नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर में मार्च 2020 के दौरान दर्ज उस FIR को रद्द कर दिया है, जिसमें इस्लामुद्दीन अंसारी नाम के व्यक्ति को केवल एक ऑडियो क्लिप भेजने के कारण आपराधिक मामले में फंसा दिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह मुकदमा “सबक सिखाने” और “बदला लेने” की नीयत से दर्ज कराया गया था।
यह ऑडियो क्लिप उस समय के SP बिजनौर संजीव त्यागी की बताई जाती है, जिसमें मुस्लिम समुदाय के प्रति आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणियां सुनी गई थीं। इस्लामुद्दीन ने यह ऑडियो त्यागी को भेजकर सिर्फ यह पुष्टि करनी चाही थी कि आवाज उन्हीं की है या किसी अन्य की—परंतु उसी आधार पर उन पर गंभीर धाराएं लगा दी गईं।
ये ऑडियो NRC CAA प्रोटेस्ट के समय वायरल हुई थी। इन्हीं एसपी के कार्यकाल में प्रदर्शनों के दौरान नहटौर में पुलिस की गोली से दो युवक मारे गए थे।
SP त्यागी की नाराजगी के बाद FIR
ऑडियो भेजने के बाद तत्कालीन SP संजीव त्यागी भड़क गए और इस्लामुद्दीन के खिलाफ:
- धारा 505 IPC (वैमनस्य फैलाने का आरोप)
- धारा 67 IT एक्ट
के तहत FIR दर्ज कर दी। 2021 में CJM ने चार्जशीट पर संज्ञान भी ले लिया। हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार किया, जिसके बाद इस्लामुद्दीन अंसारी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे—और 5 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें इंसाफ मिला।
सुप्रीम कोर्ट ने SP को पक्षकार बनाया, वॉयस सैंपल का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए संजीव त्यागी को मामले में पक्षकार बनाया और उनका वॉयस सैंपल देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि जांच में यह क्लिप उन्हीं की पाई जाती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई तय है।
“कानून का दुरुपयोग”—कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि:
- FIR दर्ज करना कानून का घोर दुरुपयोग है
- यह न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है
- SP त्यागी ने आरोप लगने के बाद ऑडियो की पुष्टि कराने की जरूरत क्यों नहीं समझी?
जस्टिस अमानुल्लाह ने त्यागी को फटकारते हुए कहा:
“अगर आपने वो बातें कही हैं, तो आपको व्यवस्था के प्रति जवाबदेह होना पड़ेगा। आवाज वायरल हो चुकी है—क्या आप वॉयस सैंपल देने से बच सकते हैं?”
कोर्ट ने कोतवाली शहर, बिजनौर में दर्ज FIR और सभी आगे की कार्यवाही को रद्द कर दिया।
फैसले का बड़ा संदेश
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि:
- सत्ता और पद का इस्तेमाल व्यक्तिगत प्रतिशोध में नहीं किया जा सकता
- कानून सबके लिए समान है—चाहे वह आम नागरिक हो या उच्च पदस्थ अधिकारी
- किसी सरकारी अधिकारी का किसी समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण या इस्लामोफोबिक रवैया असंवैधानिक है
- ऐसे व्यवहार से लोक सेवक की शपथ और कर्तव्य दोनों का उल्लंघन होता है
दिनेश डांगी-
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी में तैनात DIG संजीव त्यागी का ऑडियो सैंपल लेने का आदेश दिया है। दरअसल, बिजनौर में SP रहते संजीव त्यागी का कथित तौर पर एक ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें मुस्लिमों को लेकर आपत्तिजनक बात कही जा रही है।
देहरादून के बुजुर्ग इस्लामुद्दीन अंसारी ने ये ऑडियो SP के वॉट्सएप पर भेजकर पूछ लिया कि क्या ये ऑडियो आपकी है? पुलिस ने इस्लामुद्दीन पर ही मुकदमा ठोंक दिया कि वो घृणा फैलाने वाला कंटेंट प्रसारित कर रहे हैं। इस्लामुद्दीन इस कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक गए। 2 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस्लामुद्दीन पर दर्ज कानूनी केस रद कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने DIG संजीव त्यागी को 3 हफ्तों में वॉइस सैंपल देने का आदेश दिया है। इसकी जांच हैदराबाद फोरेंसिक लैब में होगी। इससे स्पष्ट होगा कि मुस्लिमों के खिलाफ वो भड़काऊ आवाज IPS ऑफिसर संजीव त्यागी की थी या नहीं?


