जालंधर के वरिष्ठ पत्रकार Arjun Sharma जी के निधन की खबर सामने आई है। उनके सटीक लेख समाज को नई दिशा देते थे। प्रतिष्ठित समाचार पत्र पंजाब केसरी से लेकर अमर उजाला और अन्य कई समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दे चुके अर्जुन सिंह जी का इस उम्र में चले जाना परिवार के साथ-साथ पत्रकारिता जगत के लिए भी अपूर्णीय क्षति है। उनके निधन पर भड़ास एडिटर यशवंत समेत विभिन्न पत्रकारों ने शब्दों से श्रद्धांजलि अर्पित की है- नीचे पढ़ें
यशवंत सिंह-
मुझे आज पता चला कि Arjun Sharma जी नहीं रहे। वरिष्ठ और बेबाक पत्रकार अर्जुन शर्मा से मेरा परिचय भड़ास की शुरुआत के दिनों से है। आलोक तोमर भैया ने परिचय करवाया था। जालंधर के अर्जुन शर्मा दबंग थे। ठोक के लिखते थे। बाग़ी स्वभाव होने की वजह से बड़े मीडिया हाउसों की चाकरी देर तक नहीं कर पाये। फिर अपना शुरू किया। ब्लॉगिंग के दौर में जिन कुछ सक्रिय साथियों से ऑनलाइन दोस्ती हुई उनमें अर्जुन शर्मा भी थे। इनसे फ़ोन पर अक्सर बातचीत हो जाया करती थी।
मेरे से चार छह साल बड़े रहे होंगे। अभी जाने की बिल्कुल उम्र न थी। उनकी आख़िरी पोस्ट चौदह फ़रवरी की है। अट्ठाइस फ़रवरी को उनका निधन हुआ। पंजाब की पत्रकारिता के इस अर्जुन को श्रद्धांजलि

आरूष शर्मा-
आज शब्द साथ नहीं दे रहे…क्योंकि जिनके लिए लिख रहा हूं, वो खुद क़लम के सच्चे सिपाही थे। मेरे अंकल, श्री अर्जुन शर्मा जी, अब हमारे बीच नहीं रहे।
पत्रकारिता की दुनिया में उनका नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं था। उन्होंने अपनी लेखनी से सिर्फ खबरें नहीं लिखीं, बल्कि सच को आवाज़ दी। लेकिन मेरे लिए वो केवल एक बड़े पत्रकार नहीं थे… वो मेरे बचपन की यादों का एक अहम हिस्सा थे।
मुझे आज भी वो दिन याद हैं जब मैं अपने पिताजी के पास Shri Devi Talab Mandir में स्थित दिव्य टाइम्स कार्यालय जाया करता था। वहां अंकल से अक्सर मुलाकात होती थी। पिताजी के पुराने साथी होने के कारण उनका घर आना-जाना भी लगा रहता था। उनका स्नेह, उनका मार्गदर्शन और उनका सादा व्यक्तित्व आज भी आंखों के सामने है। रविवार को जब यह खबर मिली कि अर्जुन अंकल इस दुनिया में नहीं रहे… तो मन भीतर तक टूट गया। ऐसा लगा जैसे पत्रकारिता का एक उजला अध्याय अचानक समाप्त हो गया हो।
कुछ लोग सिर्फ जीते नहीं…वो अपनी सोच, अपने शब्दों और अपने संस्कारों से पीढ़ियों को छू जाते हैं। अंकल, आपकी क़लम भले थम गई हो, पर आपकी यादें और आपकी सीख हमेशा हमारे साथ रहेंगी।
ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको अपने चरणों में स्थान दें और परिवार को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें…ॐ शांति

संजय जोशी-
पत्रकारिता जगत ने आज एक ऐसा व्यक्तित्व खो दिया, जिसने न केवल समाचार लिखे बल्कि पत्रकारिता की कई पीढ़ियाँ तैयार कीं। वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन शर्मा अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके जाने से केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पत्रकारिता का एक युग जैसे थम सा गया है।
अर्जुन शर्मा का नाम पूरे उत्तर भारत में सम्मान के साथ लिया जाता था। वे लंबे समय तक दिव्य हिमाचल समाचार पत्र में शिमला से हिमाचल के प्रभारी रहे और इस दौरान उन्होंने प्रदेश में पत्रकारिता को नई दिशा देने का कार्य किया। उनके मार्गदर्शन में अनेक युवा पत्रकार तैयार हुए, जिन्होंने उनसे खबर की सच्चाई, समाज के प्रति संवेदना और पत्रकारिता की मर्यादा सीखीं।
इसके बाद उन्होंने पंजाब केसरी जालंधर, अमर उजाला तथा अन्य प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी लेखनी का प्रभाव छोड़ा। उनकी भाषा सरल, विचार स्पष्ट और दृष्टि संतुलित थी। यही कारण था कि पत्रकारिता जगत में उनके शब्दों पर भरोसा किया जाता था।
उन्होंने केवल स्वयं शिखर तक पहुँचने की यात्रा नहीं की, बल्कि रास्ते में अनगिनत लोगों को आगे बढ़ाया। छोटे कस्बों के युवाओं को उन्होंने साप्ताहिक समाचार पत्र निकालना, उसका संचालन करना और पत्रकारिता को समाज की आवाज़ बनाना सिखाया। अनेक लोग मानते हैं कि जो कुछ उन्होंने पत्रकारिता में सीखा, उसमें अर्जुन शर्मा की सीख और प्रेरणा शामिल रही।
उनकी लेखनी में सच्चाई की गर्माहट और मानवता की चमक थी। वे प्रशासनिक लापरवाहियों पर भी लिखते थे और आम लोगों की आवाज़ को भी मंच देते थे। पत्रकारिता को उन्होंने पेशा नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम माना।
उनके निधन से सहकर्मी, शिष्य और पाठक सभी गहरे शोक में हैं। जो लोग उनके साथ काम कर चुके हैं, वे कहते हैं — हमने केवल एक पत्रकार नहीं खोया, बल्कि ऐसा गुरु खोया है, जिससे हमने जीवन और पत्रकारिता दोनों सीखी।
अर्जुन शर्मा भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनके शब्द, उनके विचार, उनकी सिखाई पत्रकारिता और उनके द्वारा तैयार की गई पीढ़ियाँ ही उनकी सच्ची विरासत हैं। आने वाले समय में भी उनकी लेखनी और उनका साहस युवा पत्रकारों के लिए दिशा दिखाता रहेगा।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके परिवार, साथियों व शिष्यों को इस दुख को सहने की शक्ति दे।

सफ़र शुक्ला-
पत्रकारिता के ‘अर्जुन’ ने ली अंतिम साँस.. उपन्यासकार, कहानीकार और पत्रकार अर्जुन शर्मा को अंतिम श्रद्धांजलि… वे केवल खबरों के लेखक नहीं थे, बल्कि सत्य के प्रहरी, समाज के दर्पण और संवेदनाओं के पथिक थे।
उनकी कलम में हमेशा सच्चाई की गर्माहट और मानवता की चमक झलकती थी। हर कहानी, हर रिपोर्ट, हर आलेख—सत्य और न्याय के लिए अटूट संघर्ष था।
वे युवा पत्रकारों के लिए मार्गदर्शक और प्रेरणा थे। सहकर्मियों ने याद किया उनकी सरल मुस्कान, साहस और हर किसी की मदद करने की तत्परता।
अर्जुन शर्मा ने पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि जनसेवा और समाज सुधार का माध्यम माना। वे प्रशासनिक लापरवाही, आम जनता की समस्याओं और सामाजिक असमानताओं पर निर्भीक रिपोर्टिंग करते थे।
उनकी लेखनी ने हमेशा विवेक और संतुलन के साथ समाज के मुद्दों को उजागर किया। उनकी मृत्यु की खबर फैलते ही शहर भर में शोक और खालीपन की लहर दौड़ गई।
साहित्य और मीडिया जगत ने इसे अपरिहार्य क्षति बताया। उनकी कहानियों और लेखों ने आम लोगों की आवाज़ को मंच दिया और समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा दिखाई।
अर्जुन शर्मा का अंतिम संस्कार 1 मार्च 2026 को जालंधर में होगा। शहर के गणमान्य नागरिक, पत्रकार, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देंगे।
लाइव भारत की पूरी टीम प्रार्थना करती है— “हे रब, उन्हें अपने चरणों में स्थान दें। उनकी कलम और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा बनकर जियेंगे।”
अर्जुन शर्मा—उपन्यासकार, कहानीकार और पत्रकार—हमेशा हमारे शब्दों, विचारों और दिलों में जीवित रहेंगे, उनकी यादों और कार्यों में हम सच्चाई और मानवता की चमक देखते रहेंगे।


