फ़यान-
जुम्मा जुम्मा 8 दिन भी नहीं हुए Saurabh Dwivedi को Bollywood में आए हुए और आते ही भरी महफिल में Rajpal Yadav को नीचा दिखा दिया।
Rajpal Yadav – “मैं तो सोच रहा था पूरे विश्व में आजकल धुआं ही धुआं है। इतना युद्ध मचा हुआ है तो कहां बैठूं, क्या सोचूं। रुपया-डॉलर इतना ऊपर नीचे हो रहा है कुछ समझ में नहीं आ रहा है, बैठा-बैठा शांति-शांति यही कर रहा हूं।”
Saurabh Dwivedi – “राजपाल भाई डॉलर-रुपया कितना ही ऊपर नीचे हो आपको उतना ही रुपया लौटाने होंगे जितना का उधार है।”
उसके बाद तो बेचारे Rajpal Yadav का चेहरा ही बदल गया और जबरदस्ती हंसने लगे।
Rajpal – “नहीं नहीं मगर मसला तो सुन लो एक बार, मैं तो मसला ही सुनाना चाहता हूं।”
तभी Zakir Khan आए और बात संभाली। “मेरे ख्याल से मामला अदालत में है तो हम लोग जाने देते हैं। आप लोग अलग से डिस्कस कर लीजिए।”
Saurabh Dwivedi से तो ये उम्मीद नहीं थी। क्या Bollywood में अब ये mandatory हो गया है कि किसी के हालात पर हंसो और मजाक उड़ाओ?
सलमान खान का ट्वीट-
राजपाल भाई, आप 30 साल से काम कर रहे हैं और हम सबने आपको बार-बार इसलिए चुना है क्योंकि आप अपना काम अच्छी तरह जानते हैं और उसमें वैल्यू जोड़ते हैं। आपको काम की कोई कमी नहीं होगी, और इसी डॉलर रेट पर काम मिलता रहेगा—यही हकीकत है।
और एक बात याद रखिए, कभी-कभी बहाव में कुछ बातें निकल जाती हैं। अगर देना ही है तो दिमाग से सोचकर और दिल से काम कीजिए। डॉलर ऊपर जाए या नीचे, उससे क्या फर्क पड़ता है—आखिर देना तो भारत में ही है।
सिद्धार्थ अरोड़ा-

ऐसा भ्रम बनाया गया कि राजपाल जी बिचारे नशे में थे शायद, ईरान-अमेरिका, धड़ाम बड़ाम, ऑइल-टरमॉइल के बीच डॉलर-रुपया कह बैठे… सौरभ द्विवेदी पंचलाइन के साथ तैयार खड़े थे, बोले “डॉलर का रेट जो भी बने राजपाल भाई, आपको उतना ही पैसा लौटाना पड़ेगा जितना आपने उधार लिया था”
इसपर राजपाल यादव भी हँस दिए। फिर बोले “अरे यार बोलने तो दो मैं जो कहना चाह रहा हूँ”, फिर ज़ाकिर ने ऐसे बात संभाली कि मानों सच में सौरभ ने कुछ आउट ऑफ द स्क्रिप्ट बक दिया हो, जबकि ध्यान दें तो ये सब scripted था। बस लाइव चल रहा था तो स्क्रिप्ट में थोड़ा ट्विस्ट बन गया था।
इसी स्क्रिप्ट का हिस्सा, राजपाल से ठीक पहले एक ऑफ शोल्डर हिरोइनी थी जिसको चिंता थी कि स्ट्रेट ऑफ हार्मोज़ की वजह से कहीं ऑलिव ऑइल की सप्लाई तो बंद नहीं हो जायेगी? अब भला कोई इतना डंब कैसे हो सकता है? ज़ाहिर है कि ये भी स्क्रिप्ट का हिस्सा था।
वैसे ही ये स्क्रिप्ट राजपाल के लिए थी। पर राजपाल के शुभचिंतक, सोसाइटी सुधारने के ठेकेदार, भाषाई मर्यादा के फादर डिकोस्टा अचानक कूद पड़े बीच में, बोले न जी, सौरभ पर्सनल बातें लेकर कैसे आ गया?
भाई जबतक पर्सनल बातें नहीं होतीं तबतक इस शो को क्लिप्स आप देखते भी तो नहीं! स्क्रीन अवॉर्ड्स लाइव करने का आइडिया किसका था? सौरभ का! ज़ाकिर को आलिया के साथ बुलाने का आइडिया किसका था? एक्स-लल्लनटॉप का, फिर राजपाल पर टोंट या धुरंधर को लेकर ‘जली न’ जैसी स्क्रिप्टिंग भी तो सौरभ और ज़ाकिर की कलम का हिस्सा ही थीं… बस लाइव शो था तो वर्ड-टू-वर्ड dialogue की बजाए क्यू इस्तेमाल हुआ…
क्यू समझते हैं आप? कालिया तभी ‘सरदार दो’ बोलेगा, जब गब्बर उसे क्यू देगा कि ‘कितने आदमी थे?’
यही क्यू दिया राजपाल ने डॉलर और रुपये की बात करके, वर्ना उनके पास बोलने को था क्या? ऐसा ही cue मनोज बाजपायी साहब के पास था, जब उन्होंने सौरभ को टोक दिया था कि “भाई अगर तुम सबका इन्ट्रोडक्शन वैसे ही लल्लनटॉप टाइप देने वाले हो तो रुको मैं पटना जाकर, लिट्टी खाकर आ जाता हूँ”
अफ़सोस कि ये बेइज्ज़ती उतनी वाइरल नहीं हुई, वर्ना मकसद इसका भी वही था जो राजपाल के उधार वाले जोक का था।
इसलिए हे मित्रगण, हम उस सिनेयुग में जी रहे हैं जहाँ ‘इस फ़िल्म के सभी पात्र काल्पनिक हैं’ लिखने के बाद सब सच्चाई दिखाई जाती है और reality show में सबसे ज़्यादा scripts, नकली ड्रामा और झूठ-मूठ के फ़साद create किये जाते हैं।
भारत क्या हॉलिवुड तक में, जितनी परफेक्ट स्क्रिप्ट reality show की लिखी जाती है, उतनी तो फ़िल्म की भी नहीं। इसलिए माफ़ कर दो सौरभ को, भाई अभी पत्रकारिता से निकलकर फ़िल्मी चोंचलेबाजी सीखने के क्रम में हैं।
बाद बाक़ी राजपाल यादव भी चाहते हैं कि भले बदनामी हो जाए पर वह चर्चा में बने रहें। अभी देखना उनके लगातार कई इंटरव्यूज़-पॉडकास्ट्स देखने को मिलेंगे।
पूरे प्रकरण पर राजपाल यादव का बयान!


