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सियासत

एपस्टीन फाइल्स, अडानी केस और शेल कंपनियों में भरा हुआ माल… महीन नस दबी है जिसने जबान लकवाग्रस्त कर दिया!

अमेरिका ने भारत को रूस से तेल ख़रीदने के लिए 30 दिनों की रियायत दी!

भारतीय मीडिया कह रहा है कि अमेरिका ने भारत को राहत देते हुए रूस से 30 दिन तक तेल ख़रीदने की इजाज़त दे दी है।

क्या इन्हें शर्म नहीं आती? क्या भारत आज़ाद देश नहीं बल्कि अमेरिका की कॉलोनी है? क्या अमेरिका तय करेगा कि हम किससे, कितना और कब तक तेल ख़रीद सकते हैं?

क्या यही है विश्वगुरु होना? क्या इन्हें शर्म नहीं आती?

-सुमित चौहान


मोदीजी ने गजब हाल कर दिया है भारत का। अमेरिका अपने इशारों पर नचा रहा है। हम भारतीय नाच रहे हैं। लेकिन इन सबके पीछे वजह क्या है। क्या भारत के प्रधानमंत्री की कोई कमजोर नस दबा ली है अमेरिका व इज़राइल ने। बहरहाल, जो भी हो लेकिन इस खबर के बाद भारतीय आवाम नाराज है। पढ़िए कुछ प्रतिक्रियाएं…


अरविंद केजरीवाल-

भारत को रशिया से तेल ख़रीदने की इज़ाज़त देने वाला अमेरिका कौन होता है? भारत को अमेरिका से इज़ाज़त की क्यो ज़रूरत है?

पिछले कुछ महीनों में देशवासियों ने बहुत पीड़ा के साथ देखा है कि किस तरह एक के बाद एक, हर कदम पर आप ट्रम्प के सामने झुक गए और आपकी उसके सामने बोलने तक की हिम्मत नहीं हुई।

मोदी जी, आख़िर आपकी ऐसी कौन सी मजबूरी है जिस की वजह से आप ट्रंप के सामने नतमस्तक हैं।

भारत हज़ारों वर्ष पुराना देश है। भारत 140 करोड़ लोगों का एक महान देश है। भारत ने एक से बढ़कर एक वीर योद्धा पैदा किये हैं। आज तक भारत ने किसी भी देश के सामने इस तरह सर नहीं झुकाया। आज तक भारतीय इतिहास में कभी भी भारत का नेतृत्व इतना कमजोर नहीं रहा।

अगर आपकी वाकई कोई ऐसी मजबूरी है जिसका फ़ायदा ट्रम्प उठा रहा है, तो भारत और भारतीय हितों की ख़ातिर, कृपया इस्तीफ़ा दे दीजिए। पर ऐसे भारत माँ का सर मत झुकाइए। सभी देशवासियों को बेहद पीड़ा हो रही है।


कृष्ण कांत-

जब रूस ने पहले ही कह दिया था कि हम भारत को तेल देने के लिए तैयार हैं तो भारत ने बयान क्यों नहीं दिया कि हम रूस से तेल खरीदेंगे?

अमेरिका ने क्यों ​कहा कि हम भारत को एक महीने तक रूस से तेल लेने की इजाजत देते हैं?

अब जब उसने ऐसा बोला है तो आप यह कहने की हिम्मत क्यों नहीं कर पा रहे हैं कि भारत किसी से निर्देश या इजाजत नहीं लेता?

नहीं बोल सकते। एपस्टीन फाइल्स, अडानी केस और शेल कंपनियों में भरा हुआ माल… जाने कौन सी महीन नस दबी है जिसने जबान को लकवाग्रस्त कर दिया है।

ट्रंप बोलेगा खड़े रहो तो खड़े रहेंगे, ट्रंप बोलेगा बैठ जाओ तो ​बैठ जाएंगे।

ट्रंप ने कहा- ईरान से तेल खरीदना बंद कर दो। बंद कर दिया।

ट्रंप ने कहा- रूस से तेल खरीदना बंद कर दो। बंद कर दिया।

ट्रंप ने कहा- वेनेजुएला से और अमेरिका से तेल खरीदो ताकि हमें फायदा हो। बोले, जी हुजूर!

अब ट्रंप ने कहा- हम भारत को एक महीने के लिए रूस से तेल खरीदने की इजाजत दे रहे हैं। बोले, जी हुजूर!

साथ ही, ट्रंप ने कहा- मुझे उम्मीद है कि भारत अमेरिका से तेल की खरीद बढ़ाएगा। बोले, जी हुजूर!

ऐसी कौन सी मजबूरी है कि मिस्टर सरेंडर ने भारत को अमेरिका का गुलाम बना डाला?


अमेरिका भारत से कह रहा है कि हम भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए एक महीने की “इजाजत” दे रहे हैं।

इजाजत? सच में? सबसे पहले तो तुम होते कौन हो इजाजत देने वाले? हम एक संप्रभु (स्वतंत्र) राष्ट्र हैं। हमें क्या करना है, कब करना है और कहाँ से करना है यह फैसला हम खुद करते हैं।

और अगर मोदी सरकार एक बार भी पलटकर अमेरिका से यह नहीं पूछ रही है कि “Who the hell are you to decide ?” तो इसका मतलब है कि मोदी सरकार हमें गुलामी की राह पर धकेल चुकी है।

-डॉ कंचना यादव



दीपेंद्र सिंह हुड्डा-

अमेरिका कौन होता है यह कहने के लिए कि हम भारत को सिर्फ एक महीने रूस से तेल ख़रीदने की छूट दे रहे है? इस तरह की भाषा उन देशों के लिए कही जाती है जिनपर sanctions लगाये गए हो। अमरीका की क्यो ग़ुलामी करें हम? ये तो बिल्कुल भी स्वीकारीय नहीं है।


उमाशंकर सिंह-

अमेरिका ने भारत को रूस से तेल ख़रीदने के लिए 30 दिनों की रियायत दी

“ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई जारी रखने के लिए, ट्रेजरी डिपार्टमेंट भारतीय रिफाइनर को रूसी तेल खरीदने की इजाज़त देने के लिए 30 दिन की टेम्पररी छूट दे रहा है। यह जानबूझकर किया गया शॉर्ट-टर्म तरीका रूसी सरकार को कोई खास फाइनेंशियल फायदा नहीं देगा क्योंकि यह सिर्फ़ उन ट्रांज़ैक्शन को मंज़ूरी देता है जिनमें समुद्र में पहले से फंसे तेल से जुड़े लेन-देन शामिल हैं।”


आत्मसम्मान और गर्व की बात तब अच्छी लगती है जब हक की आवाज़ बनकर बोली जाए। एक मुल्क आपको ‘इजाज़त’ दे रहा है तेल ख़रीदने का, और हम इस बेवक़ूफ़ी पर चुप हैं? थोड़ा फ़िल्मी बात है लेकिन – ‘तेरा ख़ून कब खौलेगा फैजल?’ -संकेत उपाध्याय


संजय शर्मा-

अमेरिका ने भारत को एक महीने के लिए रूस से तेल खरीदने की अनुमति दी. सवाल ये है कि अमेरिका होता कौन है भारत को अनुमति देने वाला.

क्या भारत अब अपनी विदेश नीति और ऊर्जा नीति भी वॉशिंगटन से पूछकर तय करेगा! जिस देश को दुनिया की उभरती हुई महाशक्ति बताया जाता है, उसे आज तेल खरीदने के लिए भी इजाज़त लेनी पड़ रही है.

सरकार को बताना चाहिए कि ये आत्मनिर्भर भारत है या अनुमति पर चलने वाला भारत. देश की साख और स्वाभिमान को इस तरह दांव पर लगाना बेहद शर्मनाक है.

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