
बांग्लादेश की प्रतिक्रिया खेल में धर्म का जहर बोने और फैलने का उदाहरण है
संजय कुमार सिंह
आज मेरे ज्यादातर अखबारों की सबसे बड़ी खबर वेनेजुएला की है और लगभग सबों में अलग तरह से, अलग शीर्षक से लीड यही है। इसका मतलब यह हुआ कि लीड बनाने लायक देश में, देश से संबंधित कोई दूसरी बड़ी खबर नहीं है। सच्चाई यह है कि सरकार को मीडिया के भरपूर समर्थन, प्रचार और बचाव के बावजूद बांग्लादेश ने भारत में टी20 खेलने से मना कर दिया है। हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर और इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने पर यह खबर लीड है। अखबार में यह खबर राजनीति की खबरों की ही तरह है और बीच में भी एक खबर है जो इसका राजनीतिक संबंध बताती है। जिन अखबारों ने इसे पहले पन्ने पर नहीं छापा उनके बारे में कहा जा सकता है कि खेल की खबर खेल के पन्ने पर है या होगी। लेकिन है यह राजनीति और विदेश संबंध का मामला ही। दूसरे शब्दों में यह खेल में राजनीति का जहर बोने और उसके फलने-फूलने का मामला भी कहा जा सकता है। हालांकि, वह अलग मुद्दा है। आज एक खबर 2026 ओलंपिक की तैयारियों पर प्रधानमंत्री का दावा भी है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने इसे सिंगल कॉलम में छापा है और खेल की दोनों खबरों को एक साथ रखा है। इंडियन एक्सप्रेस में आज यह खबर लीड है। इसका शीर्षक है, “बांग्लादेश आईसीसी से : टी20 वर्ल्ड कप के लिए हम भारत में नहीं खेलेंगे”। अखबार ने साफ-साफ और प्रमुखता से लिखा है कि बीसीसीआई द्वारा केकेआर को बांग्लादेशी तेज गेंदबाज को आईपीएल से बाहर करने के लिए कहने के बाद यह जवाबी कार्रवाई है। इंडियन एक्सप्रेस मे ओलंपिक की तैयारियों वाली प्रधानमंत्री की घोषणा पहले पन्ने पर प्रमुखता से नहीं दिखी।
दि एशियन एज में ओलंपिक की तैयारी की खबर तो लीड है और प्रधानमंत्री का यह दावा फ्लैग शीर्षक है कि उन्होंने खेल में भारत की सफलता की प्रशंसा की तथा इसे अपनी सरकार की नीतियों सो जोड़ा। यहां विनेश फोगाट को 2024 के पेरिस ओलंपिक से 100 ग्राम अधिक वजन होने के कारण स्वर्ण पदक मुकाबले से पहले अयोग्य घोषित कर दिया जाना याद आता है। इसके आगे-पीछे की राजनीति लंबी और जटिल है लेकिन इस पर विवाद हुआ तो कुछ ने कहा कि टीम और सपोर्ट स्टाफ को बेहतर मार्गदर्शन देना चाहिए था जबकि भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा ने कहा था कि वजन प्रबंधन मुख्य रूप से खिलाड़ी और उसके कोच की जिम्मेदारी है। अगर आप को पूरा मामला नहीं भी याद हो तो खेल में सरकार की नीति और भूमिका का आलम आप समझ सकते हैं। खेल की इन खबरों के पहले पन्ने पर नहीं होने का कारण अगर यह माना जाए कि खेल की खबरें खेल के पन्ने पर होती हैं तो हिन्दुस्तान टाइम्स ने इन दोनों खबरों के साथ या बीच में एक खबर है, ढाका के पास हिन्दू व्यक्ति की हत्या के सिलसिले में तीन गिरफ्तार। भारत में जो होता है अगर उसकी खबरें भी विदेशी (या बांग्लादेश के ही) अखबारों में ऐसे ही छपती हों तो पता नहीं भारत की कितनी बदनामी होती होगी लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा को कभी इससे विदेश में होने वाली चिन्ता की बात करते नहीं सुना। उसके लोग हमेशा राहुल गांधी द्वारा विदेश में देश को बदनाम किए जाने से परेशान बताए जाते रहे हैं। द हिन्दू में बांग्लादेश की खबर पांच कॉलम में है। शीर्षक है, “बांग्लादेश ने कहा कि ‘सुरक्षा कारणों’ से वह (उसकी टीम) टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारत नहीं जाएगी”।
अमर उजाला में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। संभव है खेल की खबर पहले पन्ने पर नहीं छापने का रिवाज हो। हालांकि, दूसरे पहले पन्ने पर प्रधानमंत्री की फोटो के साथ साथ उनकी यह घोषणा है कि भारत ओलंपिक मेजबानी की तैयारी कर रहा है। एक तरफ ओलंपिक की तैयारी और दूसरी तरफ बांग्लादेश जैसे पड़ोसी का सुरक्षा कारणों से देश में खेलने से इनकार करना मायने रखता है और शायद इसी कारण आज ओलंपिक की तैयारियों की खबर को प्राथमिकता मिली है। दि एशियन एज में प्रधानमंत्री के खेल प्रेम को और गंभीरता से पेश किया गया है। शीर्षक है, मोदी ने खेलों को बढ़ावा देने का समर्थन किया भारत ’36 के ओलंपिक्स की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। दि एशियन एज में बांग्लादेश की खबर पहले पन्ने पर नहीं है लेकिन खेल की खबरों के पन्ने पर लीड है। इसका शीर्षक एक ही शब्द है, बॉर्डरलाइन! उपशीर्षक है, बांग्लादेश का क्रिकेट बोर्ड चाहता है कि आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप का खेल भारत के बाहर रखे। मैं क्रिकेट नहीं देखता, मेरे पास सूचनाएं भी नहीं होती हैं लेकिन यह शर्मनाक है कि बांग्लादेश ऐसा चाहता है और भारत इस स्थिति में पहुंच गया है और बांग्लादेश ऐसा कह रहा है या कह पा रहा है।
नवोदय टाइम्स में आज खेल की दोनों खबरें पहले पन्ने पर हैं। शीर्षक है, (इंदौर में लोग सीवर मिला पानी पीकर मर गये तो क्या हुआ, दिल्ली की 30 लाख और देश भर के 60 करोड़ लोग दूषित जल के कारण संकट में हैं तो क्या हुआ), प्रधानमंत्री पूरी मजबूती से कर रहे हैं 2036 ओलंपिक की तैयारी। सत्ता में आना था तो 100 दिन, 50 दिन की बात होती थी अब 2036 ही नहीं 2047 की भी बा चल रही है। बांग्लादेश वाली खबर चार कॉलम में है। शीर्षक है, टी20 विश्व कप के लिए टीम नहीं भेजेगा बांग्लादेश। द टेलीग्राफ की सेंकड लीड का शीर्षक है, “बांग्लादेश की अपील : विश्व कप के खेल श्रीलंका में हों”। देशबन्धु में खेल की दोनों खबरें पहले पन्ने पर नहीं है। यहां जो खबरें पहले पन्ने पर हैं उनमें कई दूसरे अखबारों के पहले पन्ने पर नहीं है। इनमें प्रमुख हैं – अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर उतरा जनसैलाब। इसके साथ एक और खबर है, धामी सरकार पर वीआईपी को बचाने का लगा आरोप। एक और बड़ी खबर का शीर्षक है, इंदौर के बाद अब गुजरात में हाहाकार। सिंगल कॉलम की खबरें भी कम नहीं है – राम रहीम को मिली 40 दिन की पैरोल, ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा। टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने पर प्रमुखता से छपी एक खबर का शीर्षक है, उम्र कैद भुगत रहे डेरा प्रमुख को 15वीं बार परोल मिली, आठ साल में 405 दिन जेल से बाहर।
इंडियन एक्सप्रेस के पहले पन्ने की खबरें उल्लेखनीय हैं – 1) एक और हत्या से ग्रामीण खेल में बढ़ते स्टेक का पता चलता है। यह 15 दिसंबर को लोगों से भरे टूर्नामेंट में प्रोमोटर को गोली मारकर उनकी हत्या कर देने की खबर है। 2) अंकिता को न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। 2022 के इस हत्याकांड की सीबीआई से जांच कराने की मांग पर उत्तराखंड में प्रदर्शन। 3) कांग्रेस जब जी राम जी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही है तब भाजपा ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की योजना बना रही है। 4) तीन कॉलम में छपी एक खबर बताती है कि असम में 1950 का अधिनियम फिर से लागू किए जाने के बाद 15 लोगों को निष्कासन आदेश मिला। इनमें से एक ने आधी रात में किसी से मांग कर अपने बेटे को फोन किया और बताया था कि वे ठीक-ठीक नहीं जानतीं हैं कि कहां हैं, बांग्लादेश में ढाका के पास कहीं हैं। परिवार को इसके अलावा उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। देश में आम नागरिक की हालत बताने वाली यह खबर किसी और अखबार में पहले पन्ने पर नहीं है। दिल्ली में बुजुर्ग दंपत्ति की हत्या भी आज की बड़ी खबर है और की अखबारों में है। द हिन्दू की एक खबर के अनुसार केंद्र सरकार प्रमुख शहरों में कई सारे हवाई अड्डे चलने देगा। मुझे बिहार यूपी के बस अड्डों के साथ हाल में बंद हुए यूपी के हवाई अड्डों की याद आती है। दि एशियन एज में बंगाल एसआईआर पर मुख्य चुनाव आयुक्त को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की तीसरी चिट्ठी से संबंधित खबर है। आज एक और प्रमुख खबर है। उद्धव ठाकरे ने मांग की है कि, बांबे नंबर निगम चुनाव में निर्विरोध चुने गए 68 उम्मीदवारों के चुनाव रद्द किए जाएं। मेरा मानना है कि वेनेजुएला की खबर छोड़कर और भी बहुत सारी खबरें हैं जो लीड बन सकती थीं।
बीबीसी ने बांग्लादेश से जुड़े इस मामले में एक विस्तृत खबर की है। इसका शीर्षक है, मुस्तफ़िज़ुर रहमान को आईपीएल से हटाने के बाद बीसीसीआई पर क्यों उठ रहे हैं सवाल? इसके अनुसार, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शनिवार को एक बड़ा फ़ैसला करते हुए बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफ़िज़ुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) की टीम से बाहर करने का निर्देश दिया था। बीजेपी नेता संगीत सोम ने बीसीसीआई के इस फ़ैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह फ़ैसला देश के सभी हिंदुओं की जीत है। क्रिकेट को मैं जितना समझता हूं उसमें यह नहीं समझ पा रहा हूं कि किसी भारतीय टीम में बांग्लादेश के खिलाड़ी को रखा ही क्यों जाना चाहिए और रखा गया तो निकाला नहीं जाना चाहिए था। और निकाला गया तो यह सवाल अनुत्तरित है कि संबंधित खिलाड़ी को क्या उसके धर्म के कारण निकाल दिया गया या नहीं रखा जाना चाहिए था? और यह सब जब हो ही गया तो क्या भारत में धर्म के आधार पर टीम नहीं बनानी चाहिए?

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


