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रामदेव-बालकृष्ण की संपत्ति पर खोजी रिपोर्ट के लिए धीरज मिश्रा को मिला दानिश सिद्दीकी जर्नलिज्म अवार्ड!

आशुतोष पांडेय-

इस वर्ष का दानिश सिद्दीकी जर्नलिज्म अवॉर्ड प्रसिद्ध पत्रकार धीरज मिश्रा को मिला है. यह पत्रकारीय मूल्यों के प्रति सम्मान है. यह अवॉर्ड रामदेव और उनके सहयोगी बालकृष्ण के साम्राज्य का पता लगाती उनकी खोजी रिपोर्ट के लिए दिया गया है.

दानिश सिद्दीकी ने अपने पत्रकारीय मूल्यों से भारतीय पत्रकारिता में एक लंबी लकीर खींची है. उन्होंने अपनी पत्रकारिता में वैसा ही कटु दृश्य प्रस्तुत किया जैसा उन्होंने देखा. हालांकि कवि भवानीप्रसाद मिश्र ने लिखा है-

आसमान जैसा दिखता है
वैसा नहीं है
और न धरती
जैसी दिखती है वैसी है
ठीक नहीं कह सकता कोई
वह कैसा है यह कैसी है

उनकी हत्या तालिबान के लड़ाकों ने उस समय किया जब वे अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की वापसी और काबुल की ओर बढ़ते तालिबानी लड़ाकों को कवर कर रहे थे. भारत के युवा पत्रकारों, खासकर हिंदी पट्टी के गमछावादी पत्रकारों को कम बोलना और ज्यादा काम करना चाहिए.

इंटरव्यू तो आजकल शीर्ष नेता, वकील और अनिल अग्रवाल जैसे उधोगपति भी कर रहे हैं. इंटरव्यू पत्रकारिता नहीं है, बल्कि यह प्योर प्रचार है. बहरहाल, दानिश सिद्दीकी अवॉर्ड इसलिए और प्रतिष्ठित हो जाता है कि इसमें सम्मानित पत्रकार को कोई राशि नहीं दी जाती है. जो पत्रकार संस्थागत पत्रकारिता करते हैं, उनके लिए यह सम्मान मूल्यवान हो जाता है.

धीरज मिश्रा को इस सम्मान के लिये हार्दिक शुभकामनाएं. यह सब कहते-लिखते हुए मुझे गोस्वामी तुलसीदास याद आ गए- ‘कबित विवेक एक नहीं मोरें।’

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