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आज के अखबार : राजनीति के लिए खेल को हथियार बनाने की कोशिश का मामला सिर्फ हिन्दुस्तान टाइम्स में

यह खबर टी20 वर्ल्ड कप के सिलसिले में या उससे पहले जो हो रहा है उससे पाकिस्तान की नाराजगी बताती है लेकिन प्रमुखता उस पर लग सकने वाले जुर्माने को दी गई है। खबर पढ़ते हुए इसका कारण जानने की इच्छा हुई और इस चक्कर में मैं पूरी खबर पढ़ गया। कारण यही रहा कि क्रिकेट में भले मेरी रुचि नहीं है लेकिन क्रिकेट के राजनीतिकरण से हतप्रभ हूं। साफ दिख रहा है कि भारत की राजनीति ने बांग्लादेश और पाकिस्तान की क्रिकेट टीमों को तो एक कर ही दिया है। पाकिस्तान टी20 का बायकाट करे या नहीं और नहीं करेगा तो आर्थिक कारणों से पर खेल भावना और खेल में राजनीति का क्या होगा उसपर मीडिया कब चर्चा करेगा? एसआईआर का तो मामला ही अलग है। आज अपने अखबारों को जानिए-समझिए।  

संजय कुमार सिंह

आज गणतंत्र दिवस है, चुनाव आयोग और एसआईआर से परेशान लोग देख रहे हैं कि सभी संवैधानिक संस्थाओं को गुलाम बनाया जा चुका है। कल मैंने यहां लिखा था कि सुप्रीम कोर्ट के जज ने सरकार के इशारे पर जजों के तबादले की आलोचना की तो खबर सिर्फ ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में लीड थी। दूसरे अखबारों में यह खबर पहले पन्ने पर भी नहीं थी। आज भी वही हाल है। राजनीति के लिए खेल को हथियार बनाने की कोशिश और उसकी रणनीति से जुड़ी एक खबर आज हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड है। वह भी भारतीय राजनीति और दृष्टि से बचाकर लिखी गई है और मूल बात यह है कि पाकिस्तान भी टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होने की सोच रहा है। निश्चित रूप से यह सब 10 साल के भाजपा राज का विकास है और खबर भी नहीं छपने जैसा नामुमिकन का मुमकिन होना है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता दिवस का विरोध किया है वह सिर्फ द टेलीग्राफ में पहले पन्ने पर है। छह विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि (असम में) एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी एतराज दाखिल किए गए हैं। यह खबर सिर्फ द हिन्दू में पहले पन्ने पर लीड है। खबर के अनुसार, एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी एतराज दाखिल किए गए हैं। आमतौर पर आज अखबारों के पहले पन्ने पर दो खबरें हैं। एक पद्म पुरस्कारों की और दूसरी राष्ट्रपति के संबोधिन की। तीसरी, प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ है जो दि एशियन एज में पहले पन्ने पर है। यह लीड या राष्ट्रपति के संबोधन के बराबर में तीन कॉलम में टॉप पर है। इन सबके बावजूद प्रधानमंत्री ने कहा है और दि एशियन एज ने पहले पन्ने पर छापा है, वोटर भाग्य विधाता है, मतदान नागरिकों का सबसे बड़ा अधिकार है

इसके अलावा, नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक, धर्मेंद्र, अच्युतानंदन को पद्म विभूषण है। यही खबर लगभग एक जैसे शीर्षक के साथ देशबन्धु और अमर उजाला की लीड है। अंग्रेजी अखबारों में ये दोनों या मन की बात मिलाकर तीनों खबरें लीड नहीं है और यह भी खास बात है। इंडियन एक्सप्रेस की लीड भारत-ईयू करार तैयार की खबर है। टाइम्स ऑफ इंडिया में कोई खबर लीड नहीं है। लीड की जगह तिरंगी रोशनी में नहाए इंडिया गेट की फोटो है और शीर्षक है, यूनाइटेड कलर्स ऑफ द  रिपबलिक। अखबार ने जिस खबर को सबसे ज्यादा महत्व दिया है वह है, मुसलमानों के उपक्रम मुस्लिम उपभोक्ताओं को लक्ष्य करते हैं। हालांकि यह खबर रुहा सदाब के बारे में है जो मुस्लिम समाज को शहरी जीवन, कार्य, निवेश, परिधान, विवाह के साथ धार्मिक व्यवहारों के बारे में बताती हैं और इसी में यह सूचना है कि यह सब सीखने वाला जानना चाहता है कि पूंजी बाजार में सूचीबद्ध कौन सी कंपनियां धार्मिक परीक्षण में पास करती हैं। यानी जहां शराब, जुआ तो नहीं ही हो, कर्ज भी सीमित हो।   

जाहिर है, गणतंत्र दिवस पर जो खबर सबसे ज्यादा प्रभावित या चिन्तित करने वाली है वह यह कि भारतीय राजनीति का असर खेल पर भी पड़ने लगा है। पाकिस्तान के साथ क्रिकेट पर तो होता रहा है। हाल में बांग्लादेश के एक खिलाड़ी के साथ हुआ। नतीजे में बांग्लादेश ने भारत में खेलने से इनकार कर दिया और कल इसकी खबर ऐसे छपी थी जैसे भारत के साथ खेलने से इनकार करने पर बांग्लादेश को टी20 से बाहर कर दिया गया। इसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किए जाने की संभावना बन रही थी। आज हिन्दुस्तान टाइम्स में जानकारों के हवाले से एक खबर है जो बताती है कि पाकिस्तान ने अगर टी20 वर्ल्ड कप का बायकाट करने की सोची तो उसे भारी जुर्माना देना होगा। इस खबर का मतलब चाहे जो हो, सूचना यह है कि पाकिस्तान भी टी20 वर्ल्ड कप बायकाट करने की सोच रहा है या सोच सकता है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने इसी अनाम लेकिन जानकार अधिकारी के हवाले से लिखा है, एक बॉयकॉट “जो पूरी तरह से सरकार की सलाह पर किया गया हो”, जिससे पाकिस्तान की टीम को कोई सीधा नुकसान न हो, उसे आईसीसी “खेल को राजनीति के लिए हथियार बनाने” की कोशिश के तौर पर देख सकता है। संभव है कि इससे  “आईसीसी बोर्ड में पीसीबी अलग-थलग पड़ जाएगा, दूसरी टीमों के साथ पाकिस्तान का द्विपक्षीय कैलेंडर बाधित होगा और पाकिस्तान सुपर लीग में विदेशी खिलाड़ियों की भागीदारी पर असर पड़ेगा। यह पाकिस्तान के लड़ने की लड़ाई नहीं है। किसी भी सरकार को ऐसे फैसले से क्या दिक्कत हो सकती है जो उनकी नेशनल टीम से जुड़ा न हो और परिणाम भुगतने पड़ें?”

खबर के अनुसार, यह घटनाक्रम शनिवार को पाकिस्तान के उस संकेत के बाद हुआ कि वह 7 फरवरी से शुरू होने वाले टूर्नामेंट से अलग हो सकता है। यही वह समय था जब आईसीसी ने कथित सुरक्षा कारणों से बांग्लादेश की टीम के भारत जाने से इनकार करने पर बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के चेयरमैन और पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने शनिवार को कहा कि अगर इस्लामाबाद उन्हें टूर्नामेंट में हिस्सा न लेने का निर्देश देता है तो आईसीसी को “22वीं टीम ढूंढनी होगी”। उन्होंने रविवार को अपने इस रुख को दोहराया, जब पाकिस्तान ने टी20 आईसीसी-पाकिस्तान वर्ल्ड कप के लिए अपनी टीम की घोषणा की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि टीम की घोषणा से उनकी भागीदारी की पुष्टि नहीं होती है। “हम सरकार की सलाह का इंतजार कर रहे हैं और वह हमें जो भी करने का निर्देश देगी, हम उसका पालन करेंगे। अगर वह तय करती है कि हमें वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं लेना चाहिए, तो हम उसका पालन करेंगे,” समाचार एजेंसी पीटीआई ने उनके हवाले से कहा है। पीटीआई के अनुसार, एक बयान में पीसीबी ने कहा है कि खिलाड़ियों ने बांग्लादेश का समर्थन करने के बोर्ड के रुख का समर्थन किया है।

आप जानते हैं कि क्रिकेट जगत इन दिनों बांग्लादेश के तेज़ गेंदबाज़ मुस्ताफिजुर रहमान के इकलौते विवाद के कारण बहस का केन्द्र बना हुआ है। कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) ने आईपीएल 2026 के लिए मिनी ऑक्शन (नीलामी) में मुस्ताफिजुर को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था लेकिन बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंटोल बोर्ड) के निर्देश पर फ्रैंचाइज़ी ने उन्हें टीम से रिलीज़ कर दिया। बीसीसीआई ने बताया कि यह निर्णय “हाल ही की परिस्थितियों” को देखते हुए लिया गया था और केकेआई को एक वैकल्पिक खिलाड़ी चुनने की अनुमति दी गई है। इस आदेश और फैसले के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक तथा खेल संबंधों में उथल-पुथल बढ़ गई। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) और सरकार ने आईपीएल प्रसारण पर रोक लगा दी और कहा कि वे टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए स्थिति स्पष्ट नहीं होने तक भारत यात्रा नहीं करेंगे। इस तनाव की परिणति तब हुई जब आईसीसी ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बांग्लादेश को हटाकर स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया। बांग्लादेश की इस हटाई गई टीम का नेतृत्व लिटन दास करते हैं और बोर्ड के निर्णय से दक्षिण एशियाई क्रिकेट में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मुझे लगता है कि बांग्लादेश के तेज़ गेंदबाज़ मुस्ताफिजुर रहमान को शाहरुख खान के नेतृत्व वाले कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) में शामिल किए जाने का विरोध अगर नागरिकता के आधार पर होता तो स्थिति ऐसी नहीं होती और धर्म के आधार पर हो रहा था तो उसे रोका जाना चाहिए था। रोका गया होता तो भी स्थिति कुछ और होती, भारत की स्थिति तो बेहतर होती ही। लेकिन आईपीएल एक फ्रैंचाइज़ी लीग है, न कि राष्ट्रीय टीम। इसमें विदेशी खिलाड़ी खेलते आए हैं—ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, अफ़ग़ानिस्तान, दक्षिण अफ़्रीका से लेकर बांग्लादेश तक। इसलिए अगर मुस्ताफिजुर रहमान का विरोध न तो बांग्लादेशी नागरिकता के आधार पर होना चाहिए था न धर्म के आधार पर। वह टीम का निर्णय था और खेल में यह सब मायने नहीं रखता है। फिर भी विरोध हुआ और विरोध को शुरुआत में ही स्पष्ट रूप से रोका जाना चाहिए था। अगर संस्थाएँ यह साफ़ संदेश देतीं कि धर्म किसी भी खेल निर्णय का आधार नहीं हो सकता, तो विवाद इतना नहीं बढ़ता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की नैतिक स्थिति कहीं अधिक मज़बूत होती। यह सब नहीं हुआ इसलिए, धर्म, राजनीति और कूटनीति सब एक-दूसरे में घुल मिल गए हैं। अब हेडलाइन मैनेजमेंट चल रहा है। खेल से संबंधित एक मामूली निर्णय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की राजनीति चल रही है और दूसरे मुद्दे गौण हो गए हैं।

मतदाता दिवस की खबर सिर्फ टेलीग्राफ में

हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ कोलकाता के द टेलीग्राफ की लीड भी अलग है। गणतंत्र दिवस पर कुछ रूटीन खबरें होती हैं, हमेशा से होती आई हैं। ऐसे में टेलीग्राफ की लीड या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जो कहा है वह अपने आप में महत्वपूर्ण है। एसआईआर के समय मतदाता दिवस के खास मायने हैं। ममता बनर्जी ने जो कहा उससे भारतीय राजनीति की दशा-दिशा भी मालूम होती है। दिल्ली के अखबारों ने इसे पहले पन्ने वाला महत्व नहीं दिया यह भी गौरतलब है। कोलकाता डेटलाइन से मेघदीप भट्टाचार्य की खबर का फ्लैग शीर्षक है, ममता बनर्जी ने कहा, चुनाव आयोग (लोगों के) चुनावी अधिकार छीन रहा है। मुख्य शीर्षक है,  मुख्य मंत्री ने मतदाता दिवस को ‘दुखद मज़ाक’ बताया। खबर इस प्रकार है, ममता बनर्जी ने कहा कि यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब आयोग भाजपा के इशारे पर एसआईआर के ज़रिए लोगों के वोटिंग अधिकार छीन रहा है। मुख्यमंत्री ने एक्स पर लिखा है, “भारत का चुनाव आयोग आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस मना रहा है और यह कितना दुखद मज़ाक है!” बिहार से लेकर बंगाल तक चुनावी राज्यों में एसआईआर की जल्दबाजी और घटिया तरीके से किए गए काम की कड़ी आलोचक, ममता बनर्जी ने कहा – “आयोग अपने आका की आवाज़ बनकर काम कर रहा है, अब लोगों के वोटिंग अधिकार छीनने में व्यस्त है और उनमें मतदाता दिवस मनाने का हौसला भी है! मैं आज उनके इस बर्ताव से बहुत दुखी और परेशान हूँ।” उन्होंने आगे लिखा है, “माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करने और नियमों के अनुसार काम करने तथा लोगों को वोट देने और उनके लोकतांत्रिक व वोटिंग अधिकारों की रक्षा करने के बजाय, ईसीआई तार्किक विसंगति के नाम पर लोगों को परेशान करने और उन्हें उनके चुनावी अधिकारों से वंचित करने तथा छीनने के लिए नए-नए बहाने ढूंढ रहा है! “भाजपा जो उनकी नियंता हैं उसकी ओर से वे विपक्ष को बुलडोज़ करने और भारतीय लोकतंत्र की नींव को नष्ट करने में व्यस्त हैं, फिर भी उनमें मतदाता दिवस मनाने का साहस है!”

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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