मेरठ के मंडलायुक्त रहे IAS ह्रषिकेश भास्कर यशोद ने सुप्रीम कोर्ट के “सेन्ट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण आदेश” के खिलाफ “प्रमुख नेताओं” के दबाव में एक आर्डर जारी किया जिसमें “ध्वस्तीकरण अब नहीं होगा” लिखा गया था। प्रमुख सचिव आवास पी. गुरूप्रसाद ने SC को बताया- “कमिश्नर के आर्डर की वजह से विभाग SC के आदेश का अनुपालन नही कर सका.”
पूर्व कमिश्नर ने अपने ही आदेश को “मीटिंग की मिनिट्स” बताकर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की. IAS को आईना दिखाते हुए SC के जज ने कमिश्नर का आर्डर अदालत में ही पढ़ दिया। कहा- “आप इसे मिनिट्स कहते है, आपको आर्डर और मिनिट्स की समझ नही है। आपने यह आर्डर कैसे पास किया? किसने आपको ऑथोराइज किया इसके लिए?”
“आपको यह मीटिंग करने, आर्डर करने के लिए किसने कहा. आपको इस कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराना था। आपने इस अदालत को चुनौती दी है।”
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IAS ह्रषिकेश भास्कर यशोद इन दिनों आपदा प्रबन्धन विभाग देख रहे हैं। यहाँ का क्या हाल है, बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार सत्येंद्र पी एस-
मैं अक्सर कहता हूँ कि उत्तर प्रदेश सरकार भाजपा या योगी आदित्यनाथ नहीं, बल्कि भ्रस्ट अधिकारी चला रहे हैं. प्रशासन से मुख्यमंत्री जी का नियंत्रण खत्म हो चुका है. योगी जी जब मुख्यमंत्री बने तबसे इन्होंने राज्य का आपदा प्रबन्धन विभाग अपने हाथ में रखा हुआ है. इसका मकसद बहुत पवित्र है कि राज्य में कोई भी आपदा पीड़ित हो तो उसे सरकार की ओर से तत्काल सहायता मिल जाए. यह बहुत कम बजट का विभाग हुआ करता था इसलिए इसमें पनिशमेंट पोस्टिंग वाले आईएएस अधिकारियों की पोस्टिंग हुआ करती थी. लेकिन योगी ने इस विभाग को अपने हाथ में लिया तो तेज तर्रार आईएएस आये. गाँव गिराँव में सांप काटने, बिजली गिरने जैसी घटनाओं से मरने वाले लोगों को हफ्ते भर में पैसे पहुँचने लगे. इस पर खर्च बहुत मामूली होता है लेकिन हजारों परिवार को इससे राहत मिली, गरीब मजदूर, किसान के बीच योगी जी का जलवा हो गया. मुख्यमंत्री ने उत्साहित होकर एक अत्याधुनिक आपदा प्रबन्धन केंद्र की परिकल्पना की. उसी समय यह परिकल्पना हुई थी जब अमेरिका ने आतंकियों को टार्गेट करके मारा था और अमेंरिका के राष्ट्रपति उसे लाइव देख रहे थे. अधिकारियों ने उस तरह के आधुनिक केंद्र का प्लान भी बना लिया कि प्रदेश में कोई भी घटना हो तो लखनऊ में बैठकर उसका ओप्रेशन लाइव देखा जा सके. जैसे ही विभाग में बजट आया, भ्रस्ट अधिकारियों ने अपने हाथ में काम ले लिया. मोटी दलाली खाई जाने लगी. हालत यह हो गई कि योगी की नाक के नीचे लूट मची और आपदा प्रबन्धन की स्टेट ऑफ द आर्ट बिल्डिंग धूल खा रही है. शायद अब कोई दूसरा मुख्यमंत्री आएगा और इन आपराधिक अधिकारियों से मुक्ति मिलेगी तभी कुछ काम हो पायेगा. अभी आपदा प्रबन्धन विभाग देख रहे आईएएस अधिकारी के कारनामे देखिए. यह सज्जन पहले मेरठ के कमिश्नर थे. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया किसी अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए. इन्होंने आदेश जारी करके ध्वस्ततीकरण का आदेश ही रोक दिया. न्यायालय ने उनके विभागीय प्रमुख को तलब किया.. वह कोर्ट में गालियाँ सुन रहे हैं. वह कह रहे हैं कि मैं लाचार था, मेरे जूनियर ने यह कांड किया! ये हालत है योगी जी के प्रशासन का! जो विभाग वह खुद देख रहे हैं, उसका दो चार सौ करोड़ लूटने में भी भ्रस्ट अधिकारी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. ऐसे में जन्ता को घन्टा न्याय मिलेगा! वीडियो सुनिये… जो मैंने लिखा है, उससे कई गुना मजेदार और आनन्ददायक यह वीडियो है!
-सत्येंद्र पी एस (वरिष्ठ पत्रकार)


