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स्वतंत्र पत्रकारिता पर पाबंदी वाले नियमों के खिलाफ छह प्रेस संगठनों का विरोध, ड्राफ्ट वापस लेने की मांग!

नई दिल्ली: डिजिटल मीडिया से जुड़े प्रस्तावित आईटी नियमों के खिलाफ देश के छह प्रमुख पत्रकार संगठनों ने एकजुट होकर आवाज उठाई है। 11 अप्रैल को Press Club of India में आयोजित बैठक में इन संगठनों ने Draft IT (Intermediary Guidelines & Digital Media Ethics Code) Amendment Rules 2026 को बिना शर्त वापस लेने की मांग की।

इस विरोध में Press Club of India, DIGIPUB News India Foundation, Editors Guild of India, Indian Women’s Press Corps, Network of Women in Media India और Delhi Union of Journalists शामिल रहे।

संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित नियम प्रेस की स्वतंत्रता पर “चिलिंग इफेक्ट” डालेंगे, स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स के लिए खतरा बनेंगे और सेंसरशिप की शक्तियों को बिना पर्याप्त निगरानी के बढ़ाएंगे।

प्रेस संगठनों ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें—

  • Rule 3(4) के तहत दिए गए “एक्जीक्यूटिव सेंसरशिप” अधिकारों को वापस लेना
  • 3 घंटे के भीतर कंटेंट हटाने के प्रावधान को खत्म करना
  • ‘सहयोग पोर्टल’ को रोकना
  • और ऐसे नियम बनाने से पहले पत्रकारों व मीडिया संगठनों से परामर्श करना शामिल है

संगठनों ने स्पष्ट कहा कि बिना व्यापक चर्चा और पारदर्शिता के बनाए जा रहे ऐसे नियम लोकतांत्रिक मूल्यों और मीडिया की स्वतंत्रता के लिए गंभीर चुनौती हैं।

फिलहाल, इस मुद्दे पर सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन मीडिया संगठनों का विरोध आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।


News Channel कैसी “पत्रकारिता” कर रहे हैं ये सब सब जानते हैं।
Independent Journalist सोशल मीडिया के माध्यम से थोड़ी बहुत पत्रकारिता कर रहे हैं तो सरकार कानून लाकर सच बोलने की प्रेस की आज़ादी पर अपना नियंत्रण करना चाहती है।
इसको किसी पार्टी के चश्मे से नहीं बल्कि लोकतंत्र और आज़ादी के नज़रिए से देखना और इसका विरोध करना ज़रूरी है। -शरद शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार

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