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सियासत

CEC से सवाल पूछने पर भाविका कपूर के ख़िलाफ़ एफआईआर, अकाउंट भी बंद, क्या असहमति को डराया जा रहा है?

देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर एक बार फिर बहस तेज है। सोशल मीडिया पर सवाल उठाने को लेकर एक यूज़र ने दावा किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर टिप्पणी करने के कारण उसके खिलाफ अलग-अलग राज्यों में FIR दर्ज की गई हैं। साथ ही, उसके अकाउंट को ब्लॉक किए जाने और लगातार नोटिस मिलने को लेकर उसने इसे डराने और असहमति की आवाज दबाने की कोशिश बताया है, जिससे लोकतंत्र और संस्थाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


भाविका कपूर-

मुझे X (Twitter) की ओर से एक ईमेल मिला है, जिसमें बताया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के आचरण पर सवाल उठाने को लेकर मेरे खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

यह तीसरी बार है जब मुझे FIR को लेकर ईमेल मिला है—दो बिहार में और एक दिल्ली में। तीनों ही मामले उन पोस्ट से जुड़े हैं, जिनमें मैंने मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर ज्ञानेश कुमार के आचरण पर सवाल उठाए थे।

ये तीनों FIR मेरे हैंडल @bhavikakapoor5 से जुड़ी हैं, जिसे भारत में पहले ब्लॉक करने का आदेश दिया गया था और बाद में वह पूरी तरह गायब हो गया। मुझे अब तक यह नहीं पता कि मेरे अकाउंट के साथ क्या हुआ। इसके बावजूद मुझे डराने और मेरी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

अगर जनता Election Commission of India पर सवाल उठाती है, तो Bharatiya Janata Party को इससे समस्या क्यों है? आखिर जनता को डराने की कोशिश क्यों की जा रही है?

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