गलगोटिया को विश्व का पहला आश्चर्य घोषित किया जाना चाहिए। स्टूडेंट जाएंगे प्रधानमंत्री की रैली में और इसके बदले मिलेगी दो दिन की अटेंडेंस! रैली में आना जरूरी है, क्लास में आना जरूरी नहीं है। अब ऐसे स्टूडेंट चीन से रोबोट न मंगाएं तो क्या करें?
-कृष्ण कांत

प्रधानमंत्री Narendra Modi के कार्यक्रमों में जुटने वाली भीड़ को लेकर एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। आरोप है कि हालिया उद्घाटन समारोह में न सिर्फ स्कूली छात्रों को बुलाया गया, बल्कि लोगों को पूड़ी-सब्ज़ी और अन्य व्यवस्थाओं के लालच के साथ कार्यक्रम में लाया गया।
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अब रैलियों में “जनता” नहीं, बल्कि “अटेंडेंस” जाती है—जहां बसों में भरकर भीड़ लाई जाती है, खाने-पीने का इंतज़ाम किया जाता है और इसे जनसमर्थन के तौर पर पेश किया जाता है। आलोचकों का कहना है कि अगर समर्थन स्वतःस्फूर्त होता, तो भीड़ जुटाने के लिए इस तरह के इंतज़ाम नहीं करने पड़ते।
पोस्ट में यह भी तंज कसा गया है कि “भीड़, ताली और थाली” अब एक तयशुदा स्क्रिप्ट बन चुकी है—जहां असली मुद्दे पीछे छूट जाते हैं और कैमरों के सामने सिर्फ भीड़ का प्रदर्शन किया जाता है। हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस पूरे मुद्दे ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या राजनीतिक रैलियां अब जनभावना का आईना हैं या सिर्फ मैनेज किए गए इवेंट?
गल्गोटिया यूनिवर्सिटी के छात्रों को जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट उद्घाटन में शामिल होने के लिए निर्देश दिए गए हैं, जहां नरेंद्र मोदी की मौजूदगी रहेगी। छात्रों को कल सुबह 7:45 बजे यूनिवर्सिटी पहुंचने और वहां से कार्यक्रम के लिए रवाना होने को कहा गया है। खास बात: यदि छात्र इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं, तो उन्हें 2 दिन की अटेंडेंस देने की बात भी कही गई है।
सचिन गुप्ता-
खैर, गलगोटिया यूनिवर्सिटी का ये मैसेज पढ़िए। स्टूडेंट्स को कल सुबह 7.45 पर यूनिवर्सिटी पहुंचने और फिर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उदघाटन में कंपलसरी चलने का हुक्म दिया गया है।
नीचे की 2 लाइन भी पढ़ी जाएं !!


नोएडा के एक और कॉलेज का मैसेज पढ़िए (ऊपर)। स्पष्ट कह रहे हैं कि जो स्टूडेंट्स नोएडा में PM मोदी के कार्यक्रम में जाएगा, उसको प्रशंसा पत्र और दो दिन की अटेंडेंस दी जाएगी। बाकायदा एक Google फार्म भरवाया जा रहा है, जिसमें कहा गया है कि स्टूडेंट्स ड्रेस नहीं, सादे कपड़ों में आएं।
रवीश कुमार-
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में युवाओं को ले जाने पर एक सीरीयस नोट-
क्या नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोग ख़ुद से प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में नहीं जा सकते हैं? एक्स पर लोग कॉलेज से लेकर प्रशासन का आदेश पत्र पोस्ट कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री की सभा में पकड़ कर ले जाया जा रहा है। अब हर बार वोट से पहले नोट तो नहीं मिलेगा, कभी-कभी पूड़ी सब्ज़ी के बदले भी जाना पड़ेगा। फ्री बस राइड मिल रही है। मोदी मोदी करने का अवसर मिल रहा है। घर के बगल में एयर पोर्ट मिल रहा है। अगर नोएडा और ग्रेनो के लोग ख़ुद से जाते तो आज कॉलेजों से छात्रों को पकड़ कर PM के कार्यक्रम में नहीं ले जाना पड़ता। छात्रों को भी पता चलना चाहिए कि उन्हें केवल यूनिवर्सिटी ने नहीं पकड़ रखा है, प्रशासन भी उन्हें पीएम की रैली में बिठाने के लिए पकड़ सकता है।
प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों में लोग नहीं आते हैं। इसके लिए लाभार्थी को लाने का सिस्टम विकसित कर लिया गया है ताकि हमेशा लगे कि कुर्सियाँ भरी हैं और राष्ट्र को प्रेरित करने वाला भाषण चल रहा है। लाभार्थी के अलावा प्राइवेट कॉलेजों के छात्रों को ले जाने का यह आइडिया अच्छा है। कई बार लाभार्थी बोर हो जाते हैं। इतनी बार पकड़ कर ले जाए जाते हैं कि ठीक से ताली नहीं बजाते। तो इसमें प्राइवेट कॉलेजों के छात्रों को मिला देने से उत्साह बरकरार रहेगा।वैसे भी यहां के ज़्यादातर कॉलेजों में पढ़ाई घटिया होती है। यह बात छात्रों को भी पता है। आख़िर यह कैसे हो सकता है कि आप घटिया पढ़ाई के बाद इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट की डिग्री भी ले लें और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में बोरिंग भाषण भी न सुनें।
प्रधानमंत्री को चाहिए कि इसमें शिक्षा मंत्री की भूमिका तय करें कि उनके कार्यक्रम में IIT और IIM के छात्रों को भी पकड़ कर लाना चाहिए। जो लेवल हो गया है, क्या पता यहां के छात्र भी दौड़े दौड़े चले जाएं कि उन्हें ग.गो.यु की तरह समझा जाने लगा है। जिस भी यूनिवर्सिटी की चर्चा चल रही है अगर उसने बोरिंग भाषण सुनने के बदले में दो दिन का अटेंडेंस देने का वादा किया है तो कमाल की बात है। अच्छी यूनिवर्सिटी हमेशा अपने छात्रों के नुकसान में भी फायदा कराती है। दिन भर तो रैली चलेगी नहीं। अब तो भारत में आठ-आठ घंटे की फिल्में बन रही है। डेढ़ दिन की छुट्टी आराम से निकल जाएगी।
प्रधानमंत्री को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि उनकी सभा में लोग आए हैं या लाए गए हैं। फिर भी प्रशासन से मांग करता हूँ कि इसका खंडन तो करे कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में युवाओं को पकड़ा नहीं जा रहा है, युवाओं को प्रधानमंत्री ने प्रेरित किया है, इसलिए जा रहे हैं। यह युवा अंग्रेजी गाने नहीं सुनता, मन की बात सुनता है। आज साक्षात भी सुनेगा। मेरे हिसाब से प्रशासन को करना यह चाहिए कि पकड़े गए इन युवाओं को प्रधानंमत्री के कार्यक्रम के बाद यमुना खादर के इलाके में ले जाना चाहिए और एयरपोर्ट की याद में वृक्षारोपण के काम में लगा देना चाहिए। या फिर सरकार का कोई राज्य मंत्री ज़िले का दौरा कर रहा हो तो उसमें भी इन युवाओें को खपाया जा सकता है। प्रशासन को भी कुछ सोचना चाहिए कि इन युवाओं को कॉलेज ने दो दिन की छुट्टी दी है तो उसका राष्ट्र निर्माण में कैसे सदुपयोग हो सकता है।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी को भी मांग करनी चाहिए कि चूंकि युवाओं को पकड़ कर लाया गया है, इसमें जनता का पैसा ख़र्चा हुआ है तो प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के बाद उन्हें भी भाषण देने का मौका मिलना चाहिए।प्रधानमंत्री को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उनका भाषण केवल एयरपोर्ट पर नहीं हो, पकड़ कर लाए गए युवाओं को भजन क्लबिंग का भी महत्व बताना चाहिए। आज अगर पूर्व की सरकारों ने नोएडा ग्रेटर नोएडा में घटिया कॉलेजों का अंबार नहीं पैदा किया होता तो प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए लोग नहीं मिलते। प्रधानमंत्री को अपने कार्यक्रम में विपक्ष की पुरानी सरकारों का भी शुक्रिया अदा करना चाहिए।
नोएडा ग्रेटर नोएडा में ही तो गोदी चैनलों के मुख्यालय हैं। इनके लोगों को भी पकड़ कर कार्यक्रम में ले जाना चाहिए। वैसे भी दफ्तर में बैठ कर ऐंकर ताली बजाएंगे तो क्यों न एयरपोर्ट पर जाकर ताली बजाएँ। क्या इन चैनलों के डिबेट शो में इन्हीं यूनिवर्सिटी के छात्र ताली बजाने के लिए नहीं लाए जाते? जब घटिया कॉलेजों के युवा गोदी चैनलों के डिबेट में जा सकते हैं तो प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में क्यों नहीं?
जिस यूनिवर्सिटी का आदेश पत्र वायरल किया जा रहा है, कि उसके छात्रों को प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में जाना है, वह भीतर ही भीतर गदगद हो रही होगी कि उसके बिना प्रधानमंत्री का कार्यक्रम सफल नहीं हो सकता है। आज के दौर में यह किसी भी यूनिवर्सिटी के लिए गर्व का विषय हो गया है।आप उनके करीब जाकर देखिएगा, इस समय यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अपने आप को पीएम का क्लोज़ समझ रहे होंगे। क्लोज़ होना ही कॉलेजों का एकमात्र काम है। यह यूनिवर्सिटी यह काम ठीक से कर रही है। वही कर रही है जो सब कर रहे हैं। ग.गो.यू, भ.गो.यू,स.पो.यू, प.सो.यू कोई भी यू हो।


