नई दिल्ली। न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) ने Zee News पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई मार्च 2025 में प्रसारित एक खबर “ट्रक पर नमाज… जम्मू में नया बवाल शुरू!” को लेकर की गई है, जिसमें एक वायरल वीडियो के आधार पर यह दावा किया गया था कि जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर एक मुस्लिम ट्रक ड्राइवर के नमाज़ पढ़ने से ट्रैफिक जाम लग गया।
NBDSA ने इस प्रसारण को असत्यापित और भ्रामक करार देते हुए कहा कि चैनल ने बिना तथ्य जांचे सोशल मीडिया कंटेंट को सच की तरह पेश किया, जो प्रसारण आचार संहिता में निहित “Accuracy” (सटीकता) के सिद्धांत का उल्लंघन है।
यह आदेश 17 फरवरी 2026 को NBDSA के चेयरमैन जस्टिस ए.के. सीकरी (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में पारित किया गया। शिकायतें इंद्रजीत घोरपड़े, उत्कर्ष मिश्रा और सैयद काब राशिदी द्वारा दायर की गई थीं।
क्या था पूरा मामला?
शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि ज़ी न्यूज़ ने एक वायरल वीडियो दिखाकर यह दावा किया कि एक ट्रक ड्राइवर ने बीच सड़क पर ट्रक रोककर नमाज़ पढ़ी, जिससे भारी जाम लग गया। जबकि फैक्ट चेक और ट्रैफिक एडवाइजरी में सामने आया कि उस वक्त हाईवे पहले से ही खराब मौसम और भूस्खलन के कारण बंद था।
NBDSA ने माना कि इस खबर ने सामान्य ट्रैफिक समस्या को सांप्रदायिक रंग दिया और बिना पुष्टि के सोशल मीडिया वीडियो को सच्चाई की तरह पेश कर दिया।
ज़ी न्यूज़ की सफाई
ज़ी न्यूज़ ने अपनी दलील में कहा कि उसने प्रसारण के दौरान यह बताया था कि वीडियो वायरल और अप्रमाणित है। चैनल ने यह भी कहा कि बाद में वीडियो को फर्जी पाए जाने पर हटा दिया गया।
हालांकि NBDSA ने कहा कि-
“सिर्फ यह कह देना कि वीडियो सोशल मीडिया से लिया गया है और अप्रमाणित है, चैनल को उसकी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता।”
NBDSA की नई गाइडलाइंस: सोशल मीडिया कंटेंट पर सख्ती
इस मामले के साथ ही NBDSA ने सभी मीडिया संस्थानों के लिए नई और सख्त गाइडलाइंस भी जारी की हैं:
- अनिवार्य सत्यापन
सोशल मीडिया से ली गई किसी भी तस्वीर, वीडियो या जानकारी को प्रसारित करने से पहले फैक्ट वेरिफिकेशन जरूरी होगा।
- भरोसेमंद स्रोतों से पुष्टि
मैदान से रिपोर्टिंग, प्रत्यक्षदर्शी, पुलिस या सरकारी स्रोतों से क्रॉस चेक अनिवार्य।
- एआई और छेड़छाड़ की जांच
यह देखना जरूरी होगा कि वीडियो/तस्वीर AI से बनी, एडिटेड या डीपफेक तो नहीं है।
- संदर्भ से बाहर पेश करने पर रोक
किसी भी असली कंटेंट को गलत संदर्भ में दिखाना मना।
- संवेदनशील मामलों में विशेष सतर्कता
सेना, युद्ध, दंगे, सांप्रदायिक हिंसा, अपराध जैसे मामलों में सोशल मीडिया कंटेंट पर अत्यधिक जांच जरूरी।
- डिस्क्लेमर काफी नहीं
सिर्फ यह कहना कि “वीडियो वायरल है” या “पुष्टि नहीं हुई” – कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी से नहीं बचाएगा।
NBDSA की कड़ी टिप्पणी
NBDSA ने कहा कि इस मामले में वह और भारी जुर्माना भी लगा सकता था, लेकिन वीडियो हटाए जाने को देखते हुए फिलहाल ₹1 लाख का दंड लगाया गया।
साथ ही निर्देश दिया गया कि:
- यह आदेश NBDA की वेबसाइट पर डाला जाए
- वार्षिक रिपोर्ट में शामिल किया जाए
- सभी संपादकों और मीडिया संस्थानों को सर्कुलेट किया जाए
आदेश पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- जी न्यूज जुर्माना


