नाज़िया खान-
अभी प्रयागराज के एक जाने-माने न्यूरोसर्जन पर एक 24 साल की स्टूडेंट ने मोलेस्टेशन का केस किया है। उसका आरोप है कि बाक़ी पेशेंट्स को जाने का कहकर डॉक्टर ने दोनों गेट बंद कर लिए, उसे पूरे कपड़े उतारने को कहा और ग़लत तरीक़े से टच किया। इसके बाद वह तुरंत वहाँ से बाहर निकल गई।
केस की पूरी डिटेल नहीं पता इसलिये उस पर नो कमेंट्स। पर जो बातें पेशेंट्स को जानना ज़रूरी हैं, ख़ासकर बाहर रह रही लड़कियां, ऐसी महिलाएं, जिनके साथ कोई जाने वाला न हो या वे ख़ुद अकेले जाना प्रिफर करती हों।
मेल डॉक्टर द्वारा फीमेल पेशेंट का मेडिकल एक्ज़ामिनेशन करने के कुछ नियम और नैतिक दिशा-निर्देश हैं। ये पेशेंट की प्रिवेसी, डिग्निटी और पेशेंट के साथ-साथ डॉक्टर्स की सेफ्टी के लिये भी ज़रूरी हैं, ताकि उन पर भी ऐसे आरोप न लगें। ये दोनों पक्षों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं।
जब भी कोई पुरुष डॉक्टर किसी लेडी पेशेंट की इंटीमेट एक्ज़ामिनेशन (जैसे ब्रेस्ट, पेल्विक, जनाइटल, रेक्टल या कपड़े उतारकर) जांच करता है, तो एक फीमेल अटेंडेंट जैसे स्टाफ नर्स, रेसिडेंशियल डॉक्टर या किसी और महिला स्टाफ की मौजूदगी अनिवार्य या बहुत strongly recommended की जाती है।
आजकल तो कई बड़े अस्पतालों में यह स्पष्ट रूप से नियम है कि महिला मरीज़ की फिज़िकल एक्ज़ामिनेशन पुरुष डॉक्टर द्वारा करते समय महिला अटेंडेंट की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।
दूसरी बात है, पेशेंट की कंसेंट। एक्ज़ामिनेशन से पहले डॉक्टर को पेशेंट को पूरी डिटेल बताना चाहिए कि क्या जांच होगी, क्यों ज़रूरी है, और इसमें क्या शामिल होगा।
पेशेंट की रिटन कंसेंट हो तो बेटर। अगर पेशेंट असहज है, कम्फर्टेबल नहीं है, तो वह फीमेल डॉक्टर की मांग कर सकती है।
प्रिवेसी और डिग्निटी का ध्यान रखना ज़रूरी है। पेशेंट को कपड़े बदलने के लिए पर्याप्त प्रिवेसी दी जानी चाहिए। जांच के दौरान अनावश्यक रूप से शरीर के हिस्से नहीं खोलने चाहिए। प्रॉपर गाउन देना चाहिये। जांच के दौरान हर स्टेप के बारे में बताना चाहिए।
मेडिकल एथिक्स के अनुसार, डॉक्टर को पेशेंट की गोपनीयता बनाए रखनी होती है। सामान्य रूटीन चेक-अप (जैसे ब्लड प्रेशर, हाथ-पैर) में अक्सर ज़रूरी नहीं होता, लेकिन अगर मरीज़ चाहे तो उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
मेडिकल काउंसिल के स्पष्ट दिशानिर्देश हैं कि मरीज़ की डिग्निटी और प्रिवेसी का सम्मान अनिवार्य है। कई अस्पतालों में स्पष्ट निर्देश हैं कि पुरुष डॉक्टर/टेक्नीशियन द्वारा महिला के ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, MRI आदि जांच करते समय भी महिला स्टाफ मौजूद रहे, ताकि कोई ग़लतफहमी या शिकायत न हो।
अगर फीमेल डॉक्टर उपलब्ध हो, तो उसे प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन इमरजेंसी या विशेषज्ञता के मामले में मेल डॉक्टर भी कर सकते हैं, बस फीमेल अटेंडेंट के साथ।
यह बतौर पेशेंट आपका अधिकार है। आप फीमेल स्टाफ की मांग कर सकती हैं। आप कम्फर्टेबल न लगने पर जांच से इन्कार कर सकती हैं या दूसरा डॉक्टर चुन सकती हैं।
परिवार के किसी महिला सदस्य या दोस्त को भी अटेंडेंट के रूप में रखा जा सकता है, लेकिन प्रायॉरिटी हॉस्पिटल स्टाफ को दी जाती है।
ये नियम मरीज़ और डॉक्टर दोनों की सुरक्षा के लिए हैं, ताकि कोई ग़लत आरोप या असुविधा न हो। प्राइवेट क्लीनिक्स में भी यही है। आप अपना कम्फर्ट और प्रिवेसी टॉप प्रायॉरिटी पर रखें।
मैंने अपने पेशेंट्स में अक्सर यही देखा है कि पेशेंट ख़ुद साथ आए अटेंडेंट को बाहर भेजने को कह देती हैं क्योंकि एक महिला के साथ दूसरी महिला सहज होती है। वे ख़ुद ही नहीं चाहतीं कि डॉक्टर के अलावा कोई और देखे। इसीलिये लेडी डॉक्टर्स के केस में यह मेंडेटरी नहीं है। फिर भी मैं पहले पूछ लेती हूँ, कंसेंट बेहद ज़रूरी है।
लड़की अगर माइनर है तो रूल्स और भी स्ट्रिक्ट हैं। माइनर्स की इंटिमेंट एक्ज़ामिनेशन अवॉयड ही की जानी चाहिये। पेनिट्रेटिव एक्ज़ामिनेशन बिल्कुल नहीं करना चाहिये, ज़रूरत लगे तो सरकारी हॉस्पिटल रिफर करें अगर फिज़िकल इंजरी या मेडिको लीगल केस की आशंका हो तो। इसमें NMC और POCSO की गाइडलाइंस लगती हैं तो रिस्क लेना ही नहीं चाहिये प्राइवेट प्रैक्टिशनर्स को। फिर भी इमरजेंसी में गार्जियंस की मौजूदगी में की जा सकती है।
तो कुल मिलाकर जब भी फिज़िकल एक्ज़ामिनेशन की ज़रूरत हो, फीमेल अटेंडेंट साथ रखें। उसके बाद भी कम्फर्टेबल नहीं हैं तो मना कर दें। जहाँ कम्फर्टेबल और सेफ लगे, वहीं करवाएं।

प्रयागराज के जाने-माने न्यूरो सर्जन डॉ. कार्तिकेय शर्मा पर बैडटच की FIR दर्ज की गई है। BA की छात्रा ने उन पर छेड़खानी का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि डॉक्टर ने जबरन उसके कपड़े उतरवाए। फिर गंदी नीयत से छुआ। सिविल लाइंस पुलिस ने छात्रा की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया। छात्रा को मेडिकल के लिए भेजा गया है।
घटना बुधवार रात 10.30 बजे क्लाइव रोड इलाके की है। यहां डॉक्टर कार्तिकेय शर्मा (55) का घर है। डॉ. कार्तिकेय घर पर ही क्लिनिक चलाते हैं। देर रात तक मरीज देखते हैं। धूमनगंज की रहने वाली 24 साल की BA की छात्रा अपने भाई के साथ माइग्रेन के इलाज के लिए पहुंची थी। छात्रा को 74वां नंबर मिला था।
भाई का कहना है कि मुझे जरूरी काम था। इसलिए बहन को छोड़कर चला गया था। बाद में लौटा तो हंगामा हो रहा था। बहन के पास पहुंचा तो उसने पूरी बात बताई। फिर घरवालों और पुलिस को सूचना दी। -राजेश साहू, पत्रकार, दैनिक भास्कर


