संजय कुमार सिंह
आज मेरे नौ में से आठ अखबारों की लीड यही है कि खाड़ी युद्ध को लेकर ट्रम्प ठंडे पड़े। उनकी स्थिति या ठंडे पड़ने या दिखने के जो कारण अखबारों ने बताए हैं उनपर आगे चर्चा करूंगा। आज खबर यह भी है कि पश्चिम एशिया में जंग के हालात पर प्रधानमंत्री ने पहली बार सार्वजनिक बयान दिया है। राहुल गांधी की अनुपस्थिति में लोकसभा में 25 मिनट बोले लेकिन खबर मेरे एक ही अखबार में लीड है। यह हेडलाइन मैनेजमेंट है, उसके बावजूद है या अब हो नहीं रहा है – आज की स्थिति में कुछ भी कहना मुश्किल है। जंग पर ट्रम्प का बयान और उससे संबंधित खबरों को छोड़कर देशबन्धु ने मोदी जी के भाषण को लीड बनाया है। उप शीर्षक है, पश्चिम एशिया संकट पर बातचीत से समस्या के समाधान पर जोर दिया। मुझे लगता है कि यह बात न तो अब बताने वाली है और न अब समझ में आई होगी। देश के प्रधानमंत्री ने संसद में जो कहा, और कई दिनों बाद कहा इसलिए लीड तो बननी ही चाहिए थी। बन भी सकती थी। लेकिन नहीं बनी है तो कारण यह भी हो सकता है कि जहां लीड बनी है वहां मुख्य शीर्षक है, संसद में मजबूर दिखे मोदी। बेशक यह देखने वाले का, रिपोर्टर का या संपादक का नजरिया हो सकता है। लेकिन अखबार में नरेन्द्र मोदी ने जो कहा उसके साथ कांग्रेस नेता जयराम रमेश का यह सवाल भी छपा है कि विश्व गुरु ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को आगे क्यों नहीं बढ़ा रहे हैं। खबर इस प्रकार है, कांग्रेस महा सचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि पश्चिम एशिया संकट से निपटने के लिए ब्रिक्स समिट को आगे क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा है। मोदी अमेरिका और इजरायल को नाराज नहीं करना चाहते। भारत इस साल नई दिल्ली में 18वीं ब्रिक्स समिट की मेजबानी करने वाला है। ऐसे में सरकार को पश्चिम एशिया संकट पर कूटनीतिक पहल के लिए इस मंच का इस्तेमाल करना चाहिए। खुद को ‘विश्वगुरु’ बताने वाले प्रधानमंत्री इस दिशा में पहल क्यों नहीं कर रहे हैं। जब पूरी दुनिया इस युद्ध के कारण आर्थिक संकट और महंगाई झेल रही है, तब भारत सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
आपको याद होगा, शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से (दूसरी बार) बात की थी। पहली बार कब और क्या बात की थी और तब पेजेश्कियन ने या ईरान ने जो कहा था वह सोशल मीडिया पर तो था, अखबारों में नहीं था। इस बार उन्होंने कहा था, भारत ब्रिक्स स्वतंत्र भूमिका निभाए… युद्ध रोकने में मदद करे। यह खबर, रविवार, 22 मार्च को अमर उजाला में प्रमुखता से छपी थी।

प्रधानमंत्री पहली बार बोले, खूब बोले, मन की बात की लेकिन हेडलाइन मैनेजमेंट के बावजूद खबर लीड नहीं है – समझिए क्यों? इंडियन एक्सप्रेस के शीर्षक में ब्रिक्स का जिक्र नहीं है। होर्मुज पर उच्च विचार अलग हैं।

अब प्रधानमंत्री ने जब इतने दिनों बाद युद्ध पर सार्वजनिक रूप से कुछ कहा है तो इसमें अमेरिका भी नहीं है। वडोदरा में आदिवासी अधिकार संविधान सम्मेलन को संबोधित करते हुए इसपर राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी संसद में बहस नहीं कर सकते क्योंकि वे समझौता कर चुके हैं। एएनआई के अनुसार, राहुल गांधी ने कहा , “मैंने सुना है कि प्रधानमंत्री ने 25 मिनट का भाषण दिया। लेकिन मैं गारंटी देता हूं कि वे संसद में बहस में भाग नहीं ले सकते क्योंकि वे समझौता कर चुके हैं। नरेंद्र मोदी ने 25 मिनट तक भाषण दिया लेकिन अमेरिका के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा। नरेंद्र मोदी पूरी तरह से ट्रंप के नियंत्रण में हैं।” यहां गौरतलब है कि युद्ध पर ट्रम्प ने कुछ और कहा है। अगर बातचीत से समस्या का समाधान होना है तो यह बात ट्रम्प और नेतन्याहू से क्यों नहीं कही जा रही है और पहले ही क्यों नहीं कही गई। इसे उन तथ्यों के साथ जोड़कर देखिए जो ट्रम्प और मोदी के बारे में सर्वविदित हैं। एप्सीटन फाइल, उसके सार्वजनिक हुए अंशों और कंप्रोमाइज्ड कहे जाने के कारण जो बातें रेखांकित होती हैं उनके अनुसार, भारत (असल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी) इस युद्ध में निष्पक्ष नहीं है। ईरान के साथ तो नहीं ही है। अमेरिका और इजराइल के साथ होने की संभावना लगती है। ऐसे में अब यह कहना कि समस्या का समाधान बातचीत से निकले – का क्या मतलब हो सकता है। शायद इसीलिए अखबारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
यह इसलिए भी कि हमला अमेरिका और इजराइल ने किया है, उसके शीर्ष नेताओं को मार दिया गया है और ईरान कह रहा है कि वह सिर्फ बदले की कार्रवाई कर रहा है। हार नहीं रहा है जबकि शुरू में ट्रम्प ईरान को किसी लायक मानते ही नहीं थे। 48 घंटे में होर्मुज स्ट्रेट खाली करने और नहीं करने पर हमले की धमकी दी। लेकिन ईरान ने बात नहीं मानी। दूसरी ओर ट्रम्प ने पांच दिन के युद्धविराम की घोषणा की है और यह दलील दी है कि ईरान के साथ वार्ता चल रही है जबकि ईरान ने इससे इनकार कर दिया। ऐसे में भारत निष्पक्ष हो या अमेरिका के साथ – इजराइल के साथ होने और कहने में भी दिक्कत है। इसलिए युद्ध से संबंधित समस्याएं बुलाई हुई भी हैं। प्रचार जो चल रहा है सो अलग लेकिन उसकी सच्चाई सबको समझ में आ रही है। स्थिति बहुत बुरी है और भारत के अखबार युद्ध में, आज हेडलाइन मैनेजमेंट करने वाली सरकार के साथ नजर नहीं आ रहे हैं। आइए अब आज के शीर्षक देख लें। इनसे यह समझना मुश्किल है कि भारत और अमेरिका या मोदी और ट्रम्प जो कह रहे हैं वह तय किया हुआ है, तालमेल में है या स्वतंत्र। पर जो है सो है। हमें उसे जानना और समझना पड़ेगा। यह आगे जो कुछ होगा उसे समझने और झेलने में मददगार होगा। युद्ध के बारे में देशबन्धु की खबर का शीर्षक है, ट्रम्प के हमला टालने के फैसले पर ईरान का बड़ा दावा, कहा – जवाबी कार्रवाई से डरा अमेरिका। अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, “ट्रम्प पीछे हटे… हमला 5 दिन टाला, इजराइल ने कहा बयान आश्चर्यजनक, ईरान बोला – ये दुश्मन की हार”। इसके साथ छपी खबर में अमर उजाला ने लिखा है, ….दरअसल ट्रम्प अपने ही जाल में फंस गए हैं …इसलिए ट्रम्प का यू-टर्न…भारी खर्च, तेल संकट व अंतहीन युद्ध का भय।
नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, 5 दिन ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमला नहीं करेगा अमरीका। संसद में प्रधानमंत्री के भाषण का शीर्षक है, कोरोना संकट की ही तरह करना होगा चुनौतियों का सामना। यह शीर्षक भी कुछ खास नहीं है और इसीलिए है कि भाषण में कुछ खास होगा ही नहीं। कोरोना की तरह निपटने की बात पहले से होती रही है और कोरोना से कैसे निपटा गया – सबको पता है और कई बार कइयों ने लिखा है। अंग्रेजी अखबारों में द टेलीग्राफ की लीड ट्रम्प की घोषणा और ईरान का इनकार ही है। नरेन्द्र मोदी के भाषण की खबर का शीर्षक है, युद्ध के प्रभाव के लिए तैयार रहिए। खबर के अनुसार उन्होंने युद्ध की तुलना कोविड-19 की महामारी से की और इसके दीर्घकालिक प्रभाव के लिए तैयार रहने को कहा। हालांकि, कोविड महामारी अगर आ गई थी तो युद्ध (का प्रभाव) बुलाया हुआ है। दि एशियन एज ने शीर्षक में यह नहीं लिखा है कि ट्रम्प ने कहा कि वार्ता चल रही है इसलिए पांच दिन युद्ध विराम रहेगा बल्कि ट्रम्प के कहे को करार के लिए अमेरिका के तैयार होने के रूप में पेश किया है। प्रधानमंत्री के भाषण का शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने कहा तेल के पर्याप्त भंडार हैं, घबराने की जरूरत नहीं है। सोशल मीडिया पर भारतीय जनता पार्टी और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन दोनों अपने तरीके से यह दावा कर चुके हैं। सच्चाई यह है कि इंडस्ट्रीयल डीजल की कीमत 22 रुपए प्रति लीटर और विशेष पेट्रोल (जिसकी खपत कुल खपत का 5 प्रतिशत ही बताई जाती है) कीमत दो रुपए लीटर की वृद्धि हो चुकी है। तेल की कीमत में इन दो प्रमुख वृद्धि के अलावा यह बताया जा रहा है कि सरकार ने कीमतें नहीं बढ़ाकर देश पर भारी मेहरबानी की है जबकि दुनिया भर में जब तेल की कीमतें कम हो गई थीं तब हमारी सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत कम नहीं की थी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड ट्रम्प का युद्ध विराम है। शीर्षक के अनुसार ट्रम्प ने गंभीर वार्ता का हवाला दिया है जबकि ईरान ने इसे फर्जी खबर करार दिया है। प्रधानमंत्री ने जो कहा वह सेकेंड लीड है। इसका शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने संसद से कहा, टकराव भारत के लिए बेजोड़ चुनौतियां पेश कर रहा है। अखबार ने एक मीडिया आयोजन में प्रधानमंत्री के कहे को हाईलाइट किया है। इसके अनुसार, एक ऐसे समय में जब सारी दुनिया ढेरों खेमों में बंटी हुई है, भारत असाधारण सेतु बनाने में कामयाब रहा है – खाड़ी से पश्चिम तक, वैश्विक दक्षिण से पड़ोसियों तक। आज भारत सबके भरोसेमंद साथी के रूप में खड़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा है तो खबर छपेगी ही और मुझे लगता है कि यहां यह याद दिलाने की जरूरत है कि भारत अपने पड़ोसी से लड़ तो स्वयं गया था, इसे ऑपरेशन सिन्दूर जैसा देसी नाम दिया लेकिन युद्धविराम फ्रैंड ट्रम्प ने कराया। अचानक, क्यों और कैसे – भारत सरकार ने अभी तक नहीं बताया है जबकि युद्ध विराम और शांति का दावा करने वाले अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला तब किया जब नरेन्द्र मोदी इजराइल में थे या वहां से लौटे ही थे। कहने पर भी ब्रिक्स के जरिए ईरान की मदद नहीं कर रहे हैं लेकिन सबको, सब कुछ पता होने के बावजूद भारतीय संसद में दावा कर रहे हैं कि भारत सबके लिए एक भरोसेमंद पार्टनर है।
इंडियन एक्सप्रेस ने ट्रम्प के दावे या घोषणा को शीर्षक बनाया है पर ईरान ने वार्ता से इनकार किया – अलग छोटे शीर्षक से है। मुख्य खबर का उप शीर्षक प्रधानमंत्री ने जो कहा वह तो है ही। साथ में यह भी जोड़ दिया गया है, होर्मुज को रोकना नामंजूर है। द हिन्दू में आज विज्ञापन है और पहले पन्ने पर दो ही खबरें हैं। लीड है, ट्रम्प ने ईरान पर हमले टाले, कहा करार संभव है। पहले पन्ने की दूसरी खबर का शीर्षक है, केंद्र ने शीघ्र परिसीमन और 2029 के चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षण का संकेत दिया। हिन्दुस्तान टाइम्स ने ट्रम्प के युद्ध विराम की घोषणा, ईरान के इनकार को बैनर बनाया है। इस मुख्य शीर्षक के साथ दो कॉलम के शीर्षक से प्रधानमंत्री का भाषण है। इसका शीर्षक है, टकराव के प्रभाव को न्यूनतम रखने के लिए परिश्रम कर रहा हूं।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


