गांजा बेचने की आरोपी हैदराबाद की महिला, अरुणा बाई उर्फ अंगूरी बाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की खबर टाइम्स ऑफ इंडिया में लीड है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है (किसी को) अपराध करने से रोकने के लिए हिरासत अवधि को बढ़ाना सही नहीं हो सकता। अमित आनंद चौधरी की बाईलाइन वाली इस खबर का इंट्रो है, ‘दोबारा अपराध करने का डर ही (जमानत नहीं देने या हिरासत में रखने का) एकमात्र कारण नहीं हो सकता है’। जाहिर है, किसी को लंबे समय तक हिरासत में रखने का कारण होना चाहिए और यह दोबारा अपराध करने का डर नहीं हो सकता है। पीएमएलए और यूएपीए की बात अलग है पर यह प्रावधान का मामला है। उमर खालिद और शरजिल इमाम को जमानत नहीं मिलने और एमटेक चेयरमैन अरविन्द धाम को मिलने के मामलों में अदालत के विशेषाधिकार से संबंधित खबर पहले छप चुकी है। अब मेरा सवाल है कि पीएमएलए और यूएपीए मामले में जमानत नहीं देने के कानून की जरूरत और उसके उपयोग को चुनौती नहीं दी जानी चाहिए?
संजय कुमार सिंह
आज दि एशियन एज की लीड का शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने सोमनाथ में पूजा की, कहा मंदिर साहस का प्रतीक है। प्रधानमंत्री शनिवार शाम सोमनाथ पहुंचे थे। मंदिर पर साल 1026 में हुए पहले आक्रमण के हजार साल पूरे होने पर ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया जा रहा है। इसका यह नाम, प्रधानमंत्री ने ही रखा है। प्रधानमंत्री तीन दिन की गुजरात यात्रा पर हैं और स्वाभिमान पर्व 8 से 11 जनवरी तक मनाया जाएगा। सोमनाथ में अपने दौरे के पहले दिन, प्रधानमंत्री ने रोड शो किया था। उन्होंने सोमनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया, सामूहिक जप में हिस्सा लिया और ड्रोन शो देखा। हेडलाइन मैनेजमेंट के दौर में आज यह खबर मेरे दूसरे अखबारों में इतनी प्रमुखता से नहीं है। देश में चल रही प्रधानमंत्री की राजनीति और उसके तहत किए जाने वाले हेडलाइन मैनेजमेंट में इस खबर का पहले पन्ने पर नहीं होना मायने रखता है। हालांकि, मैं इसके मायने बता नहीं सकता, आप खुद समझिए। बांग्लादेश में एक और हिन्दू की हत्या नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर दो कॉलम में है। ब्रिटिश कंजरवेटिव पार्टी की सांसद और ब्रिटेन में विपक्ष की नेता प्रीति पटेल ने (अपनी सरकार से) कहा – बांग्लादेश में हिन्दुओं की रक्षा के लिए हस्तक्षेप किया जाए, सिंगल कॉलम की खबर है। ऐसे में प्रधानमंत्री की सोमनाथ यात्रा की खबर पहले पन्ने पर नहीं होने का मतलब है। देशबन्धु में पहले पन्ने पर दो कॉलम का एक शीर्षक है, राम जन्म भूमि क्षेत्र में नमाज पढ़ने क कोशिश। इसके साथ बताया गया है, हर पहलू से मामले की जांच कर रही हैं सुरक्षा एजेंसियां। अमर उजाला में पहले पन्ने पर इनमें से कोई खबर नहीं हैं। ना प्रीति पटेल वाली ना बांग्लादेश में हिन्दू की हत्या वाली और ना प्रधानमंत्री के सोमनाथ में ‘पूजा’ करने की। मुझे लगता है कि हेडलाइन मैनेजमेंट और मोदी है तो मुमकिन है – के इस दौर में आज इन खबरों का पहले पन्ने पर नहीं होना मायने रखता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि हेडलाइन मैनेजमेंट खत्म हो गया है। अगर ऐसा हुआ हो तो कुछ दिन बाद समझ में आएगा।
द टेलीग्राफ में ऐसी खबरें पहले भी पहले पन्ने पर नहीं होती हैं, नहीं हैं। इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर अंदर होने की सूचना पहले पन्ने पर है साथ ही पहले पन्ने पर अमूल का विज्ञापन है और प्राइड ऑफ इंडिया ने बतौर प्रचार सोमनाथ स्वाभिमान गर्व पर हाथ जोड़े हैं। द हिन्दू में खबर पहले पन्ने पर नहीं है और न अंदर होने की सूचना पहले पन्ने पर है। एक विदेशी खबर लीड है। शीर्षक है, अमेरिका की चेतावनी को नज़रअंदाज़ करते हुए, ईरान ने विरोध प्रदर्शनों पर शिकंजा कसा।टाइम्स ऑफ इंडिया में भी हिन्दुओं की तीनों खबरों में से कोई भी पहले पन्ने पर नहीं है। अधपन्ने की लीड का शीर्षक है, कोलकाता के छापों पर ममता के खिलाफ ईडी सुप्रीम कोर्ट जाएगा। कहा, बेकाबू भीड़ के कारण हाईकोर्ट में हमारी सुनवाई नहीं हुई। मुझे लगता है कि हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हुई, पुरानी खबर है और इस कारण सुप्रीम कोर्ट आना ईडी की मजबूरी है वरना ममता बनर्जी की एफआईआर पर कार्रवाई करते हुए बंगाल पुलिस ईडी के अफसरों को गिरफ्तार कर सकती है। ऐसे में खबर यह है कि ममता सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट अर्जी दायर की है। यह देशबन्धु की लीड का शीर्षक है और कहा जा सकता है कि मामले को समझने वाले जानते थे कि ऐसा होगा या इस खबर का इंतजार कर रहे थे। ऐसे में टाइम्स ऑफ इंडिया की आज की लीड अलग और खास है। शीर्षक के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अपराध करने से रोकने के लिए हिरासत अवधि को बढ़ाना सही नहीं हो सकता। अमित आनंद चौधरी की इस खबर का इंट्रो है, ‘दोबारा अपराध करने का डर ही एकमात्र कारण नहीं हो सकता है’। जाहिर है, किसी को लंबे समय तक हिरासत में रखने का कारण होना चाहिए और यह दोबारा अपराध करने का डर नहीं हो सकता है। पीएमएलए और यूएपीए की बात अलग है और उसके मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की चर्चा पहले कर चुका हूं। आज की खबर के अनुसार, अदालत ने इस मामले में साफ कहा है कि जमानत मिलने पर दोबारा अपराध करने की स्थिति से बेल रद्द करके निपटा जा सकता है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि गांजा बेचने वाली महिला के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट 1985 के तीन मामले जन व्यवस्था को खतरा नहीं साबित करते हैं। यह मामला रोशिनी देवी की अपील से जुड़ा है। रोशिनी देवी ने अपनी मां अरुणा बाई उर्फ अंगूरी बाई की निवारक हिरासत को चुनौती दी थी। अरुणा बाई को 10 मार्च 2025 को हैदराबाद के कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ने तेलंगाना प्रिवेंशन ऑफ डेंजरस एक्टिविटीज़ एक्ट, 1986 के तहत हिरासत में लिया था। प्रशासन का कहना था कि आरोपी एक “ड्रग ऑफेंडर” है और उसकी गतिविधियां जन स्वास्थ्य तथा सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं। तेलंगाना हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2025 में हिरासत आदेश को सही ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे नहीं माना।
हिन्दुस्तान टाइम्स में भी आज सोमनाथ मंदिर में प्रधानमंत्री की पूजा, बांग्लादेश में एक और हिन्दू की हत्या या प्रीति पटेल की अपील पहले पन्ने पर नहीं है। यहां लीड का शीर्षक है, छापों को लेकर ईडी बनाम बंगाल की लड़ाई सर्वोच्च अदालत पहुंची। पहले पन्ने की खबरों में इंदौर के जहरीले पानी वाले मोहल्ले में 27 नए लोगों के बीमार होने की खबर शामिल है। जाहिर है कि जहरीले पानी की खबर सार्वजनिक होने के बावजूद अभी भी लोग जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं। अगर वहां साफ पानी मुहैया करवा दिया गया होता तो उसकी खबर होती और ऐसी कोई खबर नहीं होने के कारण यह माना जा सकता है कि अभी तक सरकार प्रशासन या ट्रिपल इंजन ने कुछ नहीं किया है। फिर भी, सिंगल कॉलम की इस खबर का कोई भी यही मतलब निकालेगा और शायद इसलिए यह खबर नहीं है या छोटी है या सिंगल कॉलम में छपी है। अपने अखबार में आप इस खबर को ढूंढ़िये, देखिए और समझिए कि आपका अखबार कैसी खबरें पढ़वा रहा है और कैसा प्रचार कर रहा है। जहां तक कोलकाता में ईडी के छापे और उससे जुड़ी खबरों का मामला है, हिन्दुस्तान टाइम्स ने बताया है कि ईडी सीबीआई जांच की मांग कर रही है। यहां पिछले चुनाव से पहले संदेशखाली का मामला याद किया जा सकता है। इसके साथ चुनाव के बाद की हिंसा के मामलों की भी जांच सीबीआई कर रही थी। कलकत्ता के आरजी कार अस्पताल में डाक्टर से बलात्कार और हत्या के मामले की भी जांच सीबीआई से करवाई गई। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के समय संदेशखाली मामला खूब उछला था। भाजपा ने इसे “खराब कानून-व्यवस्था” का मुद्दा बनाकर टीएमसी यानी तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ इस्तेमाल किया था। टीएमसी ने इन आरोपों को राजनीतिक प्लॉट बताया था। कहने की जरूरत नहीं है कि संदेशखाली और पिछले चुनाव के समय राजनीतिक हिंसा के मामले अभी भी चल रहे हैं और आरजी कार अस्पताल मामले में सीबीआई को पुलिस से अलग कुछ विशेष नहीं मिला। इस तरह बंगाल पुलिस पर पक्षपात का आरोप साबित नहीं हुआ है। अब फिर ईडी मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की जा रही है। देखते रहिए। अमर उजाला की लीड मौसम की खबर है, कोहरे और शीत लहर की चपेट में उत्तर भारत पहाड़ों पर हिमपात, दिल्ली में 66 उड़ानें रद्द, दृश्यता कम होने से ट्रेनों की रफ्तार पर भी ब्रेक ….।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


