
ABP News के एक कार्यक्रम को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों में आरोप लगाया जा रहा है कि शो के दौरान दर्शक दीर्घा में एक BJP कार्यकर्ता को बैठाकर कांग्रेस से जुड़े सवाल पूछवाए गए।
इन दावों के मुताबिक, जब इस बात को कार्यक्रम के दौरान उजागर किया गया, तो एंकर Chitra Tripathi का रवैया भी सवालों के घेरे में आ गया और उन पर कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगे।
हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर अभी तक ABP News या चितरा त्रिपाठी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। साथ ही, वायरल दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो सकी है।
फिर भी, यह विवाद मीडिया की निष्पक्षता और कार्यक्रमों में “स्टेज मैनेजमेंट” को लेकर एक बार फिर बहस को हवा दे रहा है। आलोचकों का कहना है कि अगर दर्शकों या सवालों को पहले से तय किया जाता है, तो इससे पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है।
फिलहाल, कुछ लोग इसे सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा एकतरफा नैरेटिव भी बता रहे हैं, जिसकी पूरी सच्चाई सामने आना अभी बाकी है।
डॉ अजय उपाध्याय-
बीजेपी के पदाधिकारी एवं दर्जनों कार्यकर्ता को शो में बतौर आम जनता बनाकर श्रीमती chitra aum जी कांग्रेस को अपमानित करने के लिए हमेशा मौक़ा तलाशती है। आज उनके इस साज़िश का सार्वजनिक पर्दाफाश हुआ..
आप ख़ुद ही देख लीजिए कैसे आज भी विपक्ष से प्रायोजित सवाल पूछवाये जा रहें हैं..नोएडा जिला सोशल मीडिया सह संयोजक रचना जैन और उनकी टीम को मुखौटा लगाकर बतौर आम जनता बताया जा रहा था और कांग्रेस से सवाल करवाया जा रहा था।
ताज्जुब तो तब हुआ जब एक्सपोज़ करने के बाद भी एंकर महोदया पूरे दृढ़ता से ऐसे लोगों का बचाव करती रहीं… यदि थोड़ी भी नैतिकता बची हो तो इस शर्मनाक खेल के लिए देश और पत्रकार समाज से माफ़ी माँगनी तो बनती है मैडमजी
मुझे तो एक शायरी याद आ गई…
कुछ लोगोंसे आशा करना बेईमानी है,
जिनके आँखों का मर गया पानी है।
मनीष तिवारी-
ABP न्यूज़ की गोदी मीडिया की पत्रकार चित्रा त्रिपाठी अपने शो में भाजपा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को “आम जनता” बनाकर बैठा रही हैं और उनसे कांग्रेस के प्रवक्ताओं और सीधे देश के नेता राहुल गांधी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दवाली के साथ सवाल करवाती हैं।
यह उनका शो का पैटर्न है अपने राजनीतिक लोगों को बैठाना, विपक्ष को फंसाना और जनता को गुमराह करना। जब कांग्रेस का प्रवक्ता साफ-साफ जवाब देता है, तो एंकर को बुरा लग जाता है।
संदीप मलिक-
बीजेपी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को “आम जनता” बनाकर शो में बैठाना और कांग्रेस को घेरने की कोशिश—आज इस खेल का पर्दाफाश हो गया।
नोएडा की रचना जैन और उनकी टीम को भी मुखौटे में पेश कर सवाल पूछवाए गए, और एक्सपोज़ के बाद भी एंकर बचाव करती रहीं। अगर ज़रा भी नैतिकता बची है, तो देश और पत्रकारिता से माफ़ी बनती है।
आवेश तिवारी-
डिबेट के नाम पर यह खेल नया नहीं है। अंजना अपने डिबेट में गाजियाबाद भाजपा के कार्यकर्ताओं को तो चित्रा नोएडा के भाजपाईयों को बुला लेती है, राजनैतिक विश्लेषकों के नाम पर RSS दफ्तर में फोन कर उनके कार्यकर्ता बुलाये जाते हैं। छात्रों के नाम पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी चित्रा फोन लगा देती है तो जनता को बुलाना हो तो सीधे गौतमबुद्धनगर के भाजपा जिलाध्यक्ष को।सब के सब व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के फेलियर।
यह बेशर्म दो कौड़ी के सत्ता के दलाल खाए पिये लोग हैं। इनको क्या फर्क पड़ता है गैस महंगी हो, पेट्रोल महंगा हो , डीजल महंगा हो, यह रचना शर्मा नोएडा महानगर भाजपा की पदाधिकारी ही नहीं है “लकड़ी जलाकर खाना बनाओ पर मोदी बचाओ” अभियान की संयोजक है।अजय जी dr ajay upadhyay विनम्र है गनीमत मनाइए सुरेंद्र राजपूत जी नहीं थे। लेकिन अजय जी ने पहचाना बिल्कुल सही।
चित्रा chitra aum, इस किस्म की बेशर्मी से बाज आओ। तुम्हारा भी इतना प्यारा बच्चा है, सोच के देखो महिलाएं गैस की लाइन में खड़ी होकर रो रही हैं। अपने बीमार मां बाप को छोड़कर बच्चा रात 3 बजे से लाइन लगा रहा है। पूरी दुनिया संकट में है। थोड़ी सी तो लाज रखो। ऐसा न करो कि मनुष्यता को भी शर्म आए पत्रकारिता तो तुम्हारे भीतर बची नहीं।
आलोक शर्मा-
आज की टीवी डिबेट ने एक बार फिर उस कड़वे सच को उजागर कर दिया, जिसे हम लंबे समय से महसूस कर रहे हैं, “जनता की आवाज़” के नाम पर मंच सजाया जाता है, लेकिन असल में वह एक सुनियोजित, प्रायोजित और पक्षपातपूर्ण तमाशा बन चुका है।
जहाँ सत्ता पक्ष के समर्थकों को “आम जनता” बनाकर बैठाया जाता है, और विपक्ष को घेरने के लिए सवालों की एकतरफा बौछार की जाती है। एंकर, जिनका दायित्व निष्पक्षता और सत्य होता है, खुलेआम तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं, और जब सच्चाई तस्वीरों में सामने आ जाती है, तब भी उसे नकारने का दुस्साहस किया जाता है।
यह सिर्फ एक डिबेट नहीं थी, यह लोकतंत्र के मूल्यों के साथ किया गया एक सुनियोजित खिलवाड़ था। जिस मीडिया को कभी लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता था, आज वही स्तंभ सत्ता के संरक्षण में खड़ा होकर एक पार्टी विशेष का प्रचार-प्रसार करने का माध्यम बनता जा रहा है। सवाल सत्ता से होने चाहिए थे, लेकिन कटघरे में विपक्ष को खड़ा किया गया, यही आज के मीडिया का दुर्भाग्यपूर्ण सच है।
हमारे प्रवक्ताओं को बार-बार दबाने, रोकने और उनकी आवाज़ को कुचलने का प्रयास किया जाता है, लेकिन यह भूल जाते हैं कि सच को दबाया जा सकता है, मिटाया नहीं जा सकता। आज अजय उपाध्याय जी ने जिस साहस और आत्मसम्मान के साथ इस प्रायोजित मंच का बहिष्कार किया, वह किसी एक व्यक्ति का निर्णय नहीं, बल्कि उस हर आवाज़ का प्रतिनिधित्व है, जो झुकने से इनकार करती है।
यह समय कठिन है, लेकिन इतिहास गवाह है, जब-जब सच को दबाने की कोशिश हुई है, तब-तब वह और अधिक ताकत के साथ उभरा है। हमें कितना भी डराने, दबाने या बदनाम करने का प्रयास किया जाए, हम न डरेंगे, न झुकेंगे।
क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ राजनीतिक नहीं है, यह लड़ाई सत्य और असत्य के बीच है, लोकतंत्र और प्रोपेगेंडा के बीच है, और हम उस पक्ष में खड़े हैं जहाँ सच अभी भी जिंदा है।
हम सब अजय उपाध्याय जी के साथ हैं, और हर उस आवाज़ के साथ हैं जो इस अंधेरे में भी सच की मशाल जलाए हुए है।


