उनके यदि कोई आश्रमवासी चाय पी ले तो गांधी उपवास पर बैठ जाते थे। इधर उधर की सुनाते हुए वो दर्शन के उच्च शिखर को टच करने वाले थे लेकिन रिपोर्टर ने उन्हें थोड़ा नीचे उतारकर कहा कि आप सीजेआई के बयान को गलत कोट कर रहे हैं तो बस फिर वो नाराज़ हो गए। आंय बांय करने लगे।
मुझे पीड़ित के साथ पूरी सहानुभूति है। उनके साथ जो हुआ उसे उचित नहीं ठहराया जा सकता, भले उन्होंने वकील रहते खुद जो किया हो। सनातनी आप होंगे, लेकिन सामने वाला आपसे कम है ये बस जूता फेंक कर आप तय नहीं कर सकते।
किसी को किसी के धर्म का अपमान करने की इजाज़त नहीं है लेकिन किसी को उसके नाम पर जूता मारने की भी नहीं है। वो तो CJI थे, बड़प्पन में माफ कर दिया। अकेले जा कर किसी आम इंसान के साथ कीजिए, वो आपको दर्शन बघारने का मौका दिए बगैर तुरंत उधार चुका देगा, हो सकता है जूता चलाते हुए “सनातन की जय” ही बोल भी रहा हो। सिलसिला मत चलाइए। विचार की लड़ाई है तो उनके साथ विचारों से लड़िए। हम जैसे लोग लड़ने के आपके अधिकार के हक में खड़े हैं।



Ravindra Nath Kaushik
December 10, 2025 at 8:03 am
वृद्ध वकील पर कोर्ट के बाहर जूता आक्रमण करने वाले युवा नवबौद्ध कथित वकील में अपनी पहचान स्थापित करने का भी साहस न होना दयनीय है.उसने अपनी आईडी पर जाकर ही इस जूता प्रत्युत्तर का श्रेय लिया.उसमें भी अपनी पहचान स्थापित करने का वीडियो नही लगाया. अब इसकी व्याख्या करें,प्लीज. आपकी व्याख्या का प्रशंसक हूं.
Ravindra Nath Kaushik
December 10, 2025 at 8:05 am
वृद्ध वकील पर कोर्ट के बाहर जूता आक्रमण करने वाले युवा नवबौद्ध कथित वकील में अपनी पहचान स्थापित करने का भी साहस न होना दयनीय है.उसने अपनी आईडी पर जाकर ही इस जूता प्रत्युत्तर का श्रेय लिया.उसमें भी अपनी पहचान स्थापित करने का वीडियो नही लगाया. अब इसकी व्याख्या करें,प्लीज. आपकी व्याख्या का प्रशंसक हूं.आपका वीडियो भी जूता वीर की पहचान स्थापित नही कर पा रहा.क्या बाद में कभी पोस्ट करेंगें ताकि दावेदार के दावे की पुष्टि हो सके?