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दिव्‍य हिमाचल के दो कर्मचारियों को जबरन इस्‍तीफे के मामले में लेबर कोर्ट से राहत

हिमाचल प्रदेश की दैनिक अखबार दिव्‍य हिमाचल के दो कर्मचारियों को मजीठिया वेजबोर्ड के तहत वेतनमान देने से बचने के लिए जबरन इस्‍तीफा लिए जाने के मामले में श्रम न्‍यायालय, धर्मशाला से बड़ी राहत मिली है। माननीय श्रम न्‍यायालय ने दोनों ही कर्मचारियों पुरुषोत्तम चंद और जितेंद्र कुमार के इस्‍तीफों को जबरन मानते हुए उन्‍हें न केवल इस्‍तीफा लिए जाने के समय से नौकरी पर बहाल करने के आदेश दिए हैं, बल्‍कि उन्‍हें जबरन इस्‍तीफा लिए जाने से लेकर अब तक का 50 फीसदी वेतन भी देने के आदेश पारित किए हैं। 

यह मामला वर्ष 2019 का है जब दिव्‍य हिमाचल अखबार के प्रबंधन ने मजीठिया वेजबोर्ड के तहत वेतनमान व बकाया एरियर देने से बचने के लिए अपने लगभग सभी कर्मचारियों के इस्तीफे लेकर उनकी सेवाओं को हिमाचल डिजीटल मीडिया नाम की नई कंपनी/फर्म में ज्‍वाइन करने को मजबूर किया था। हालांकि करीब 90 कर्मचारियों ने इस्तीफा देकर अपनी नौकरी बचाने का विकल्‍प चुना, मगर इन दो कर्मचारियों ने इस्‍तीफा लिए जाने के बाद नई कंपनी में शामिल किए जाने का विरोध किया और इसकी शिकायतें श्रम अधिकारियों के अलावा पुलिस स्‍टेशन में भी की थी। 

इस कानूनी लड़ाई में इन दोनों कर्मचारियों का साथ न्‍यूजपेपर इम्‍प्‍लाइज यूनियन आफ इंडिया ने दिया। यूनियन के तत्‍कालीन अध्‍यक्ष एवं मजीठिया वेजबोर्ड की लड़ाई लड़ रहे श्रमजीवी पत्रकार रविंद्र अग्रवाल ने इनके मामले के तकनीकी पहलुओं को ध्‍यान में रखते हुए उनको श्रम विभाग और श्रम न्‍यायालय में अपना पक्ष मजबूती के साथ रखने में पूरी सहायता की। श्रम न्‍यायालय में भी यूनियन के अधिकृत प्रतिनिधि के तौर पर रविंद्र अग्रवाल ने इन दोनों मामलों की पैरवी की। 

मिली जानकारी के अनुसार दिव्‍य हिमाचल प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कार्यरत पेज डिजाइनर जितेंद्र कुमार और प्रशोत्‍तम चंद को जुलाई/अगस्‍त 2019 को जबरन इस्‍तीफा लिखने को मजबूर किया गया और फुल एंड फाइनल सेटेलमेंट करके इनकी सेवाओं को कंपनी के ही निदेशकों द्वारा बनाई गई हिमाचल डिजीटल मीडिया नामक फर्म के तहत नए सिरे से शुरू करने का दबाव बनाया गया। ऐसा मजीठिया वेजबोर्ड के तहत संशोधित वेतनमान देने और पूर्व का एरियर हड़प करने के मकसद से किया गया था।

इन दोनों ने कुछ अन्‍य साथियों के साथ इसका विरोध किया तो इन्‍हें काम से हटा दिया गया। इसके बाद उन्होंने बाकी साथियों के साथ श्रम विभाग के आला अधिकारियों को पत्र लिखकर कंपनी की शिकायत कीं। साथ ही पुलिस थाना को भी इसके बारे में लिखित तौर पर सूचित किया जिसे डेली डायरी रिपोर्ट में दर्ज किया गया।

इसके अलावा दोनों ने कंपनी के सीएमडी को भी पत्र लिखकर प्रबंधन की इस कार्रवाई का विरोध किया, मगर इस पत्र को जानबूझ कर रिसीव ही नहीं किया गया। अन्‍य के अलावा यह साक्ष्‍य इन दोनों के पक्ष में गए हैं। वहीं कोर्ट में कार्यवाही के दौरान वादियों ने कंपनी से अपने जरूरी रिकार्ड के अलावा इस्‍तीफा देने वाले कर्मचारियों की सूची मांगी थी, जिसके तहत करीब 90 कर्मचारियों ने एक साथ लगभग एक ही तिथि को इस्‍तीफा दिया था, जो इस फैसले का एक मजबूत आधार बना। इसके अलावा कंपनी की ओर से इन दोनों के कर्मचारी की परिभाषा में ना आने के तर्क भी दिए गए, जो सिद्ध नहीं हो पाए।

देखें आदेश…

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