संजय कुमार सिंह
खाड़ी युद्ध खत्म करने की अमेरिकी ‘कोशिश’ नाकाम हो गई है। वैसे तो यह स्पष्ट हो चला था कि अमेरिका यानी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस युद्ध से निकलने का रास्ता तलाश रहे थे और इस फेर में ढेरों बयान दिए तथा उतनी ही पलटियां मारीं पर अभी उनकी चर्चा की जरूरत नहीं है। युद्ध और भारत से संबंधित एक खबर आज इंडियन एक्सप्रेस और द हिन्दू में पहले पन्ने पर प्रमुखता से है। पश्चिम एशिया संकट पर सर्वदलीय सभा की खबर है, विपक्ष ने पाकिस्तान की मध्यस्थता को रेखांकित किया। सरकार ने कहा कि भारत ‘दलाल’ देश नहीं है। द हिन्दू में यह खबर सेकेंड लीड है। शीर्षक है, विपक्ष ने पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की भूमिका का सवाल उठाया तो केंद्र सरकार ने अपने रुख (स्टैंड) का बचाव किया। शोभना के नायर और सुहासिनी हैदर की बाईलाइन वाली खबर के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में पाकिस्तान की कथित मुख्य भूमिका को लेकर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पड़ोसी देश को “दलाल” कहा। यह भी कि वह 1981 से ही यह भूमिका निभा रहा है। भारत की “खामोशी” को लेकर हो रही आलोचना का जवाब देते हुए, जयशंकर ने ज़ोर देकर कहा कि चूंकि पश्चिम एशियाई देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं, इसलिए भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए एक संतुलित रुख बनाए रखना बेहद ज़रूरी है। टाइम्स ऑफ इंडिया में इस खबर का शीर्षक है, “सर्वदलीय सभा में विदेश मंत्री ने कहा : दलाल राष्ट्र नहीं हो सकते हैं”। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर सिंगल कॉलम में है और ढूंढ़ने पर मिली। दि एशियन एज में सर्वदलीय बैठक की खबर लीड है। लेकिन शीर्षक सरकारी प्रचार वाला है। बाकी बातें फ्लैग शीर्षक के चार बुलेट प्वाइंट के तहत कही गई हैं। इनमें एक यह भी है कि राहुल गांधी और टीएमसी शामिल नहीं हुए। बैठक बुलाए जाने के बाद से ही चर्चा थी कि प्रधानमंत्री इसमें शामिल नहीं होंगे। क्यों नहीं हुए पता नहीं चला या उसपर कोई खबर नहीं है। राहुल गांधी नहीं गए – यह खबर सबने दी। हालांकि कुछ ने इसके साथ बताया कि उन्हें केरल जाना था (वहां चुनाव हैं) लेकिन सोनिया गांधी की तबियत खराब होने और उनके अस्पताल में दाखिल होने के कारण नहीं गए। इसलिए यह खबर तो खबर है। किस खबर को आठ कॉलम में तानना है और किसे सिंगल कॉलम या बुलेट प्वाइंट में निपटाना है – यही संपादकीय आजादी या विवेक है।
आज खबर यही है कि ईरान ने अमेरिका का 15 सूत्री प्रस्ताव खारिज कर दिया है और पांच मांगें रखी हैं। द टेलीग्राफ की लीड का शीर्षक है, “युद्ध विराम की योजना : अमेरिका 15, ईरान 5″। देसी मोर्चे पर खबर यह है कि बुधवार को एक सर्वदलीय बैठक में, पश्चिम एशिया में गहराते संकट को लेकर केंद्र सरकार को विपक्ष की ओर से सवालों की बौछार का सामना करना पड़ा। वहीं, वरिष्ठ मंत्रियों ने यह भरोसा दिलाकर चिंताओं को दूर करने की कोशिश की कि भारत के पास तेल और गैस के पर्याप्त भंडार हैं। घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। विपक्षी दलों ने सरकार की कथित चुप्पी की आलोचना की और इस संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषित महत्वाकांक्षा का ज़िक्र किया, जिसके तहत वे भारत को ‘ग्लोबल साउथ’ के एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। अभी तक के युद्ध को लेकर आपकी राय चाहे जो हो, ईरान अमेरिका-इजराइल पर भारी है, भारत किन्हीं कारणों से ईरान के साथ नहीं है और उसे अमेरिका-इजराइल के साथ माना जा रहा है। यह सब कहा गया हो या नहीं और कहा गया हो तो चाहे जैसे भी कहा गया हो, आज के अखबारों में बिल्कुल स्पष्ट है। हालांकि, एक बात और स्पष्ट है कि अमेरिका ने अपना प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए ईरान तक पहुंचाया था और ईरान ने उसे भी मानने से मना कर दिया है।
अमर उजाला का शीर्षक है, ईरान की दो टूक… न ट्रम्प पर विश्वास न पाकिस्तान की मध्यस्थता मंजूर। ईरान ने यह भी कहा है कि वह अपनी शर्तों पर युद्ध खत्म करेगा। युद्ध को लेकर भारत के काम की जानकारी यही है कि युद्ध अभी लंबा चलेगा और इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसमें एलपीजी संकट की आशंका के बाद अब डीजल-पेट्रोल के संकट की आशंका भी है। अभी यह पहले पन्ने की खबर नहीं है। देशबन्धु की एक खबर के अनुसार पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्टीकरण दिया है कि देश में गैस रिफिल बुकिंग के नियम नहीं बदले हैं। अमर उजाला में दो पहले पन्ने हैं। पहले वाले में देसी खबरें हैं जबकि दूसरे पहले पन्ने पर युद्ध की खबर लीड है जिसका जिक्र मैंने ऊपर किया है। देशबन्धु में अगर रिफिल बुकिंग के नियम नहीं बदलने की खबर है तो अमर उजाला में तीन कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, पीएनजी सुविधा होने पर लेना होगा कनेक्शन, बंद होगी एलपीजी आपूर्ति। साथ में यह भी बताया गया है कि उपभोक्ताओं को कनेक्शन लेने के लिए मिलेगा तीन महीने का समय। कहने की जरूरत नहीं है कि पहले सरकार नहीं मान रही थी कि एलपीजी का संकट है। लेकिन दाम बढ़ा दिए और बुकिंग के नियम बदल दिए। अब बुकिंग के नियम बदलने से इनकार किया जा रहा है लेकिन लोगों पर दबाव डाला जा रहा है कि पीएनजी मिल रही है तो एलपीजी का उपयोग मत कीजिए। कारण समझना मुश्किल नहीं है। ऐसा पहले भी होता था लेकिन दोनों चलते ही रहे हैं। अब दबाव डालने का मतलब साफ है। ऐसे दबावों का मतलब भी लगाया जाता रहा है। इसलिए, अब तीन महीने का समय देने की भी बात की जा रही है। जानकारों का कहना है कि युद्ध आज भी खत्म हो जाए तो प्रभाव लंबे समय तक रहेगा। संभव है सरकार दीर्घकालिक व्यवस्था कर रही हो। चूंकि मोदी सरकार ऐसे काम करती नहीं है। इसलिए यह खबर भी नहीं है या जैसी खबर है, वैसे छपी नहीं है। खबर यह भी है कि पहले गैस के लिए लाइन लग रही थी और सरकार कह रही थी कि कोई संकट नहीं है। प्रधानमंत्री ने भी कहा था कि पैनिक क्रिएट किया जा रहा है। अब सरकार ने कहा कि पेट्रोल का संकट नहीं है तो पेट्रोल पंपों पर लाइन लग गई है। आज नवोदय टाइम्स की लीड सबसे अलग है। शीर्षक है, होर्मुज से हमारे और जहाज निकले। उप शीर्षक है, सर्वदलीय बैठक में जय शंकर ने पाक को दलाल राष्ट्र बताया।

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