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यूट्यूब पॉलिटिकल कमेंट्री में 4PM सबसे बड़ी डिजिटल ताकत बना!

यूट्यूब पर राजनीतिक विमर्श के मैदान में डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म 4PM ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित की है। दिसंबर 2025 में अपलोड किए गए राजनीतिक वीडियो के व्यूज़ के आधार पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 4PM 141.3 मिलियन व्यूज़ के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि उसका व्यू शेयर 10 प्रतिशत दर्ज किया गया।

यह आंकड़े DataBeings द्वारा जारी किए गए हैं, जिसमें मेनस्ट्रीम टीवी चैनलों को छोड़कर केवल डिजिटल और यूट्यूब-नेटिव प्लेटफॉर्म्स को शामिल किया गया है।

मेन चैनलों को पछाड़कर टॉप पर 4PM

इस सूची में DB Live (90 मिलियन) दूसरे और Ulta Chasma (86.2 मिलियन) तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद The Jaipur Dialogues (82.2M) और Dhruv Rathee (80.1M) जैसे बड़े डिजिटल नाम शामिल हैं।

लेकिन सबसे अहम बात यह है कि 4PM न सिर्फ टॉप पर है, बल्कि दूसरे नंबर के चैनल से करीब 50 मिलियन व्यूज़ आगे है, जो इसकी डिजिटल पकड़ और ऑडियंस एंगेजमेंट को साफ दर्शाता है।

मेनस्ट्रीम से बाहर, लेकिन सबसे आगे

दिलचस्प यह है कि इस रैंकिंग में पारंपरिक टीवी न्यूज ब्रांड्स या बड़े मीडिया हाउस के यूट्यूब चैनल कहीं नज़र नहीं आते। इसके उलट, 4PM, DB Live, Ulta Chasma, Jaipur Dialogues और Dhruv Rathee जैसे प्लेटफॉर्म पूरी तरह डिजिटल और इंडिपेंडेंट मॉडल पर काम कर रहे हैं।

यह ट्रेंड इस बात का संकेत है कि राजनीतिक कंटेंट के लिए दर्शक अब टीवी स्टूडियो से ज्यादा यूट्यूब स्टूडियो पर भरोसा कर रहे हैं।

व्यू शेयर में भी 4PM सबसे आगे

जहां 4PM का व्यू शेयर 10% है, वहीं DB Live का 7%, Ulta Chasma और Jaipur Dialogues का 6-6% है। यानी हर 10 में से 1 व्यू अकेले 4PM के खाते में जा रहा है।

क्या कहता है यह ट्रेंड?

  1. मीडिया विश्लेषकों के मुताबिक यह आंकड़े तीन बड़े बदलावों की ओर इशारा करते हैं:
  2. टीवी से डिजिटल शिफ्ट – राजनीतिक विमर्श अब मोबाइल स्क्रीन पर शिफ्ट हो चुका है।
  3. एंकर-सेंट्रिक मॉडल – दर्शक संस्थान से ज्यादा चेहरे और तेवर को फॉलो कर रहे हैं।

अनफिल्टर्ड कंटेंट की मांग – लंबी बहस, सीधे सवाल और सत्ता से टकराव वाला कंटेंट ज्यादा देखा जा रहा है।

4PM क्यों आगे?

  • 4PM की सफलता के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं:
  • आक्रामक और ग्राउंड रिपोर्टिंग
  • सत्ता, सिस्टम और संस्थानों पर लगातार सवाल
  • सोशल मीडिया के मुताबिक तेज़, शॉर्ट और शेयरएबल फॉर्मेट

डिजिटल मीडिया के दौर में यह आंकड़े साफ बताते हैं कि अब “ब्रांड” नहीं, “बोल्डनेस” बिक रही है — और इस रेस में फिलहाल 4PM सबसे आगे है।

दिसंबर 2025 के व्यू डेटा ने यह स्थापित कर दिया है कि यूट्यूब की राजनीतिक पत्रकारिता में 4PM सिर्फ चैनल नहीं, एक ट्रेंड बन चुका है।


पिछला महीना आसान नहीं था. चुनौतियाँ थीं, दबाव था, और साज़िशें भी थीं.
सरकार के इशारे पर यूट्यूब से हमारे कई वीडियो हटवाए गए. अलग–अलग जगहों से नोटिस भेजे गए. चैनल की रीच कम करने की पूरी कोशिश की गई.
मकसद साफ़ था – 4 PM को डराना, झुकाना, चुप कराना. लेकिन नतीजा क्या निकला?
इन तमाम कोशिशों के बावजूद 4PM इस महीने भी देश में नंबर वन रैंकिंग पर है. और ये कोई एक महीने की कहानी नहीं है.
दो साल से भी ज़्यादा समय से 4 PM लगातार नंबर वन बना हुआ है.
ये उन तमाम साज़िशकर्ताओं के मुंह पर ज़ोरदार तमाचा है,जो ये सोच बैठे थे कि सत्ता के दम पर मुझे डरा लेंगे.
जिसके साथ देश के आम लोगों का भरोसा जुड़ा हो, जिसके सिर पर ईश्वर का हाथ हो, उसे कोई डरा नहीं सकता.
आपका प्यार, आपका विश्वास, आपकी दुआएँ ही मेरी असली ताक़त हैं. यही मुझे हर हमले के बाद और मज़बूत बनाती हैं.
इसे बनाए रखिएगा. क्योंकि ये लड़ाई सिर्फ़ मेरी नहीं है. ये सच की आवाज़ को ज़िंदा रखने की लड़ाई है.

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