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आज के अखबार : प्रधानमंत्री प्रचार, घुसपैठ भूल नहीं रहे, प्रदूषण पीछा नहीं छोड़ रहा, चौकीदारी की याद नहीं

संजय कुमार सिंह

सोमवार, 19 जनवरी को हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड दिल्ली में प्रदूषण है। खबर के अनुसार एक्यूआई फिर 440 हो गया है और हवा का संकट ऐसा है कि दिल्ली जहरीले धुंध में नहाई नजर आ रही है। द हिन्दू की लीड 6957 करोड़ रुपए के काजीरंगा कॉरीडोर कार्य की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री ने चुनावी राज्य असम से दो अमृत भारत ट्रेन का भी उद्घाटन किया है। यही नहीं, 11 साल से ज्यादा समय से सरकार में होने के बावजूद कांग्रेस पर काजीरंगा नेशनल पार्क की उपेक्षा का आरोप लगाया है। यह 70 साल कुछ नहीं हुआ के प्रचार के बाद है और यह बताने की जरूरत नहीं है कि दस साल उनने खुद क्या किया या काजीरंगा की चिन्ता 2014 में ही क्यों नहीं की, अब क्यों कर रहे हैं। हालांकि, उन्हें इन सवालों की चिन्ता होती तो एसआईआर के बाद भी  घुसपैठियों का राग नहीं अलाप रहे होते। वैसे भी उनके लिए चुनावी प्रचार करने वालों की कमी नहीं है और संभव है सबका काम और विषय बंटा हुआ हो। इसका अंदाजा इससे भी होता है कि मेरे नौ अखबारों में नवोदय टाइम्स ने इलाहाबाद में संगम पर मौनी अमावस्या के दिन  4.52 करोड़ लोगों के स्नान की खबर और तस्वीर को जितनी प्रमुखता दी है उतनी ही प्रमुखता मोहन भागवात की खबर असल में उनके भाषण को दी है। हालांकि मौनी अमावस्या पर स्नान की खबर और भी अखबारों में है। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत भारतीय जनता पार्टी का पूरा प्रचार तंत्र चुनाव की घोषणा से पहले ही चुनाव वाले राज्यों के लिए चुनाव प्रचार में लग गया है।

सोशल मीडिया पर यह दावा देखिए।  इसमें कहा गया है, कल शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद बनारस गए और जिस अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को विपक्ष तोड़ा बता रहा था कि बुलडोजर से तोड़ दिया गया है उस प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। बगल में दिख रहे जिस मंदिर को भी विपक्ष तोड़ा बता रहा था  वह मंदिर सही सलामत है सभी मूर्तियां सही सलामत है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कई वीडियो बनाकर वायरल किए गए। एक अभियुक्त जो पकड़ा गया है उसने कहा कि उसे महाराष्ट्र चुनाव के वजह से अहिल्याबाई होल्कर की टूटी हुई प्रतिमा दिखाने के लिए वीडियो बनाने को कहा गया था क्योंकि अहिल्याबाई होल्कर मराठी  थी  तो विपक्ष की इच्छा थी कि इससे बीएमसी चुनाव में बीजेपी को नुकसान होगा। लेकिन सवाल यह है कि अभियुक्त पकड़े जाते तो ऐसा होता और अभियुक्तों को पकड़ना होता तो पीआईबी से फैक्ट चेक जैसा काम करवाने की जरूरत पड़ती? बात इतनी ही नहीं है। सवाल यह भी है कि पीआईबी को ऐसे काम करने की जरूरत क्यों हैं। किसलिए करवाया जा रहा है। फैक्ट चेक के तमाम काम तो आम लोग कर रहे हैं। उन्हें सहायता देने की बजाय परेशान किया जाता है और फैक्ट चेक के नाम पर लगभग फालतू काम करवाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र चुनाव के वजह से अहिल्याबाई होल्कर की टूटी हुई प्रतिमा की झूठी खबर से बीजेपी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश पर भाजपा इतनी लाचार है क्या या फिर यह किसी तरह का समझौता है? घुसपैठियों को छोड़ नहीं रहे हैं और लगातार प्रदूषण जैसी खबर छूट जा रही है, कम महत्व पा रही है। हालांकि, नवोदय टाइम्स में लंबी सी खबर है, सच है कि होल्कर की मूर्ति टूटी लेकिन अब जो बन रहा है घाट वह बड़ा व शानदार होगा। अलग-अलग अखबारों की इन खबरों से मूर्ति टूटने के बारे में आप क्या मानेंगे या मैं क्या मानूं।   

अहिल्याबाई होल्कर की टूटी हुई प्रतिमा से संबंधित इस पोस्ट पर याद आता है कि इतवार को  इंडियन एक्सप्रेस में छपा था और मैंने यहां लिखा था, वाराणसी के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, आलोक कुमार ने बताया कि नवीनीकरण के दौरान एक मूर्ति टूट गई थी। इसका पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए गए हैं। जिला मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार ने कहा कि असल में दीवारों पर बनी मूर्तियां क्षतिग्रस्त हुई थीं, और अन्य कलाकृतियों को संस्कृति विभाग द्वारा ‘सुरक्षित’ कर लिया गया है और बाद में उन्हें उनके मूल रूप में फिर से स्थापित किया जाएगा। खबर में लिखा था, लेकिन मैंने नहीं लिखा कि जांच यह तय करने के लिए होगी कि मूर्तियां किसकी हैं। मुझे इस पर यकीन नहीं हुआ और जांचने का कोई तरीका नहीं था इसलिए मैंने सिर्फ जांच की बात लिखी यह नहीं लिखा कि किसकी मूर्तियां हैं इसकी जांच होनी है। दूसरी ओर ऐसी सोशल मीडिया पोस्ट। ऐसा नहीं है कि भाजपा का प्रचार करने वाली ऐसी पोस्ट आराम से झेल ली जा रही हैं। सुप्रिया श्रीनेत ने लिखा है, यूपी में मणिकर्णिका घाट का वीडियो शेयर करने वालों पर एफआईआर हो रही है। एक एफआईआर आजतक (चैनल) पर भी की जाये, देखिए कैसे इन्होंने भी एआई का वीडियो चलाया। ना मूर्तियां खंडित हुईं, ना शिवलिंग टूटे। सब एआई है। यह आँखें जो देख रहीं हैं वो एआई है। …. ग़ज़ब बात करते हैं! यह सब तब हो रहा है जब प्रधानमंत्री ने कहा है और दि एशियन एज की लीड है, भाजपा अब भारत में हर किसी की पहली पसंद है। प्रधानमंत्री जिस ढंग से भाजपा का प्रचार करते हैं उसके लिए काम करते हैं, सरकारी पैसे लुटा रहे हैं उसमें ऐसा हो सकता है लेकिन तथ्य यह भी है कि वोट चोरी और चुनाव चोरी पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं है। हल्केपन का यह आलम है कि टीएमसी पर राष्ट्र की सुरक्षा से खेलने का आरोप लगा दिया – लेकिन ममता बनर्जी आरोप लगा रही हैं कि चुनावी जीत के लिए भाजपा की चुनावी रणनीति चोर करने की कोशिश हुई। इसके लिए ईडी का उपयोग हुआ है ईडी ने ममता की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है जबकि प्रधानमंत्री तृणमूल पर देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगा रहे हैं शायद कार्रवाई करने और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अक्षम हैं। द टेलीग्राफ में बलात्कार पीड़ित केरल की नन और मणिपुर की एक युवती की कहानी है। अखबार ने बताया है कि 3800 किलोमीटर दूर इन दो महिलाओं की कहानी और युद्ध अलग अलग है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा अपनी जगह है।

जब देसी खबरों को लेकर द्वंद हो तो विदेशी खबरों को लीड बनाना बहुत आसान रहता है। आज टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस ने यही किया है। हिन्दी अखबारों में देशबन्धु की लीड भी ट्रम्प है और पाठकों की पसंद के अनुसार विदेशी खबरों को प्रमुखता देना ठीक हो सकता है लेकिन देशी खबरों की कीमत पर नहीं। इंडियन एक्सप्रेस में चार कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, सिंगुर में प्रधानमंत्री ने ममता पर निशाना साधा : कानून व्यवस्था बहाल हो तो उद्योग आएंगे। यह सही हो सकता है कि ममता बनर्जी कानून व्यवस्था को ठीक नहीं होने दें, भाजपा को सत्ता मिले तो सब ठीक हो जाए लेकिन सब ठीक होने से उद्योग आएंगे या आते हैं उसके बारे में पहले से पता नहीं था या कल ही पता चला यह भी बताया जाना चाहिए। कहने की जरूरत नहीं है कि देश भर के तमाम राज्यों में भाजपा की सरकार है। वहां कितने आए पता नहीं। अखबारों की हालत अलग ही है। एक शीर्षक है, कांग्रेस ने पूछा – कब  तक सच्चाई से भागेगी मोदी सरकार कांग्रेस। नवोदय टाइम्स की इस खबर का इंट्रो है, वायु प्रदूषण पर विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देकर केंद्र से पूछे सवाल। खबर के अनुसार, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेशन ने कहा है कि हाल के वर्षों में स्वास्थ्य संकट गंभीर हुआ है। इस खबर को सभी अखबारों में प्रमुखता नहीं है। लेकिन बनारस में जो हो रहा है उसे पूरा प्रचार है। कैसा आप तय कीजिए। मुझे लगता है कि अखबारों का पक्षपात अब साफ दिखने लगा है और शर्मनाक है। लेकिन सरकार अपना काम कर रही होती तो सब ठीक था। दुख की बात यह है कि सरकार ईडी-सीबीआई का उपयोग अपनी निजी सेना और शाखा की तरह कर पा रही है और तृणमूल सरकार के खिलाफ भी कर रही है।

दूसरी ओर आतंकवाद खत्म करने के दावों, उससे लड़ने की बहादुरी, घुस कर मारने की घोषणा और ऑपरेशन सिन्दूर जैसे अभियान के बावजूद कश्मीर में आतंकवाद खत्म नहीं हो रहा है। 370 खत्म हो गया, राज्य केंद्र शासित प्रदेश बन गया और सोनम वांगचुक के जेल पहुंचने जैसा विकास हो गया है। आज अमर उजाला की लीड है, किश्तवाड़ में पाकिस्तानी आतंकियों से भीषण मुठभेड़… आठ जवान घायल, एक एय़रलिफ्ट। मुझे लगता है कि यह खबर पर्याप्त गंभीर है और ठीक ही है कि लीड लगी है। लेकिन मौसम और प्रदूषण की खबर भी तो जरूरी है। इसलिए इंडियन एक्सप्रेस की लीड का शीर्षक है, ट्रम्प ने मोदी को गाजा शांति समिति में शामिल होने के लिए न्योता दिया। यह खबर किसी और अखबार में लीड नहीं है और अमर उजाला में मोदी का यह प्रचार पहले पन्ने पर चार कॉलम में जरूरी है लेकिन लीड नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी जिसने योग्य और सक्षम हों, सच यही है कि आरटीआई कानून बेअसर होता जा रहा है। खबर है कि वकील अपने मुवक्किल के लिए आरटीआई का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। सीईसी ने कहा है कि इससे कानून के मुख्य उद्देश्य पूरे नहीं होते हैं। ऐसी ही सरकार देने के लिए भाजपा पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार कर रही है और उसके लिए जो कुछ कर रही है उसे अखबारों में पूरा प्रचार मिल रहा है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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