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सुख-दुख

पूर्व सूचना आयुक्त और लंबे समय तक BBC की आवाज रहे नारायण बारेठ जी का निधन!

वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व सूचना आयुक्त नारायण बारेठ जी का निधन हो जाने की खबर सामने आई है। वे कई दिनों से निमोनिया से पीड़ित चल रहे थे। ​नारायण जी ने बीबीसी (BBC) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता कर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई थी।


राजेश प्रियदर्शी-

लंबे समय तक जयपुर से बीबीसी की आवाज़ रहे नारायण बारेठ का असमय चले जाना अत्यंत दुखद है. एक बेहतरीन इंसान, सजग और संवेदनशील पत्रकार हमने खो दिया है. जिसने भी उन्हें जाना उनकी सादगी और ईमानदारी से प्रभावित हुआ. शब्दों से रेडियो पर तस्वीरें खींचने और संवेदनशील मुद्दों पर लिखने में वे बेजोड़ थे. कुछ समय से बीमार चल रहे थे. यह तस्वीर पिछले साल मार्च महीने की ही है, तब वे बिल्कुल स्वस्थ थे, यकीन नहीं हो रहा कि वह आख़िरी मुलाक़ात थी.

वरिष्ठ पत्रकार राजेश प्रियदर्शी के साथ नारायण बारेठ जी

दुर्ग सिंह राजपुरोहित-

बाड़मेर और बॉर्डर से विशेष स्नेह रखने वाले राजस्थान की पत्रकारिता के सशक्त हस्ताक्षर नारायण बारेठ जी अब हमारे बीच नहीं रहे। रेडियो पर बीबीसी की आवाज़ में उन्हें वर्षों तक सुनता रहा। फिर एक समय ऐसा आया जब वे सामने थे और समझ नहीं आया कि बात कहाँ से शुरू करूँ।

मुझे याद है, एक दिन शंकरलाल गोली जी का फोन आया, वर्ष था शायद 2006।

“कहाँ हो?” मैंने कहा, “सर, कलेक्ट्रेट में हूँ।” बोले, “जल्दी सुभाष चौक आओ, टैक्सी वाले का काम पड़ गया है, अपनी बाइक से मुझे ले जाओ।”

मैं पहुँचा तो गोली जी मुस्कुराते हुए बोले , “बीबीसी वाले नारायण बारेठ आए हैं, चलो मिलने चलते हैं।”

उस दिन से शुरू हुई मुलाक़ातों की वह श्रृंखला, जो आगे कई बार जारी रही। उनसे मिलना और फिर बाद में उनकी आवाज़ को रेडियो पर सुनना, हमेशा एक अलग ही संतोष देता था।

दुःखद समाचार है कि जाने-माने पत्रकार नारायण बारेठ जी का जयपुर में निधन हो गया। वे 68 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से एपेक्स अस्पताल, जयपुर में उपचाराधीन थे।

उन्होंने BBC के राजस्थान संवाददाता के रूप में लंबे समय तक काम किया। साथ ही The Asian Age और The Pioneer जैसे प्रमुख अखबारों से भी जुड़े रहे। वे राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र तथा हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में मीडिया स्टडीज के प्रोफेसर भी रहे।

राजस्थान सरकार ने उन्हें सूचना आयुक्त भी बनाया, जहाँ अपने कार्यकाल में उन्होंने 7000 से अधिक आरटीआई मामलों का निस्तारण किया।

निष्पक्ष, निर्भीक और जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता के इस सशक्त स्वर का यूँ अचानक चला जाना पत्रकारिता जगत के लिए बड़ी क्षति है।

नारायण बारेठ जी को विनम्र श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति और परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति दे।

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