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4PM, मोलिटिक्स, नेशनल दस्तक, राजीव निगम, मोहम्मद जुबैर इत्यादि की पाबंदी पर भड़का डीयूजे!

नई दिल्ली। दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ) ने केंद्र सरकार द्वारा आईटी नियमों में प्रस्तावित नए संशोधनों और लेबर कोड लागू करने की योजना पर कड़ा विरोध जताया है। संगठन का कहना है कि ये कदम डिजिटल मीडिया पर सेंसरशिप बढ़ाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने की कोशिश हैं।

DUJ के अनुसार, सरकार पहले से ही मुख्यधारा के मीडिया, खासकर टीवी चैनलों, पर प्रभाव डाल रही है और अब ऑनलाइन मीडिया को भी नियंत्रित करना चाहती है। 30 मार्च 2026 को जारी ड्राफ्ट आईटी नियमों के तहत न सिर्फ समाचार प्रकाशित करने वाले संस्थानों बल्कि सोशल मीडिया पर खबरें पोस्ट करने, टिप्पणी करने, कार्टून या व्यंग्य वीडियो साझा करने वाले आम लोगों को भी दायरे में लाने का प्रस्ताव है। इससे पत्रकारों, कंटेंट क्रिएटर्स और आम यूजर्स पर गंभीर असर पड़ेगा।

संगठन ने यह भी कहा कि फरवरी 2026 में किए गए संशोधनों के तहत कंटेंट हटाने का समय घटाकर 2-3 घंटे कर दिया गया, जो न तो प्लेटफॉर्म्स के लिए और न ही यूजर्स के लिए व्यावहारिक है।

DUJ ने हाल के महीनों में बढ़ती कार्रवाई पर चिंता जताई। संगठन के मुताबिक, 4PM News चैनल को ब्लॉक किया गया, Molitics और National Dastak के फेसबुक पेज हटाए गए, व्यंग्यकार राजीव निगम की सामग्री पर कार्रवाई हुई, मोहम्मद जुबैर का X अकाउंट ब्लॉक किया गया और कई यूट्यूब चैनलों का मोनेटाइजेशन बंद किया गया। इसके अलावा, प्रधानमंत्री से जुड़े व्यंग्यात्मक कंटेंट को भी कानूनी मांग के आधार पर हटाया गया। DUJ का कहना है कि इन कार्रवाइयों में पारदर्शिता की कमी है और प्रभावित लोगों के पास कोई आसान कानूनी उपाय भी नहीं है।

संगठन ने चेतावनी दी कि ये संशोधन लोकतांत्रिक असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर चोट करेंगे। पहले से ही सार्वजनिक बहस और विरोध के लिए जगह सीमित होती जा रही है, और अब सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म्स भी दबाव में आ सकते हैं।

इसके साथ ही DUJ ने लेबर कोड्स को भी पत्रकारों के अधिकारों के लिए खतरा बताया। संगठन का कहना है कि नए श्रम कानूनों से पत्रकारों के वेतन, कामकाजी परिस्थितियों और अधिकारों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। DUJ लंबे समय से इन कोड्स का विरोध करता रहा है।

अंत में DUJ ने अपने सदस्यों और नागरिकों से अपील की है कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाएं। संगठन ने कहा कि लोकतंत्र और फ्री स्पीच की रक्षा के लिए सतर्क रहना जरूरी है।

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