मोदी–ट्रंप–शी जिनपिंग… अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बदलते समीकरणों पर सवाल पूछना पत्रकारिता है, लेकिन हर बदलते हालात में सत्ता के अनुकूल नैरेटिव गढ़ना अगर विश्लेषण कहलाने लगे, तो फिर उस पर उंगली उठना भी स्वाभाविक है। इसी कड़ी में टाइम्स नाउ नवभारत के शो ‘पाठशाला’ में दिखाई देने वाले सुशांत सिन्हा की सोशल मीडिया पर जमकर फजीत हो रही है। नीचे पढ़ें…
डॉ शीतल यादव-
सुशांत पहले:- मोदी और ट्रंप की दोस्ती के कारण शी जिनपिंग तनाव में हैं।
सुशांत अब:- मोदी और शी जिनपिंग की दोस्ती के कारण ट्रंप तनाव में हैं।
ये आदमी दुनिया का सबसे बड़ा चाटुकार है — ये आदमी सही मायने में पत्रकार नहीं प्रवक्ता है।
फिर गोदी मीडिया बोल दो, तो इस भाई को बुरा लग जाता है। थोड़ी बहुत तो मर्यादा रख भाई.. थोड़ी सी तो शर्म करा कर, सोशल मीडिया का जमाना है पोल खुलने में देर नहीं लगती है अब! – डॉ मोनिका यादव
प्रतीक पटेल-
2024 – मोदी-ट्रंप की दोस्ती टेंशन में जिनपिंग!
2025 – भारत-चीन की दोस्ती से घबराए ट्रंप!
लेकिन असल बात तो ये है कि जब अमेरिका आंख दिखाता है तब मोदी जी चीन के पास जाते है और जब चीन आंख दिखाता है तब मोदी जी अमेरिका के पास जाते हैं।
दीपक-
एक राजा ने रफूगर रखा हुआ था, जिसका काम कपड़ा रफू करना नहीं बल्कि बातें रफू करना था.
राजा जब कभी बड़ा-बड़ा फेंकता, रफ़ूगर उसे अपने दिमाग और तर्क शक्ति से सही साबित करने की कोशिश करता.
एक दिन राजा दरबार लगाकर जनता को अपनी शिकार की कहानी सुना रहे थे.. अचानक कहानी सुनाते हुए राजा जोश में आकर बोले – एक बार तो ऐसा हुआ कि मैंने आधे किलोमीटर से निशाना लगाकर जो एक हिरन को तीर मारा तो तीर सनसनाता हुआ हिरन की बाईं आंख में लगकर दाएं कान से होता हुआ पिछले पैर के दाएं खुर में जा लगा.
जनता ने कोई वाहवाही नहीं की क्योंकि कोई भी इस बात पर यकीन करने को तैयार ही नहीं था. उधर राजा भी समझ गया कि उसने ज़रूरत से ज़्यादा लम्बी छोड़ दी और फिर वो अपने रफूगर की तरफ देखने लगा.
उसके बाद रफूगर उठा और कहने लगा हज़रात, मैं इस वाक़ये का चश्मदीद गवाह हूँ, दरअसल राजा साहब एक पहाड़ी के ऊपर खड़े थे औऱ हिरन काफी नीचे था, हवा भी मुआफ़िक चल रही थी, वरना तीर आधा किलोमीटर कहाँ जाता है. जहां तक बात है ‘आंख’, ‘कान’ और ‘खुर’ की, तो अर्ज़ कर दूँ , जिस वक्त तीर लगा था उस वक़्त हिरन दाएं खुर से दायाँ कान खुजला रहा था, इतना सुनते ही जनता जनार्दन ने दाद के लिए तालियां बजाना शुरू कर दीं और राजा साहब की वाह वाही होने लगी।
अगले दिन रफूगर अपना बोरिया बिस्तरा बांधकर जाने लगा. राजा साहब ने परेशान होकर पूछा, कहाँ चले?
रफूगर बोला राजा साहब गुस्ताख़ी माफ़, मैं सिर्फ़ छोटी मोटी रफूगिरी कर लेता हूँ, शामियाना सिलवाना हो तो गोदी मीडिया वालों को रख लीजिए!
ये बंदा ख़बरों(?) की पाठशाला चलाता है. यानि ख़ुद को ख़बरों का मास्टर मानता है. पहले इंडिया टीवी में था, अब टाइम्स नाऊ नवभारत में है. सत्ता की चाटुकारिता और समुदायों में ज़हर घोलने के अलावा इसे और कुछ नहीं आता.
सुशांत सिन्हा नाम का ये शख़्स कभी ट्रम्प-मोदी की दोस्ती से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को टेंशन में लाता था. अब चीन और भारत की दोस्ती से ट्रम्प को हिला रहा है…
ऐसे लोग आइने में ख़ुद को देखते होंगे तो क्या सोचते होंगे?
-खुशदीप सहगल


