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सियासत

तब से ही पाकिस्तान, भारत के ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी की पुंगी बजा रहा है!

विश्व दीपक-

तीसरी दुनिया के चौथे दर्जे के देश भारत के सर्व शक्तिमान प्रधानमंत्री मोदी ने जब 2014 में पहली बार शपथ ली तो उन्होंने सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों को शपथ ग्रहण में शामिल होने के लिए दिल्ली आमंत्रित किया.

वैचारिक विरोध होने के बावजूद मुझे लगा था कि मोदी जी का यह प्रयास सराहनीय है. हालांकि आगे चलकर यह विशुद्ध लंतरानी साबित हुआ लेकिन तब इसे ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी कहा गया था.

मोदी समर्थकों ने इस पर लंबे-लंबे लेख लिखे. इसे गुटनिरपेक्षता सिद्धांत के बाद भारतीय विदेश नीति के सबसे अहम बदलाव के रूप में रेखांकित किया गया. विदेश नीति के जानकारों से लेकर डिफेंस एक्सपर्ट तक सबने इसकी सराहना की. टोल आर्मी ने चरस बो दिया.

कहा – मोदी जी ने नेहरू को भी पीछे धकेल दिया. भारत अब नेहरूयुगीन निरपेक्ष विदेश नीति की छाया से निकल चुका है अब भारत आगे बढ़कर अपना रास्ता तय करेगा.

ऐसा लगना स्वाभाविक भी था. टीवी से लेकर टी स्टॉल तक हर जगह मोदी ही मोदी दिख रहे थे. समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी शामिल हुए. मोदी जी ने झुककर उनसे हाथ मिलाया. ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने इस तस्वीर को छापा और कहा कि ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी भारत की महत्वाकांक्षा को दर्शाती है.

अब 10 साल के अंदर मोदी जी की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी का तेल निकल चुका है. पाकिस्तान आज भी आंतकवाद एक्सपोर्ट कर रहा है. बल्कि ज्यादा बोल्ड तरीके से कर रहा है. पाकिस्तान में अब नवाज शरीफ के भाई प्रधानमंत्री हैं लेकिन मोदी जी के पास कोई लेवरेज नहीं. याद कीजिए मोदी जी कैसे बिना बुलाये नवाज शरीफ के घर पहुंच गये थे.

तब से ही पाकिस्तान ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी की पुंगी बजा रहा है. इतना ही नहीं उसने अमरीका से अपने संबंध इतने बेहतर कर लिये कि मोदी जी की जुबान तक नहीं खुल रही इस मुद्दे पर.

26/11 हमले के बाद मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान को दुनिया के मंच पर बिना एक गोली चलाये अलग-थलग कर दिया था. पाकिस्तान मरणासन्न था. लेकिन अलग-थलग पड़े पाकिस्तान को मोदी जी ने पहले अपने घर बुलाकर फिर नवाज शरीफ के घर जाकर वैधता प्रदान की. यह ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी के साथ सबसे पहला और सबसे बड़ा खिलवाड़ था जिसे स्वयं मोदी जी ने खेला था. इसी के बाद पाकिस्तान ने कमबैक किया.

इसके बाद का किस्सा सबको पता है. श्रीलंका में अमरीका तख्ता पटल करवा चुका है. बांग्लादेश से शेख हसीना को भगा दिया गया. वहां भारत विरोधी ही नहीं बल्कि हिन्दू विरोधी युनुस सत्ता पर बैठा है. नेपाल में अमरीका की पिट्ठू सरकार काबिज है. मालदीव का मुइज्जु भारत विरोधी है. मौके के हिसाब से खेलता रहता है.

जानते हैं ऐसा क्यों हुआ? मोदी जी ने विदेश नीति को अपने लिये प्रचार नीति की तरह इस्तेमाल करना शुरु कर दिया. लेकिन भक्तों को फिर भी लगता है मोदी जी भारत का झंडा गाड़ रहे हैं. एस जयशंकर सबसे शानदार विदेश मंत्री हैं.

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