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आज के अखबार : महाभियोग के साये में चुनाव, युद्ध के संकट में देश और सेवक का विकसित भारत ‘अभियान’

संजय कुमार सिंह

आज जब युद्ध का नया मोर्चा खुलने, डॉलर की कीमत 95 रुपए होने, हूती विद्रोहियों के भी युद्ध में कूदने जैसी खबरें हिन्दी अखबारों में प्रमुखता से हैं तो अंग्रेजी अखबार (टाइम्स ऑफ इंडिया) बता रहा है कि सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क कम कर दिया है ताकि उपभोक्ताओं और तेल कंपनियों की रक्षा हो सके। इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि यह सार्वजनिक तेल कंपनियों के लिए अहम राहत है जबकि द हिन्दू ने बताया है कि इससे कीमत नहीं बदलेगी। हिन्दुस्तान टाइम्स ने बताया है कि निर्यात पर लेवी ठोंक दी गई है। हालांकि, लीड का शीर्षक है, ट्रम्प ने होर्मुज खुलवाने की तारीख बढ़ाई तो इजराइल ने ईरान के परमाणु केंद्रों पर हमला कर दिया। इन खबरों के बीच प्रधानमंत्री ने विकसित भारत का लक्ष्य पाने के लिए एकता की अपील की है। आप जानते हैं कि युद्ध से भारत का कैसा और कितना संबंध है। उसमें सरकार को एक मानिए तो पूरी सरकार का और नरेन्द्र मोदी को सरकार से अलग या ऊपर मानिए तो वे पूरे मामले के लिए जिम्मेदार समझे जा रहे हैं। अभी तक उन्होंने यह नहीं बताया है कि ईरान पर इजराइल-अमेरिका हमले से पहले वे इजराइल किस लिए गए थे और लौटने के बाद हमला हुआ तो उन्हें हमले की या हमले के बारें में जानकारी कब मिली।

अभी तक इस सबंध में सरकार की जानकारी का पता नहीं है। एपस्टीन फाइल वाले हरदीप पुरी के खिलाफ कार्रवाई का पता नहीं है और अभी तक सरकार ने यह नहीं बताया है हमले की जानकारी प्रधानमंत्री को पहले से थी या उनके वापस आने पर युद्ध छिड़ा। जो भी हो, माई फ्रैंड ट्रम्प के साथ इजराइल के नेतन्याहू से प्रधानमंत्री की दोस्ती सबको मालूम है और हमें अगर युद्ध का अभिशाप झेलना पड़ रहा है तो कुछ हद तक प्रधानमंत्री की भी जिम्मेदारी है लेकिन भाजपा नेताओं ने मुंह सिल लिए हैं। मीडिया ने भी प्रधानमंत्री के कहे को भरपूर प्रचार दिया है और प्रधानमंत्री बेरोजगारी, गरीबी, अशिक्षा और स्वास्थ्य की नाम मात्र की सुविधा के साथ विकसित भारत के अभियान और नए अध्याय की बात कर रहे हैं जबकि बात उसपर होनी चाहिए तो जो एनसीईआरटी की कक्षा आठ की किताब से हटाया गया है। जो भी हो, प्रधानमंत्री का प्रचार वैसे नहीं छपा है जैसे अब तक की खबरें छपती रही है। दि एशियन एज की लीड के अनुसार, सरकार आम आदमी को खाड़ी युद्ध के बोझ से सुरक्षित करने के लिए काम कर रही है। नवोदय टाइम्स की खबर के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि नोएडा एयरपोर्ट विकसित भारत – विकसित उत्तर प्रदेश अभियान का नया अध्याय है। लेकिन देशबन्धु की खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया के हालात को लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक बैठक की। उन्होंने कहा कि सभी राज्य टीम इंडिया की तरह मिलकर काम करें और अपनी तैयारियां मजबूत रखें। हवाई अड्डे के उद्घाटन की नवोदय टाइम्स की खबर लीड नहीं है और लीड का शीर्षक है, पश्चिम एशिया युद्ध का नया मोर्चा खुला और यमन ने पहली बार इजराइल की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जाहिर है कि ऐसा हुआ है तो यह युद्ध को लेकर गंभीर होने का संदेश है। अंग्रेजी के कई अखबारों में युद्ध की खबर लीड है जबकि कोलकाता से प्रकाशित होने वाले द टेलीग्राफ में पश्चिम बंगाल चुनाव की खबर लीड है।

इसके बावजूद अमर उजाला की आज की लीड के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सबसे बड़े हवाई अड्डे के पहले चरण समेत कार्गो हब के उदघाटन के मौके पर कहा कि भारत (अपने)  नागरिकों के भरोसे युद्ध संकट का पूरी ताकत से मुकाबला कर रहा है और (इसलिए) उन्होंने राजनीति बंद करने की अपील की है। खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दलों से कहा है कि संकट के समय वे ऐसी बातें करने से बचें जो देश के लिए नुकसानदेह हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतों को जनता कभी माफ नहीं करेगी। हालांकि, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पश्चिम  बंगाल को साधना जारी रखा है और लीड का शीर्षक है, दीदी पर ‘विक्टिम कार्ड’ का हमला। खबर के अनुसार अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस की के खिलाफ चार्ज शीट जारी की है। समझना मुश्किल नहीं है कि प्रधानमंत्री की नजर भी चुनाव पर होगी और वे विकसित भारत – विकसित उत्तर प्रदेश की बात यूं ही नहीं कर रहे हैं। गैस के बाद पेट्रोल की लाइन में लग चुकी जनता को बताया जा चुका है कि आने वाला संकट कोविड से भी बड़ा है और वैसे ही निपट लेंगे जैसे कोविड से निपटा था। इसके बाद कहने, करने या समझने को कुछ रह नहीं जाता है। फिर भी अमर उजाला ने पहले पन्ने पर हवाई अड्डे के उद्घाटन की खबर छापी है तो दूसरे पहले पन्ने की लीड के अनुसार, ईरान के समर्थन में हूती विद्रोही भी युद्ध में कूदे।

नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर एक खबर का शीर्षक है, असम में उग्रवाद, धमाके और गोलीबार बंद। यह खबर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हवाले से है।  खबर के अनुसार, अमित शाह ने रोड शो में तीसरी बार सरकार बनाने का दावा किया है। मुद्दा यह है कि कश्मीर में चुनाव थे तो वहां आतंकवाद ही खत्म हो गया था। बाद में ऑपरेशन सिन्दूर से वोट बटोरने की कोशिश हुई। उसे ट्रम्प की अपील पर बंद कर दिया गया और आज तक पचा नहीं चला कि युद्ध विराम की घोषणा ट्रम्प ने किस अधिकार से की। दिलचस्प यह भी है कि उसी ट्रम्प ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया। और जो स्थितियां हैं उनमें लग रहा है कि अमेरिका ने सोचा होगा कि ईरान के मामले में उसे वेनेजुएला की तरह आसानी से समफलता मिल जाएगी। पर ऐसा हुआ नहीं। अमेरिका फंसा हुआ है और रोज ईरान को धमकी देकर अपनी तारीख बढ़ा रहा है। इधर, जम्मू कश्मीर में एक लश्कर आतंकी की संपत्ति कुर्क किए जाने की खबर है और कश्मीर चुनाव के समय उसे आतंकवाद से मुक्त करने का दावा किया गया है। जब महीनों पहले आतंकवाद खत्म हो चुका है तो अब आतंकी की संपत्ति कुर्क करने की जरूरत क्यों है। अमर उजाला की एक खबर के अनुसार, अमेरिकी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान अब भी आतंकियों का गढ़ है। रिपोर्ट में 15 से अधिक आतंकी गिरोह सक्रिय होने की सूचना है। दि एशियन एज की खबर के अनुसार, अमित शाह ने टीएमसी सरकार पर डर, भ्रष्टाचार और झूठ का आरोप लगाया है। ईडी के छापे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कार्रवाई की भी आलोचना अमित शाह करते हैं लेकिन  ईडी की ओर से अभी तक यह कहा गया होता कि हम ऐसी सूचनाएं जब्त क्यों करते, इन सूचनाओं की हमें जरूरत ही नहीं थी, हमें तो आरोपों से संबंधित सबूत चाहिए थे, तृणमूल ने हमें गलत समझा, हम भाजपा से अलग, अपना काम कर रहे थे। यह भले ही सरकार के निर्देश या मंजूरी पर था या हमारा स्वतंत्र निर्णय था। हम जिन आरोपों/सूचनाओं की जांच कर रहे थे वे ऐसी थीं कि हमारे लिए उसी समय छापा मारा जरूरी था या समय तय करने का हमारा निर्णय गलत रहा  या ईडी का स्वतंत्र निर्णय था – तो माना जा सकता था कि ईडी स्वतंत्र रूप से काम कर रहा था। पर ऐसा कुछ मेरी जानकारी में नहीं है। 

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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