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सियासत

नितिन गडकरी की कंपनी और गो मांस का व्यापार?

शीतल पी सिंह-

कारवां पत्रिका ने एक बड़ा खुलासा किया है कि भाजपा के पूर्व अध्यक्ष, मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री और संघ के स्वयंसेवक नितिन गडकरी की पारिवारिक कंपनी एक गोमांस एक्सपोर्टर कंपनी जुड़ी हुई है!

जी हां! बीफ की आड़ में भैंस नहीं, गोमांस का व्यापार करने वाली कंपनी से नितिन गडकरी की कंपनी के जुड़े होने का खुलासा कारवां पत्रिका ने किया है, जबकि महाराष्ट्र में गो मांस प्रतिबंधित है!

पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार रेम्बल एग्रो एंड फूड्स नामक कंपनी का एक ट्रक पकड़ाया, जिसमें बीफ था। कंपनी ने दावा किया कि यह गाय नहीं, भैंस का मांस है, परंतु मजिस्ट्रेट को शक हुआ, क्योंकि ट्रक मांस तो हैदराबाद से मुंबई ला रहा था और उसमें गो मांस को भैंस का मांस बताने वाला स्वास्थ्य प्रमाण पत्र का फर्जी सर्टिफिकेट अलीगढ़ उप्र के पशु चिकित्सक का लगा हुआ था! हैदराबाद के पशुपालन अधिकारी की अनुमति का सर्टिफिकेट भी कंपनी के पास नहीं था।

न्यायधीश ने यह पाया कि कंपनी कोई ऐसा प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर सकी जो यह साबित कर सके कि मांस गाय का नहीं, भैंस का है!

पत्रिका ने अपनी जांच में पाया कि मांस व्यापार करने वाले रेंबल (अब वेनाड फूड) का सियान एग्रो एंड इंफ्रास्ट्रक्चर से गहरा संबंध है, जो गडकरी की कंपनी है। रिपोर्ट के अनुसार, सियान एग्रो के प्रबंध निदेशक नितिन गडकरी के पुत्र निखिल गडकरी हैं।

पत्रकार कौशल श्राफ की इस रिपोर्ट के अनुसार, रेंबल के अधिकांश शेयरधारकों और निदेशकों को गडकरी परिवार के स्वामित्व वाली या उनके द्वारा समर्थित कंपनियों द्वारा फंड किया जाता है। इसके बदले में गो मांस के व्यापार से जुड़ी कंपनी के पूर्व और वर्तमान शेयर धारकों ने गडकरी की कंपनी सियान एग्रो में निवेश किया है। यही नहीं, गो मांस व्यापार कंपनी रेंबल को सहकारी बैंक से बड़े लोन पास हुए हैं और उस बैंक की अध्यक्ष नितिन गडकरी की पत्नी कंचन गडकरी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, गो मांस व्यापार कंपनी रेंबल के प्रबंध निदेशक महेश कुमार बालकृष्ण पिल्लई पहले गडकरी की स्वामित्व वाली कंपनी सियान कैपिटल के निदेशक थे।

रिपोर्ट कहती है, गडकरी के स्वामित्व वाली कंपनी जिस रेंबल को माल बेचती है उसके और एक अन्य कंपनी मिथर इंटरनेशनल (शारजाह की एक कंपनी जो रेंबल के गो मांस को खरीदती है) के प्रबंध निदेशक बालकृष्ण पिल्लई ही हैं! इसके प्रवर्तन निदेशक को भी गडकरी की कंपनी से 2 करोड़ का लोन मिला है।

यह बेहद विस्तृत रिपोर्ट है, जिसमें अभी और भी चौंकने वाले खुलासे हैं। यह कल ही 1 मार्च 2026 को कारवां पत्रिका में छपी है और इस रिपोर्ट को अभी तक गडकरी या उनकी कंपनी ने खारिज नहीं किया है।

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