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चार संतूर साबुन टिकाकर घरों में अखबार का सब्सक्रिप्शन दे रहे दैनिक जागरण की मेंबर को महिला का करारा जवाब!

रश्मि त्रिपाठी-

अभी लगभग दस बजे एक महोदया घर पर आईं और पूछने लगीं कि आपके यहां कौन सा अखबार आता है? मैंने नाम बताया तो मुझे आज के दैनिक जागरण की एक प्रति दिखाकर बोलीं अब आपके यहां ये वाला अखबार आएगा!

मैं अभी कुछ बोलती तभी हॉकर का नाम पूछने लगीं। मैंने कहा मुझे नहीं पता लेकिन क्यों?

तो बोलीं कि मुझे पता है यहां वो _ ही आता है। मैंने कहा आपको करना क्या है? तो पर्स से चार संतूर साबुन निकाल कर उस दैनिक जागरण पर रखकर मुझे देते हुए बोलीं मैं उससे (हॉकर) बोल दूंगी अब आपके यहां यही पेपर आएगा।

तब मैं जोर से बोली नहीं लेना मुझे!

क्यों आप तय करेंगी कि मेरे यहां कौन सा न्यूज पेपर आएगा? तो बोलीं क्यों कि ये सबसे अच्छा है सबसे ज्यादा बिकता भी है। मैंने जोर से बोला रहने दीजिए आप और तुरंत यहां से निकलिए। मुझे पता है इस अखबार में क्या आता है? आरएसएस का अखबार है ये!

वो मुझे आंख फाड़कर देखने लगीं। और भागते हुए बोलीं कोई बात नहीं रहने दीजिए।

गुस्से में उनकी फोटो लेना भूल गई। और वो मुंह पर दुपट्टा बांधकर बहुत तेजी से भागी थीं। मुझे नहीं लगा कि वो फोटो लेने की इजाजत भी देतीं।

नोट_ गोरखपुर वाले लोग ध्यान दें किसी और के यहां भी ऐसा हुआ क्या?

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1 Comment

1 Comment

  1. स्टार रिपोर्टर

    March 13, 2026 at 8:23 am

    इससे पता चलता है कि महिला कितने विकृत है उसे इस बात की खुशी नहीं की अखबार में समाचार पड़े उसे अखबार के मालिक या उनके किए कर्म से मतलब है जबकि एक पाठक को अखबार में पारो से जाने वाली सामग्री से मतलब होता है वह किस संगठन से जुड़ा है या उसके पैसों से देश में क्या-क्या चल रहा है अगर इसकी जानकारी देश के प्रत्येक नागरिक को है और इस तरीके से विचार रखता है तो आज देश से आतंक खत्म हो सकता है लेकिन यह सब दिखावटी और बनावटी लोग हैं और कुछ लोग हैं जो इनको प्रमोट करके यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि आरएसएस जैसा काम करने वाला संगठन अच्छा नहीं है जब किस देश में लोगों को डरा धमकाकर या उनको ऊलजुल उल हरकतों से परेशान कर दरबदर करने वाले संगठनों के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाता।

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